मुख्यआज का पाठ

आज का पाठ

सप्ताह के हर दिन का किसी न किसी देवी-देवता से विशेष संबंध माना जाता है। नीचे आज के पाठ के साथ-साथ सातों दिनों का पूरा मार्गदर्शक भी दिया गया है।

आज का पाठ

Today's Reading

सप्ताह के अनुसार पाठ

रविवार

भगवान सूर्य

रविवार भगवान सूर्य को समर्पित है, जिनका तेज व ऊर्जा समस्त जीवन का आधार है। इस दिन उगते सूर्य को जल अर्पित करना और सूर्य चालीसा का पाठ करना स्वास्थ्य, तेज व सफलता के लिए शुभ माना जाता है।

सोमवार

भगवान शिव

सोमवार भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है, क्योंकि 'सोम' चंद्रमा के स्वामी शिव का ही एक नाम है। जल, दूध व बेलपत्र से शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने और मन को शांति मिलने की मान्यता है।

व्रत: अनेक भक्त सोमवार व्रत रखते हैं, जिसमें दिनभर उपवास कर सायंकाल शिव पूजन किया जाता है, विशेषकर श्रावण मास में यह परंपरा और अधिक प्रचलित है।

मंगलवार

हनुमान जी

मंगलवार हनुमान जी को समर्पित है, जिनकी शक्ति, भक्ति व साहस का स्मरण भक्त संकटों व नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा पाने हेतु करते हैं। इस दिन हनुमान चालीसा व बजरंग बाण का पाठ व्यापक रूप से प्रचलित है।

व्रत: कुछ भक्त मंगलवार का व्रत भी रखते हैं और हनुमान मंदिर जाकर विशेष पूजन करते हैं।

बुधवार

श्री गणेश

बुधवार श्री गणेश तथा ग्रह बुध से जुड़ा माना जाता है, जो बुद्धि व संवाद के कारक हैं। इस दिन विघ्नहर्ता गणेश की आराधना नए कार्यों में सफलता व बुद्धि-विवेक पाने के लिए की जाती है।

गुरुवार

भगवान विष्णु

गुरुवार भगवान विष्णु तथा देवगुरु बृहस्पति को समर्पित है, जो ज्ञान व मार्गदर्शन के प्रतीक हैं। इस दिन विष्णु व गुरुजनों की आराधना ज्ञान, समृद्धि व शुभता के लिए की जाती है।

व्रत: गुरुवार व्रत में उपवास रखकर विष्णु व बृहस्पति की पूजा की जाती है, जिससे कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति मजबूत मानी जाती है।

शुक्रवार

मां लक्ष्मी व संतोषी माता

शुक्रवार को माँ लक्ष्मी की कृपा पाने हेतु शुभ माना जाता है, वहीं संतोषी माता की पूजा भी इसी दिन प्रचलित है, जो संतोष व मनोकामना-पूर्ति की देवी मानी जाती हैं। अनेक घरों में शुक्रवार सायं लक्ष्मी पूजन किया जाता है।

व्रत: संतोषी माता की प्रसन्नता हेतु सोलह शुक्रवार व्रत रखने की परंपरा है, जिसमें लगातार सोलह शुक्रवार उपवास व कथा-श्रवण किया जाता है।

शनिवार

शनि देव

शनिवार शनि देव को समर्पित है, जिनका प्रभाव ज्योतिष में न्याय व कर्मफल से जोड़ा जाता है। इस दिन शनि की आराधना व तिल के तेल का दान कठिनाइयों को कम करने व अनुशासन लाने हेतु किया जाता है।

व्रत: शनि दोष या साढ़े साती के प्रभाव को शांत करने हेतु अनेक भक्त शनिवार व्रत रखते हैं।