ओंकारेश्वर मंदिर
ओंकारेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के मांधाता द्वीप पर स्थित भगवान शिव का पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा एकमात्र ऐसा द्वीप-मंदिर है जिसका आकार स्वयं ॐ के समान है।

ओंकारेश्वर मंदिर का महत्व
मान्यता है कि विंध्य पर्वत ने अपने अहंकार व पापों से मुक्ति हेतु यहां मिट्टी से एक शिवलिंग बनाकर घोर तपस्या की। भगवान शिव उनकी भक्ति से प्रसन्न हुए तथा दो रूपों में प्रकट हुए, ओंकारेश्वर व अमरेश्वर (ममलेश्वर)। चूंकि मिट्टी का वह टीला ॐ के आकार का बन गया था, अतः इस द्वीप का नाम ओंकारेश्वर पड़ा।
नर्मदा नदी के दो प्रवाहों के मध्य स्थित मांधाता द्वीप को आकाश से देखने पर यह स्पष्ट रूप से ॐ की आकृति में दिखाई देता है, जो इसे बारह ज्योतिर्लिंगों में सबसे विशिष्ट भौगोलिक संरचना वाला मंदिर बनाता है। द्वीप के दूसरे छोर पर स्थित ममलेश्वर मंदिर को अमरेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में भी पूजा जाता है, यद्यपि परंपरागत सूचियों में ओंकारेश्वर को ही बारहवें ज्योतिर्लिंगों में गिना जाता है।
ओंकारेश्वर मंदिर दर्शन की जानकारी
ओंकारेश्वर की एक अनूठी परंपरा है शयन आरती, जो रात्रि लगभग 9 से 9:30 बजे के मध्य होती है। इसके पश्चात गर्भगृह में एक चांदी का पलंग, चौसर (पासों का खेल), चंवर व डमरू सजाए जाते हैं, मान्यता है कि भगवान शिव व माता पार्वती प्रतिरात्रि यहां विश्राम करने तथा चौसर खेलने आते हैं।
द्वीप तक पहुंचने के लिए नर्मदा नदी पर बना पुल पार करना होता है, तथा मंदिर तक पहुंचने के लिए कुछ सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। श्रद्धालु प्रायः निकट स्थित ममलेश्वर मंदिर व नर्मदा घाटों के दर्शन भी साथ में करते हैं।
ओंकारेश्वर मंदिर कैसे पहुंचें
ओंकारेश्वर मंदिर के बारे में
ओंकारेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा ॐ आकार के द्वीप पर स्थित होने के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, विंध्य पर्वत से जुड़ी कथा, शयन आरती की परंपरा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
ओंकारेश्वर मंदिर कहां स्थित है?
यह मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में, नर्मदा नदी के मांधाता द्वीप पर स्थित है।
ओंकारेश्वर नाम का क्या अर्थ है?
मान्यता है कि विंध्य पर्वत द्वारा बनाया गया मिट्टी का शिवलिंग ॐ के आकार का बन गया था, जिस कारण इस स्थान व द्वीप का नाम ओंकारेश्वर पड़ा।
शयन आरती क्या है?
यह रात्रि लगभग 9-9:30 बजे होने वाला एक अनूठा अनुष्ठान है, जिसके पश्चात गर्भगृह में चांदी का पलंग व चौसर सजाया जाता है, मान्यता है कि शिव-पार्वती प्रतिरात्रि यहां विश्राम व चौसर खेलने आते हैं।
क्या ओंकारेश्वर व अमरेश्वर एक ही ज्योतिर्लिंग हैं?
विंध्य पर्वत की तपस्या से शिवजी दो रूपों, ओंकारेश्वर व अमरेश्वर (ममलेश्वर), में प्रकट हुए थे, दोनों मंदिर मांधाता द्वीप के दो छोरों पर स्थित हैं, यद्यपि परंपरागत सूचियों में ओंकारेश्वर को ही बारहवें ज्योतिर्लिंगों में गिना जाता है।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से मार्च सर्वोत्तम रहता है, जब मध्य प्रदेश की भीषण गर्मी से राहत मिलती है। रात्रि लगभग 9-9:30 बजे होने वाली शयन आरती अवश्य देखने योग्य है।