पाठ विवरण
ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥
एकानन चतुरानन पंचानन राजे।
हंसासन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे॥
अक्षमाला बनमाला मुण्डमाला धारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥
कर के मध्य कमंडलु चक्र त्रिशूल धर्ता।
जगकर्ता जगभर्ता जगपालनकर्ता॥
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
प्रणवाक्षर मध्ये ये तीनों एका॥
काशी में विराजे विश्वनाथ नंदी ब्रह्मचारी।
नित उठि दर्शन पावत महिमा अति भारी॥
त्रिगुण शिवजी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी मनवांछित फल पावे॥
व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।
श्री शिव आरती पाठ विधि
सोमवार अथवा महाशिवरात्रि के दिन दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति 'ॐ जय शिव ओंकारा' दोहराएं।
श्री शिव आरती के बारे में
शिव आरती, जिसे उसकी पहली पंक्ति के कारण 'ॐ जय शिव ओंकारा' के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव को ब्रह्मा, विष्णु और सदाशिव — तीनों रूपों को समाहित करने वाले परम तत्व के रूप में वर्णित करती है। रचना एक स्थायी पंक्ति से आरंभ होकर आठ कड़ियों में आगे बढ़ती है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है, और अंतिम कड़ी में रचयिता का परिचय मिलता है।
इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।
स्वामी शिवानंद के बारे में
आरती की अंतिम कड़ी में रचयिता स्वयं को 'शिवानंद स्वामी' के नाम से पहचानते हैं — यही हस्ताक्षर दुर्गा आरती ('जय अम्बे गौरी') की अंतिम कड़ी में भी मिलता है, जिससे प्रतीत होता है कि दोनों एक ही परंपरागत रचनाकार की देन हैं। कुछ स्रोत इसे पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी (रचयिता, ॐ जय जगदीश हरे) की रचना भी बताते हैं, परंतु यह नाम आरती की अपनी अंतिम कड़ी में कहीं नहीं मिलता। शिवानंद स्वामी के जीवनकाल का कोई निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता।
सामान्य प्रश्न
शिव आरती की रचना किसने की?
आरती की अंतिम कड़ी में रचयिता स्वयं को 'शिवानंद स्वामी' के नाम से पहचानते हैं, परंतु इनकी ऐतिहासिक पहचान निश्चित रूप से ज्ञात नहीं है। कुछ स्रोत इसे पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी की रचना भी बताते हैं।
क्या शिव आरती और 'ॐ जय शिव ओंकारा' एक ही हैं?
हाँ, यह वही आरती है — इसका औपचारिक नाम शिव आरती है, परंतु इसकी पहली पंक्ति 'ॐ जय शिव ओंकारा' होने के कारण इसे इसी नाम से भी जाना जाता है।
आरती की संरचना क्या है?
एक स्थायी पंक्ति और आठ कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।
क्या शिव आरती और शिव चालीसा में अंतर है?
दोनों भगवान शिव को समर्पित हैं, परंतु शिव चालीसा चालीस चौपाइयों की लंबी स्तुति है, जबकि शिव आरती एक छोटी, स्थायी पंक्ति सहित पूजा-आरती है, जो दीप-दर्शन के समय गाई जाती है।
क्या अर्थ जानना आवश्यक है?
आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।
