धनतेरस से ही पांच दिन के दिवाली पर्व का आरंभ होता है, जो भाई दूज तक चलता है। सोना-चांदी अथवा बर्तन खरीदने का शुभ मुहूर्त शहर अनुसार बदलता है, इसलिए नज़दीकी पंचांग देखें।
धनतेरस का महत्व
'धनतेरस' शब्द 'धन' और 'त्रयोदशी' से मिलकर बना है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान इसी तिथि को भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। धन्वंतरि को आयुर्वेद और चिकित्सा का देवता माना जाता है, इसलिए इस दिन स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना से उनकी पूजा की जाती है।
एक अन्य कथा के अनुसार, राजा हिम के पुत्र की विवाह के चौथे दिन सर्पदंश से मृत्यु होने की भविष्यवाणी थी। उसकी पत्नी ने विवाह की रात दरवाज़े पर सोने-चांदी के आभूषण और दीपक जलाकर रख दिए, जिनकी चमक से यमराज सर्प रूप में भीतर प्रवेश नहीं कर सके। इसी कथा के आधार पर धनतेरस की रात्रि यमराज के निमित्त दीपदान करने की परंपरा है।
धनतेरस को सोना, चांदी, बर्तन अथवा नए वाहन खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह समृद्धि व सौभाग्य लेकर आता है। यहीं से पांच दिन के दिवाली महापर्व का आरंभ होता है, जो भाई दूज तक चलता है।
धनतेरस कैसे मनाई जाती है
धनतेरस के दिन घर की साफ-सफाई कर, मुख्य द्वार पर रंगोली सजाई जाती है। बाज़ारों में सोना-चांदी, बर्तन और झाड़ू जैसी वस्तुओं की विशेष खरीदारी होती है, जिसे समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
संध्या समय घर के मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके यमराज के निमित्त एक दीपक जलाया जाता है, जिसे 'यम दीपदान' कहा जाता है, ताकि परिवार को अकाल मृत्यु से रक्षा मिले।
इसके पश्चात घर में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश तथा धन्वंतरि व कुबेर की पूजा की जाती है, तथा दीप जलाकर घर को रोशन किया जाता है, जिसके साथ ही पांच दिन के दिवाली उत्सव की शुरुआत हो जाती है।
धनतेरस पूजा विधि
सायंकाल स्नान कर घर की सफाई व रंगोली पूर्ण करें। मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त एक दीपक जलाएं। तत्पश्चात घर में मां लक्ष्मी, भगवान गणेश, धन्वंतरि व कुबेर की पूजा करें, नए बर्तन अथवा आभूषण की पूजा कर आरती करें।
धनतेरस के बारे में
धनतेरस पांच दिन के दिवाली महापर्व का पहला दिन है, जिस पर भगवान धन्वंतरि के प्रकट होने और यमराज के निमित्त दीपदान की परंपरा मनाई जाती है। इस पृष्ठ पर धनतेरस का महत्व, यम दीपदान की कथा, तथा सोना-चांदी खरीदने की परंपरा की जानकारी दी गई है, साथ ही घर पर पूजा-विधि भी बताई गई है।
दिवाली के अगले दिनों, नरक चतुर्दशी, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज, की जानकारी हेतु उनके अलग पृष्ठ भी देखें। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
धनतेरस कब मनाई जाती है?
धनतेरस दिवाली से दो दिन पहले, कार्तिक मास की कृष्ण त्रयोदशी तिथि को मनाई जाती है।
यम दीपदान क्या है?
यम दीपदान धनतेरस की रात्रि मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा में यमराज के निमित्त दीपक जलाने की परंपरा है, ताकि परिवार को अकाल मृत्यु से रक्षा मिले।
धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ माना जाता है?
सोना, चांदी, बर्तन अथवा नए वाहन खरीदना शुभ माना जाता है, क्योंकि इसे समृद्धि व सौभाग्य लाने वाला माना जाता है।
धनतेरस को किस देवता की पूजा होती है?
धनतेरस को मुख्य रूप से भगवान धन्वंतरि व कुबेर की, तथा साथ ही मां लक्ष्मी व भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है।
