मुख्यप्रसंगश्रीराम-सीता विवाह प्रसंग

श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग

श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग वाल्मीकि रामायण के बाल कांड में वर्णित वह कथा है, जिसमें भगवान श्रीराम शिव-धनुष तोड़कर माता सीता का वरण करते हैं, इसी विवाह की स्मृति में विवाह पंचमी मनाई जाती है।

अध्याय/

अध्याय · जनक की प्रतिज्ञा व शिव-धनुष भंग

मिथिला के राजा जनक के पास भगवान शिव का एक अत्यंत भारी व दिव्य धनुष था, जिसे उठाना तो दूर, हिलाना भी किसी सामान्य पुरुष के वश की बात न थी। राजा जनक ने प्रतिज्ञा की थी कि जो भी राजकुमार इस धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी के साथ वे अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे, जो स्वयं भूमि से प्रकट हुई थीं तथा जिनका पालन-पोषण जनक ने अपनी पुत्री के रूप में किया था।

अनेक बलशाली राजाओं व राजकुमारों ने इस धनुष को उठाने का प्रयास किया, किंतु सभी असफल रहे। इसी समय गुरु विश्वामित्र के साथ श्रीराम व लक्ष्मण मिथिला पधारे। स्वयंवर सभा में जब कोई भी धनुष को हिला तक न सका, तो गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से श्रीराम धनुष के समक्ष गए।

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श्रीराम ने सहजता से धनुष उठाया, तथा जैसे ही उन्होंने प्रत्यंचा चढ़ाने हेतु उसे झुकाया, वह दिव्य धनुष मध्य से टूट गया, जिसकी ध्वनि से संपूर्ण सभा गूंज उठी। धनुष भंग होते ही राजा जनक की प्रतिज्ञा पूर्ण हुई, तथा माता सीता ने प्रसन्नतापूर्वक श्रीराम के गले में वरमाला डाल दी।

अध्याय · चारों भाइयों का विवाह

राजा जनक ने तुरंत अपने पुरोहितों को अयोध्या भेजकर राजा दशरथ को इस शुभ समाचार से अवगत कराया व विवाह हेतु आमंत्रित किया। राजा दशरथ अपने गुरु वशिष्ठ व संपूर्ण परिवार के साथ बड़ी धूमधाम से मिथिला पधारे।

इस अवसर पर केवल श्रीराम-सीता का ही नहीं, बल्कि दशरथ के तीनों अन्य पुत्रों का भी विवाह जनक-परिवार की कन्याओं से संपन्न हुआ, लक्ष्मण का विवाह सीता की बहन उर्मिला से, भरत का विवाह जनक के भाई कुशध्वज की पुत्री मांडवी से, तथा शत्रुघ्न का विवाह मांडवी की बहन श्रुतकीर्ति से हुआ। इस प्रकार मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पंचमी को चारों भाइयों का विवाह वैदिक रीति से संपन्न हुआ।

इसी शुभ दिवस की स्मृति में प्रतिवर्ष विवाह पंचमी मनाई जाती है, जिसमें श्रीराम-सीता के विवाह-प्रसंग का पाठ व स्मरण किया जाता है, तथा अनेक स्थानों पर, विशेषकर अयोध्या व जनकपुर (नेपाल) में, इसे विशेष श्रद्धा व उत्सव के साथ मनाया जाता है।

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श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग के बारे में

यह प्रसंग दो अध्यायों में विभक्त है। पहले अध्याय में राजा जनक की स्वयंवर-प्रतिज्ञा व श्रीराम द्वारा शिव-धनुष भंग की कथा है। दूसरे अध्याय में चारों भाइयों, राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न, के विवाह की कथा दी गई है।

यह प्रसंग मार्गशीर्ष मास की विवाह पंचमी से जुड़ा है। इस पृष्ठ पर दोनों अध्यायों का पूर्ण पाठ शुद्ध हिंदी में, अक्षर-आकार समायोजन व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

रचनाकार
वाल्मीकि रामायण
पौराणिक काल (बाल कांड)

वाल्मीकि रामायण के बारे में

श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग का कोई एक प्रामाणिक मुद्रित 'कथा-पाठ' नहीं है, यह वाल्मीकि रामायण के बाल कांड में वर्णित एक सुविख्यात व सर्वाधिक सुनाई जाने वाली कथा है, जिसे तुलसीदास कृत रामचरितमानस में भी वर्णित किया गया है। यहां दिया गया शब्दांकन मौलिक रूप से किया गया है, ताकि यह किसी एक वेबसाइट या प्रकाशन के पाठ की अविकल प्रतिलिपि न बने, तथापि घटनाक्रम रामायण की सुस्थापित परंपरा पर आधारित है।

सामान्य प्रश्न

राजा जनक ने क्या प्रतिज्ञा की थी?

उन्होंने प्रतिज्ञा की थी कि जो भी राजकुमार भगवान शिव के दिव्य धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा देगा, उसी के साथ वे अपनी पुत्री सीता का विवाह करेंगे।

शिव-धनुष किसने तोड़ा?

भगवान श्रीराम ने गुरु विश्वामित्र की आज्ञा से धनुष उठाया, तथा प्रत्यंचा चढ़ाने हेतु झुकाते ही वह मध्य से टूट गया।

जनक-परिवार में और किन विवाहों का वर्णन है?

श्रीराम-सीता के साथ ही लक्ष्मण का विवाह उर्मिला से, भरत का विवाह मांडवी से, तथा शत्रुघ्न का विवाह श्रुतकीर्ति से भी संपन्न हुआ था।

विवाह पंचमी कहां विशेष रूप से मनाई जाती है?

यह अनेक स्थानों पर मनाई जाती है, किंतु अयोध्या व जनकपुर (नेपाल) में इसे विशेष श्रद्धा व भव्यता के साथ मनाया जाता है।

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पाठ विवरण

रचनाकारवाल्मीकि रामायण
संरचना२ अध्याय
पाठ समय५ मिनट