भगवान श्रीकृष्ण
भगवान श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं, जिन्होंने मथुरा में जन्म लेकर कंस का वध किया, वृंदावन में अपनी बाल-लीलाएं दिखाईं तथा महाभारत के युद्ध में अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, आरती, पर्व, मंदिर व पौराणिक प्रसंग एक साथ उपलब्ध हैं।

भगवान श्रीकृष्ण माहात्म्य
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म द्वापर युग में मथुरा के कारागार में, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि को हुआ था, जो प्रतिवर्ष जन्माष्टमी के रूप में मनाई जाती है। मामा कंस के अत्याचार से बचाने हेतु उन्हें गोकुल भेजा गया, जहां उन्होंने पूतना-वध सहित अनेक बाल-लीलाएं दिखाईं, तथा वृजवासियों को इंद्र-पूजा त्यागकर गोवर्धन पर्वत की पूजा हेतु प्रेरित किया।
बड़े होकर उन्होंने मथुरा लौटकर कंस का वध किया, समुद्र में द्वारका नगरी बसाई, तथा महाभारत के युद्ध में अपने सखा अर्जुन को मोहग्रस्त देख उन्हें भगवद्गीता का उपदेश दिया, जो आज भी जीवन-दर्शन का सर्वोच्च ग्रंथ माना जाता है।
वृंदावन में उनकी राधा रानी के साथ प्रेम-लीला भक्ति व दिव्य प्रेम का सर्वोच्च प्रतीक मानी जाती है, तथा उनकी बांसुरी की धुन आज भी भक्ति संगीत व नृत्य परंपराओं (जैसे रासलीला) का केंद्र बिंदु है। महाभारत में उन्होंने अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाकर धर्मयुद्ध में पांडवों का मार्गदर्शन किया, जिस कारण उन्हें 'योगेश्वर' भी कहा जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े पाठ
चालीसा
Chalisaआरती
Aartiव्रत कथा
Vrat Kathaपर्व एवं व्रत
Festivals & Vratsपौराणिक प्रसंग
Prasangभगवान श्रीकृष्ण के बारे में
यह पृष्ठ भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, आरती, कथा, पर्व, मंदिर व पौराणिक प्रसंगों का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।
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सामान्य प्रश्न
भगवान श्रीकृष्ण किसके अवतार हैं?
भगवान श्रीकृष्ण भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं, जिनका जन्म मथुरा में मामा कंस के अत्याचार का अंत करने हेतु हुआ था।
भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रमुख मंदिर कौन-से हैं?
मथुरा स्थित श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर तथा द्वारका स्थित द्वारकाधीश मंदिर उनसे जुड़े दो सर्वाधिक प्रमुख मंदिर हैं।
भगवद्गीता का उपदेश कब दिया गया था?
भगवान श्रीकृष्ण ने महाभारत के युद्ध के प्रारंभ में, कुरुक्षेत्र के मैदान में, मोहग्रस्त अर्जुन को भगवद्गीता का उपदेश दिया था, जिसकी स्मृति में गीता जयंती मनाई जाती है।
भगवान श्रीकृष्ण को 'योगेश्वर' क्यों कहा जाता है?
महाभारत के युद्ध में अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाकर उन्होंने धर्मयुद्ध का मार्गदर्शन किया तथा भगवद्गीता के माध्यम से कर्मयोग, भक्तियोग व ज्ञानयोग का उपदेश दिया, जिस कारण उन्हें 'योगेश्वर' (योग के स्वामी) कहा जाता है।