पाठ विवरण
ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
जिस घर में तुम रहती, सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता।
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।
श्री लक्ष्मी आरती पाठ विधि
शुक्रवार अथवा दीपावली के दिन दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति 'ॐ जय लक्ष्मी माता' दोहराएं।
श्री लक्ष्मी आरती के बारे में
लक्ष्मी आरती, जिसे उसकी पहली पंक्ति के कारण 'ॐ जय लक्ष्मी माता' के नाम से भी जाना जाता है, माँ लक्ष्मी को उमा, रमा, ब्रह्माणी और दुर्गा के रूप में, तथा सुख-संपत्ति, ऋद्धि-सिद्धि और चौदह रत्नों की दाता के रूप में वर्णित करती है। रचना एक स्थायी पंक्ति से आरंभ होकर सात कड़ियों में आगे बढ़ती है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।
इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।
अज्ञात के बारे में
इस आरती के रचयिता का कोई निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता — न तो इसकी किसी कड़ी में कोई हस्ताक्षर मिलता है, और न ही किसी प्रामाणिक स्रोत में इसका उल्लेख है। कुछ लोग इसे 'ॐ जय जगदीश हरे' की परंपरा से जोड़ते हैं, क्योंकि दोनों की रचना-शैली और छंद एक समान हैं, परंतु यह संबंध अपुष्ट है। यह माँ लक्ष्मी की सबसे लोकप्रिय आरती है, जो शुक्रवार, दीपावली और लक्ष्मी पूजा के लगभग हर अवसर पर गाई जाती है।
सामान्य प्रश्न
लक्ष्मी आरती की रचना किसने की?
इसके रचयिता का कोई निश्चित ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिलता। कुछ लोग इसे 'ॐ जय जगदीश हरे' की परंपरा से जोड़ते हैं, क्योंकि दोनों की रचना-शैली मिलती-जुलती है, परंतु यह संबंध अपुष्ट है।
क्या लक्ष्मी आरती और 'ॐ जय लक्ष्मी माता' एक ही हैं?
हाँ, यह वही आरती है — इसका औपचारिक नाम लक्ष्मी आरती है, परंतु इसकी पहली पंक्ति 'ॐ जय लक्ष्मी माता' होने के कारण इसे इसी नाम से भी जाना जाता है।
आरती की संरचना क्या है?
एक स्थायी पंक्ति और सात कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।
क्या लक्ष्मी आरती और लक्ष्मी चालीसा में अंतर है?
दोनों माँ लक्ष्मी को समर्पित हैं, परंतु लक्ष्मी चालीसा चालीस चौपाइयों की लंबी स्तुति है, जबकि लक्ष्मी आरती एक छोटी, स्थायी पंक्ति सहित पूजा-आरती है, जो दीप-दर्शन के समय गाई जाती है।
क्या अर्थ जानना आवश्यक है?
आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।
