श्री गणेश जी
श्री गणेश जी भगवान शिव व माता पार्वती के पुत्र तथा विघ्नहर्ता व बुद्धि-सिद्धि के देवता हैं। किसी भी शुभ कार्य के आरंभ में सर्वप्रथम उन्हीं की पूजा की जाती है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, आरती व पर्व एक साथ उपलब्ध हैं।

श्री गणेश जी माहात्म्य
एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार माता पार्वती ने अपने उबटन से एक बालक की रचना कर उसे द्वारपाल नियुक्त किया। अनजाने में भगवान शिव से हुए विवाद में उस बालक का मस्तक कट गया, जिसे बाद में भगवान शिव ने हाथी का मस्तक लगाकर पुनर्जीवित किया, तथा इसी कारण गणेश जी गजानन कहलाए।
गणेश जी को प्रथम पूज्य होने का वरदान इसलिए मिला क्योंकि जब देवताओं के मध्य यह होड़ लगी कि पृथ्वी की परिक्रमा पहले कौन करेगा, तब गणेश जी ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें ही संपूर्ण सृष्टि माना, तथा इसी बुद्धिमत्ता से विजयी हुए। गणेश चतुर्थी उनके जन्मोत्सव के रूप में तथा अनंत चतुर्दशी उनके विसर्जन के दिन के रूप में मनाई जाती है।
महाभारत की रचना के समय वेदव्यास जी के तीव्र गति से बोले गए श्लोकों को लिखने हेतु जब उनकी लेखनी टूट गई, तो गणेश जी ने बिना रुके लेखन-कार्य जारी रखने हेतु अपना एक दांत ही तोड़कर लेखनी बना लिया, इसी कारण उन्हें 'एकदंत' भी कहा जाता है। उनकी दो पत्नियां, रिद्धि (समृद्धि) व सिद्धि (उपलब्धि), उनके साथ सदैव पूजी जाती हैं, तथा भगवान कार्तिकेय उनके छोटे भाई हैं।
श्री गणेश जी से जुड़े पाठ
चालीसा
Chalisaव्रत कथा
Vrat Kathaपर्व एवं व्रत
Festivals & Vratsश्री गणेश जी के बारे में
यह पृष्ठ श्री गणेश जी से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, आरती, व्रत-कथा व पर्वों का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।
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सामान्य प्रश्न
गणेश जी को गजानन क्यों कहा जाता है?
भगवान शिव द्वारा उनके कटे मस्तक के स्थान पर हाथी का मस्तक लगाए जाने के कारण उन्हें गजानन (गज+आनन, हाथी-मुख वाले) कहा जाता है।
गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों माना जाता है?
देवताओं की पृथ्वी-परिक्रमा होड़ में अपने माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें ही सृष्टि मानने की बुद्धिमत्ता के कारण उन्हें यह वरदान प्राप्त हुआ कि किसी भी शुभ कार्य में सर्वप्रथम उन्हीं की पूजा होगी।
गणेश चतुर्थी व अनंत चतुर्दशी में क्या संबंध है?
गणेश चतुर्थी गणेश जी की प्रतिष्ठा व जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, तथा दस दिन पश्चात अनंत चतुर्दशी को उनकी प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है।
गणेश जी को एकदंत क्यों कहा जाता है?
महाभारत की रचना के समय वेदव्यास जी के श्लोक लिखते हुए उनकी लेखनी टूट गई थी, तब उन्होंने बिना रुके लेखन-कार्य जारी रखने हेतु अपना एक दांत तोड़कर लेखनी बना लिया, जिस कारण उन्हें 'एकदंत' कहा जाता है।