श्री राम आरती
श्री राम आरती, आरती कीजै श्री रघुवर जी की, भगवान श्रीराम की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती है, जो रामचरितमानस और सुंदरकांड के पाठ के बाद, राम नवमी पर और नित्य संध्या पूजा में गाई जाती है। यहां पूरा पाठ हर कड़ी के अर्थ सहित दिया गया है।

पाठ विवरण
आरती कीजै श्री रघुबर की।
सत चित आनंद शिव सुंदर की॥
दशरथ-तनय कौसिला-नंदन,
सुर-मुनि-रक्षक दैत्य-निकंदन,
अनुगत-भक्त भक्त-उर-चंदन,
मर्यादा-पुरुषोत्तम वर की॥
निर्गुन-सगुन, अरूप-रूपनिधि,
सकल लोक-वंदित विभिन्न विधि,
हरण शोक-भय, दायक सब सिधि,
मायारहित दिव्य नर-वर की॥
जानकिपति सुराधिपति जगपति,
अखिल लोक पालक त्रिलोक गति,
विश्ववंद्य अनवद्य अमित-मति,
एकमात्र गति सचराचर की॥
शरणागत-वत्सल-व्रतधारी,
भक्त कल्पतरु-वर असुरारी,
नाम लेत जग पावनकारी,
वानर-सखा दीन-दुख-हर की॥
व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।
श्री राम आरती पाठ विधि
प्रतिदिन संध्या समय, राम नवमी पर, या रामचरितमानस और सुंदरकांड के पाठ के बाद, भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी के चित्र के सामने घी का दीप जलाकर आरती करें। हर कड़ी के बाद टेक 'आरती कीजै श्री रघुबर की, सत चित आनंद शिव सुंदर की' दोहराएं।
श्री राम आरती के बारे में
श्री राम आरती, आरती कीजै श्री रघुवर जी की, एक टेक और चार कड़ियों की आरती है। इसमें भगवान श्रीराम को दशरथ-नंदन और कौशल्या-नंदन, निर्गुण और सगुण दोनों, जानकीपति और त्रिलोक के सहारे, और शरणागतों पर स्नेह का व्रत रखने वाले वानरों के सखा के रूप में गाया गया है। इसकी टेक में उन्हें सत्, चित् और आनंद का स्वरूप कहा गया है।
इस पृष्ठ पर पूरा पाठ देवनागरी में, हर कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। पाठ प्रचलित मुद्रित आरती-संग्रह के अनुसार है; कुछ वेबसाइटों पर 'अरूप-रूपनिधि' की जगह 'अनूप रूप निधि' और 'सब सिधि' की जगह 'नव निधि' जैसे पाठ-भेद मिलते हैं।
श्री राम आरती, आरती कीजै श्री रघुवर जी की, के रचयिता का नाम किसी पंक्ति में नहीं आता, इसलिए इसे परंपरागत रचना माना जाता है। यह प्रचलित मुद्रित आरती-संग्रहों में भगवान मर्यादा पुरुषोत्तम की आरती के रूप में छपती आई है, और रामायण पाठ, सुंदरकांड और राम नवमी के अवसर पर सबसे अधिक गाई जाती है।
श्री राम आरती के लाभ
मान्यता है कि श्रद्धा से यह आरती करने पर शोक और भय दूर होते हैं और भगवान श्रीराम की कृपा से सब कार्य सिद्ध होते हैं, जैसा आरती स्वयं कहती है: 'हरण शोक-भय, दायक सब सिधि'। रामायण पाठ और सुंदरकांड के बाद इसे गाने से पाठ पूर्ण माना जाता है।
सामान्य प्रश्न
श्री राम जी की सबसे प्रचलित आरती कौन-सी है?
'आरती कीजै श्री रघुवर जी की, सत चित आनंद शिव सुंदर की' भगवान श्रीराम की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती है, जो मुद्रित आरती-संग्रहों में भी राम जी की आरती के रूप में छपती है। गोस्वामी तुलसीदास की 'श्री रामचंद्र कृपालु भजमन' भी आरती के समय गाई जाती है, जो वास्तव में एक स्तुति है।
यह आरती कब गाई जाती है?
प्रतिदिन संध्या पूजा में, राम नवमी और विजयादशमी पर, और रामचरितमानस, अखंड रामायण या सुंदरकांड के पाठ के अंत में।
श्री राम आरती की रचना किसने की?
आरती की किसी पंक्ति में रचयिता का नाम नहीं है, इसलिए इसे परंपरागत रचना माना जाता है।
क्या श्री राम आरती और राम स्तुति एक ही हैं?
नहीं। राम स्तुति, 'श्री रामचंद्र कृपालु भजमन', गोस्वामी तुलसीदास की विनय पत्रिका का पद है, जबकि यह आरती, 'आरती कीजै श्री रघुवर जी की', एक अलग परंपरागत रचना है जो दीप से आरती करते समय गाई जाती है।
आरती की संरचना क्या है?
एक टेक और चार कड़ियां हैं। हर कड़ी के बाद टेक 'आरती कीजै श्री रघुबर की' दोहराई जाती है।