मुख्यत्योहारदीपावली (दिवाली)
प्रकाश का महापर्व · कार्तिक अमावस्या (लक्ष्मी पूजन)

दीपावली (दिवाली)

दीपावली प्रकाश का महापर्व है, जो कार्तिक मास की अमावस्या को मां लक्ष्मी व भगवान गणेश के पूजन के साथ, बुराई पर अच्छाई की विजय के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

दीपावली (दिवाली)
अगली तिथि
८ नवम्बर २०२६

लक्ष्मी पूजन का सर्वाधिक शुभ समय प्रदोष काल में, अमावस्या तिथि रहते हुए ही माना जाता है, अतः सटीक मुहूर्त हेतु नज़दीकी पंचांग देखें। दीपावली पांच दिन के महापर्व, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज, का मुख्य दिन है; वर्ष 2026 व 2028 में तिथि क्षय के कारण नरक चतुर्दशी और दिवाली एक ही दिन पड़ रहे हैं।

दीपावली (दिवाली) का महत्व

'दीपावली' शब्द का अर्थ है 'दीपों की पंक्ति'। मान्यता है कि भगवान श्रीराम चौदह वर्ष के वनवास व रावण पर विजय के पश्चात इसी अमावस्या को अयोध्या लौटे थे, और प्रजा ने घी के दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। यही परंपरा आज भी दीपावली पर घर-घर दीप जलाने के रूप में जीवित है।

इसी अमावस्या को समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं, इसलिए धन व समृद्धि की देवी लक्ष्मी की, तथा विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा इस दिन विशेष रूप से की जाती है। कुछ परंपराओं में मां सरस्वती की भी पूजा की जाती है, ताकि ज्ञान व बुद्धि का भी आशीर्वाद मिले।

लक्ष्मी चालीसा
चालीसा · दिवाली पूजन में पाठ

दीपावली वास्तव में पांच दिनों का महापर्व है, धनतेरस से आरंभ होकर, नरक चतुर्दशी, मुख्य दिवाली (लक्ष्मी पूजन), गोवर्धन पूजा से होते हुए भाई दूज पर संपन्न होता है। प्रत्येक दिन का अपना अलग महत्व और परंपरा है।

दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा
कथा · राजा बलि व वामन अवतार की कथा

दीपावली (दिवाली) कैसे मनाई जाती है

दिवाली से पहले घरों की साफ-सफाई व रंगाई-पुताई की जाती है, तथा मुख्य द्वार व आंगन को रंगोली और फूलों से सजाया जाता है। संध्या समय घर के हर कोने में दीप जलाए जाते हैं।

प्रदोष काल में मां लक्ष्मी व भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा की जाती है, जिसमें कमल के फूल, खील-बताशे व मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है। व्यापारी वर्ग अपने बहीखातों की भी पूजा करते हैं।

लक्ष्मी आरती
आरती · मुख्य पूजन में गाई जाने वाली आरती

पूजा के पश्चात परिवार व मित्रों के साथ मिठाइयां व उपहार बांटे जाते हैं, नए वस्त्र पहने जाते हैं तथा आतिशबाज़ी की जाती है। यह उत्सव धनतेरस से आरंभ होकर भाई दूज तक, पांच दिनों तक चलता है।

दीपावली (दिवाली) पूजा विधि

संध्या समय स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान पर मां लक्ष्मी व भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर, प्रदोष काल में कमल पुष्प, खील-बताशे व मिठाइयों का भोग अर्पित करें, दीप प्रज्वलित कर आरती करें। पूजा के पश्चात परिवार सहित मिठाई ग्रहण कर व्रत का पारण करें।

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दीपावली (दिवाली) के बारे में

दीपावली भारत का सबसे बड़ा और व्यापक रूप से मनाया जाने वाला त्योहार है, जो कार्तिक मास की अमावस्या को मां लक्ष्मी व भगवान गणेश के पूजन के साथ मनाया जाता है। इस पृष्ठ पर दिवाली का महत्व, भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी की कथा, मां लक्ष्मी के प्राकट्य तथा पूजा-विधि की जानकारी दी गई है।

दिवाली के अन्य चार दिनों, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, गोवर्धन पूजा और भाई दूज, की विस्तृत जानकारी हेतु उनके अलग पृष्ठ भी उपलब्ध हैं। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

दिवाली कब मनाई जाती है?

दिवाली प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः अक्टूबर-नवंबर में आती है।

दिवाली क्यों मनाई जाती है?

दिवाली भगवान श्रीराम की चौदह वर्ष के वनवास व रावण पर विजय के पश्चात अयोध्या वापसी के उपलक्ष्य में, तथा मां लक्ष्मी के समुद्र मंथन से प्राकट्य के स्मरण में मनाई जाती है।

दिवाली के पांच दिन कौन-कौन से हैं?

दिवाली के पांच दिन हैं, धनतेरस, नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली), मुख्य दिवाली (लक्ष्मी पूजन), गोवर्धन पूजा, और भाई दूज।

लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त कब होता है?

लक्ष्मी पूजन का सर्वाधिक शुभ समय संध्या के प्रदोष काल में, अमावस्या तिथि रहते हुए माना जाता है, जिसका सटीक समय प्रतिवर्ष व शहर अनुसार बदलता है।

दिवाली और दीपावली में क्या अंतर है?

दोनों एक ही पर्व के नाम हैं। 'दीपावली' संस्कृत मूल शब्द है, जिसका अर्थ है 'दीपों की पंक्ति', जबकि 'दिवाली' इसका प्रचलित हिंदी रूप है।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवतामां लक्ष्मी, भगवान गणेश
तिथिकार्तिक अमावस्या
शुभ समयप्रदोष काल में लक्ष्मी पूजन
पर्व की अवधिपांच दिन, धनतेरस से भाई दूज तक
व्रत प्रकारदिनभर उपवास रखकर संध्या पूजन के बाद पारण