
जगन्नाथ मंदिर, पुरी का महत्व
जगन्नाथ मंदिर की मूर्तियां, जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा, काष्ठ से निर्मित हैं, जो हिंदू परंपरा में एक दुर्लभ विशेषता है। नवकलेवर नामक अनुष्ठान में, जो प्रत्येक 8 से 19 वर्षों में एक विशेष खगोलीय गणना के अनुसार होता है, पुरानी मूर्तियों को नई काष्ठ-मूर्तियों से प्रतिस्थापित किया जाता है।
जगन्नाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा के लिए जाना जाता है, जो प्रतिवर्ष आषाढ़ माह में आयोजित होती है, इस दौरान तीनों देवताओं को विशाल, अलंकृत रथों पर बिठाकर गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है। मंदिर अखिल भारतीय चार धाम में पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है।
जगन्नाथ मंदिर, पुरी दर्शन की जानकारी
जगन्नाथ मंदिर पुरी शहर के भीतर ही स्थित है, अतः यहां तक पहुंचना अन्य चार धामों की तुलना में अधिक सुगम है, न कोई ट्रेकिंग, न ही ऊंचाई से जुड़ी कोई चुनौती। मंदिर परिसर में महाप्रसाद (मंदिर की रसोई में तैयार भोग) का विशेष महत्व है, जिसे लाखों श्रद्धालु प्रतिदिन ग्रहण करते हैं।
मंदिर की एक विशेष व दृढ़ता से पालित परंपरा है, यहां केवल हिंदू, जैन, बौद्ध व सिख धर्मावलंबियों को ही मुख्य गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति है, गैर-हिंदू व विदेशी नागरिकों को अनुमति नहीं दी जाती। रथ यात्रा के समय पुरी में अत्यधिक भीड़ रहती है, अतः उस दौरान यात्रा की विशेष योजना बनाना उचित रहता है।
जगन्नाथ मंदिर, पुरी कैसे पहुंचें
जगन्नाथ मंदिर, पुरी के बारे में
जगन्नाथ मंदिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व सुभद्रा को समर्पित एक पावन धाम है, जो अखिल भारतीय चार धाम में से एक है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, रथ यात्रा व नवकलेवर परंपरा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
जगन्नाथ मंदिर कहां स्थित है?
यह ओडिशा के पुरी शहर में, बंगाल की खाड़ी के तट के निकट स्थित है।
नवकलेवर क्या है?
नवकलेवर वह अनुष्ठान है, जिसमें प्रत्येक 8 से 19 वर्षों में एक विशेष खगोलीय गणना के अनुसार, मंदिर की पुरानी काष्ठ-मूर्तियों को नई मूर्तियों से प्रतिस्थापित किया जाता है।
क्या गैर-हिंदुओं को जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश की अनुमति है?
नहीं, मंदिर की दृढ़ता से पालित परंपरा के अनुसार, केवल हिंदू, जैन, बौद्ध व सिख धर्मावलंबियों को ही मुख्य गर्भगृह में प्रवेश की अनुमति है।
रथ यात्रा कब आयोजित होती है?
रथ यात्रा प्रतिवर्ष आषाढ़ माह (जून-जुलाई) में आयोजित होती है, जब तीनों देवताओं को रथों पर बिठाकर गुंडिचा मंदिर तक ले जाया जाता है।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से फरवरी सर्वोत्तम रहता है, जब ओडिशा तट की गर्मी व मानसून की उमस दोनों से राहत मिलती है। आषाढ़ माह में होने वाली रथ यात्रा के समय अत्यधिक भीड़ रहती है।