भगवान शिव
भगवान शिव त्रिदेवों में संहार के देवता तथा 'देवों के देव महादेव' के रूप में पूजे जाते हैं। कैलाश पर्वत के निवासी, माता पार्वती के पति व गणेश-कार्तिकेय के पिता भगवान शिव को बारह ज्योतिर्लिंगों के रूप में पूरे भारत में पूजा जाता है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, आरती, व्रत-कथाएं, पर्व व मंदिर एक साथ उपलब्ध हैं।

भगवान शिव माहात्म्य
भगवान शिव को त्रिदेवों में संहार व पुनर्सृजन के देवता के रूप में पूजा जाता है। वे निराकार, अनादि व अनंत माने जाते हैं, जिनकी पूजा शिवलिंग के रूप में सर्वाधिक प्रचलित है। समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को कंठ में धारण करने के कारण उन्हें 'नीलकंठ' भी कहा जाता है।
भगवान शिव सोमनाथ से लेकर घृष्णेश्वर तक, बारह ज्योतिर्लिंगों के रूप में भारत भर में पूजे जाते हैं, तथा महाशिवरात्रि उनके व माता पार्वती के विवाह की स्मृति में मनाई जाने वाली सबसे बड़ा शिव-पर्व है। प्रत्येक त्रयोदशी तिथि को उनका प्रदोष व्रत तथा श्रावण मास के सोमवारों को विशेष सोमवार व्रत रखा जाता है।
उनका पंचाक्षरी मंत्र 'ॐ नमः शिवाय' अत्यंत सरल किंतु प्रभावशाली माना जाता है, तथा त्रिशूल, डमरू, मस्तक पर अर्धचंद्र, गले में सर्प व तीसरा नेत्र उनके प्रमुख प्रतीक चिह्न हैं। शिव व शक्ति के अभिन्न मिलन को दर्शाने वाला उनका अर्धनारीश्वर स्वरूप भी प्रसिद्ध है, जो सृष्टि में पुरुष व प्रकृति के संतुलन का प्रतीक माना जाता है।
भगवान शिव से जुड़े पाठ
चालीसा एवं आरती
Chalisa & Aartiव्रत कथाएं
Vrat Kathasपर्व एवं व्रत
Festivals & Vratsबारह ज्योतिर्लिंग
The Twelve Jyotirlingasपंच केदार एवं अन्य मंदिर
Panch Kedar & Other Templesभगवान शिव के बारे में
यह पृष्ठ भगवान शिव से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, आरती, व्रत-कथाएं, पर्व व मंदिरों का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
ज्योतिर्लिंग कुल कितने हैं?
भगवान शिव के कुल बारह ज्योतिर्लिंग भारत भर में स्थित हैं, जिनमें से प्रत्येक का अपना पौराणिक महत्व है।
प्रदोष व्रत कब रखा जाता है?
प्रदोष व्रत प्रत्येक माह की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है, तथा यह किस वार को पड़ता है, उसके अनुसार इसे रवि, सोम, भौम आदि प्रदोष कहा जाता है।
महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
यह भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह की स्मृति में तथा शिव जी के प्राकट्य के उपलक्ष्य में मनाई जाती है।
'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का क्या महत्व है?
यह भगवान शिव का पंचाक्षरी मंत्र है, जिसे अत्यंत सरल किंतु अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है, तथा इसका जाप मन की शांति व आध्यात्मिक उन्नति हेतु किया जाता है।