मुख्यआरतीश्री राम आरती

श्री राम आरती

श्री राम आरती, आरती कीजे श्रीरामलला की, भगवान श्रीराम की सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है, जिसका पूर्ण पाठ यहां अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री राम आरती
कड़ी/१८

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१८ पंक्ति-युग्म
पाठ समय४ मिनट
कड़ी

आरती कीजे श्रीरामलला की।
पूर्ण निपुण धनुवेद कला की॥

धनुष वान कर सोहत नीके।
शोभा कोटि मदन मद फीके॥

सुभग सिंहासन आप बिराजैं।
वाम भाग वैदेही राजैं॥

कर जोरे रिपुहन हनुमाना।
भरत लखन सेवत बिधि नाना॥

शिव अज नारद गुन गन गावैं।
निगम नेति कह पार न पावैं॥

नाम प्रभाव सकल जग जानैं।
शेष महेश गनेस बखानैं॥

भगत कामतरु पूरणकामा।
दया क्षमा करुना गुन धामा॥

सुग्रीवहुँ को कपिपति कीन्हा।
राज विभीषन को प्रभु दीन्हा॥

खेल खेल महुं सिंधु बंधाये।
लोक सकल अनुपम यश छाये॥

दुर्गम गढ़ लंकापति मारे।
सुर नर मुनि सबके भय टारे॥

देवन थापि सुजस विस्तारे।
कोटिक दीन मलीन उधारे॥

कपि केवट खग निसचर केरे।
करि करुना दुःख दोष निवेरे॥

देत सदा दासन्ह को माना।
जगतपूज भे कपि हनुमाना॥

आरत दीन सदा सत्कारे।
तिहुपुर होत राम जयकारे॥

कौसल्यादि सकल महतारी।
दशरथ आदि भगत प्रभु झारी॥

सुर नर मुनि प्रभु गुन गन गाई।
आरति करत बहुत सुख पाई॥

धूप दीप चन्दन नैवेदा।
मन दृढ़ करि नहिं कवनव भेदा॥

राम लला की आरती गावै।
राम कृपा अभिमत फल पावै॥

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श्री राम आरती पाठ विधि

प्रतिदिन संध्या समय अथवा राम नवमी के मध्याह्न पूजन में, भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण जी व हनुमान जी के समक्ष दीप जलाकर इस आरती का पाठ करें, तथा धूप-चंदन व भोग अर्पित करें।

पाठ दिवस
प्रतिदिन संध्या एवं राम नवमी
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राम चालीसा
स्तोत्र · ९ मिनट
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श्री राम आरती के बारे में

श्री राम आरती, आरती कीजे श्रीरामलला की, भगवान श्रीराम के दरबार, उनकी लीलाओं, सुग्रीव को राजपद, सेतु-बंधन, रावण-वध, विभीषण को राज्य, तथा उनके प्रति देवताओं व भक्तों की श्रद्धा का वर्णन करती है। रचना अठारह पंक्ति-युग्मों में निरंतर क्रम से आगे बढ़ती है, बिना किसी पृथक दोहराई जाने वाली टेक के।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध अवधी में, प्रत्येक पंक्ति-युग्म के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

श्री राम आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। यह अवधी भाषा में रचित है और उत्तर भारत के घर-घर व मंदिरों में संध्या समय तथा राम नवमी के अवसर पर गाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय राम-आरतियों में से एक है। ॐ जय जगदीश हरे अथवा आरती कुंजबिहारी की के विपरीत, इसमें कोई पृथक स्थायी पंक्ति (टेक) नहीं दोहराई जाती, संपूर्ण पाठ निरंतर क्रम में गाया जाता है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना (अवधी)

सामान्य प्रश्न

श्री राम आरती की रचना किसने की?

इसके रचयिता का कोई निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता, किसी भी पंक्ति में कोई हस्ताक्षर नहीं मिलता।

क्या श्री राम आरती और राम स्तुति एक ही हैं?

नहीं, ये दो भिन्न रचनाएं हैं। राम स्तुति (श्री रामचंद्र कृपालु भजमन) संस्कृत-अवधी में रची गई स्तुति है, जबकि यह आरती (आरती कीजे श्रीरामलला की) अवधी में रची गई अलग रचना है, जो संध्या पूजन में दीप के साथ गाई जाती है।

आरती की संरचना क्या है?

इसमें कुल अठारह पंक्ति-युग्म हैं, जो बिना किसी पृथक टेक के निरंतर क्रम में गाए जाते हैं।

आरती का पाठ कब करना चाहिए?

प्रतिदिन संध्या समय, तथा विशेष रूप से राम नवमी के मध्याह्न पूजन में, दीप जलाकर इसका पाठ करना उत्तम माना जाता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक पंक्ति-युग्म का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

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