मुख्यदेवी-देवतामां लक्ष्मी
धन व समृद्धि की देवी

मां लक्ष्मी

मां लक्ष्मी धन, समृद्धि व सौभाग्य की देवी तथा भगवान विष्णु की पत्नी हैं, जिनकी पूजा दीपावली पर सर्वाधिक भव्यता से की जाती है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, आरती, व्रत-कथाएं, पर्व व मंदिर एक साथ उपलब्ध हैं।

मां लक्ष्मी

मां लक्ष्मी माहात्म्य

मान्यता है कि देवताओं व असुरों द्वारा किए गए समुद्र मंथन के समय मां लक्ष्मी कमल के फूल पर विराजमान होकर क्षीरसागर से प्रकट हुईं, तथा उपस्थित सभी देवताओं में से भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में चुना। तभी से वे भगवान विष्णु की सदा साथ रहने वाली अर्धांगिनी मानी जाती हैं, तथा धन, समृद्धि व सुख-सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजी जाती हैं।

दीपावली की अमावस्या रात्रि को स्वच्छ व दीपों से जगमगाते घरों में ही मां लक्ष्मी का आगमन माना जाता है, जिस कारण इस दिन घर की सफाई व दीपों की सजावट का विशेष महत्व है। शरद पूर्णिमा की रात्रि को 'कोजागरी पूजन' के रूप में यह मान्यता है कि मां लक्ष्मी स्वयं 'को जागर्ति' (कौन जाग रहा है) पूछते हुए भ्रमण करती हैं, तथा जागृत व्यक्ति को धन-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

उनका वाहन उल्लू धन के विवेकपूर्ण उपयोग व सजगता का प्रतीक माना जाता है, जो आलस्य व अंधकार की प्रतीक 'अलक्ष्मी' के विपरीत गुणों को दर्शाता है। महालक्ष्मी व्रत व वरलक्ष्मी व्रत जैसे विशेष व्रत परिवार की समृद्धि व सुख-शांति की कामना से रखे जाते हैं, जिनकी अपनी अलग-अलग कथाएं व परंपराएं हैं।

मां लक्ष्मी से जुड़े पाठ

मां लक्ष्मी के बारे में

यह पृष्ठ मां लक्ष्मी से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, आरती, व्रत-कथाएं, पर्व व मंदिरों का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।

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सामान्य प्रश्न

मां लक्ष्मी कैसे प्रकट हुईं?

मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय वे कमल के फूल पर विराजमान होकर क्षीरसागर से प्रकट हुईं, तथा भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में चुना।

दीपावली पर लक्ष्मी पूजन क्यों किया जाता है?

मान्यता है कि मां लक्ष्मी स्वच्छ व दीपों से सजे घरों में ही आगमन करती हैं, जिस कारण दीपावली पर घर की सफाई व दीप-सज्जा के साथ उनकी पूजा की जाती है।

अष्टलक्ष्मी क्या हैं?

अष्टलक्ष्मी मां लक्ष्मी के आठ स्वरूप हैं, जो धन, धान्य, संतान, विजय, साहस आदि विभिन्न प्रकार की समृद्धि की अधिष्ठात्री मानी जाती हैं।

कोजागरी पूजन क्या है?

यह शरद पूर्णिमा की रात्रि को की जाने वाली लक्ष्मी पूजा है, जिसमें मान्यता है कि देवी स्वयं 'को जागर्ति' पूछते हुए भ्रमण करती हैं व जागृत व्यक्ति को आशीर्वाद देती हैं।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

पतिभगवान विष्णु
उत्पत्तिसमुद्र मंथन से प्रकट
वाहनउल्लू
स्वरूपअष्टलक्ष्मी (धन, धान्य, संतान आदि आठ रूप)
प्रमुख उत्सवदीपावली
प्रमुख मंत्रॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः