वर्ष 2026 व 2028 में चतुर्दशी तिथि क्षय होने के कारण नरक चतुर्दशी और दिवाली (लक्ष्मी पूजन) दोनों एक ही दिन पड़ रहे हैं (2026 में 8 नवंबर को, 2028 में 17 अक्टूबर को)। ऐसे वर्षों में प्रातःकाल अभ्यंग स्नान कर, संध्या को ही लक्ष्मी पूजन भी कर लिया जाता है। कुछ क्षेत्रों में इसी तिथि को 'काली चौदस' के नाम से भी मनाया जाता है।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) का महत्व
मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर अत्याचारी असुर नरकासुर का वध किया था और उसके बंदीगृह में कैद 16,000 स्त्रियों को मुक्त कराया था। इसी विजय के स्मरण में इस दिन को 'नरक चतुर्दशी' कहा जाता है, और यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर तेल व उबटन से स्नान करने की परंपरा है, जिसे 'अभ्यंग स्नान' कहा जाता है। मान्यता है कि यह स्नान करने से नरक की यातना से मुक्ति मिलती है और पवित्र नदी में स्नान करने के समान पुण्य प्राप्त होता है।
कुछ क्षेत्रों में, विशेषकर महाराष्ट्र और गुजरात के कुछ हिस्सों में, इस तिथि को 'काली चौदस' के नाम से मनाया जाता है, जिसमें मां काली की उपासना कर नकारात्मक शक्तियों से रक्षा की कामना की जाती है। यह दिवाली महापर्व का दूसरा दिन है, जिसे 'छोटी दिवाली' भी कहा जाता है।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) कैसे मनाई जाती है
सूर्योदय से पूर्व उठकर शरीर पर तिल के तेल व उबटन का लेप कर स्नान किया जाता है। इसके पश्चात नए वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है।
घर के मुख्य द्वार व आंगन में चौदह दीपक जलाए जाते हैं, जिन्हें 'चौदस के दीये' कहा जाता है, तथा घर के कोने-कोने में रखकर नकारात्मक शक्तियों को दूर भगाने की मान्यता है।
इस शाम को घरों को दीपों से सजाया जाता है और छोटी दिवाली के रूप में मिठाइयां बांटी जाती हैं, जिससे अगले दिन की मुख्य दिवाली से पूर्व उत्सव का माहौल बन जाता है।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) पूजा विधि
सूर्योदय से पूर्व उठकर तिल के तेल व उबटन का लेप कर स्नान करें। स्नान के पश्चात नए वस्त्र धारण कर भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करें। संध्या समय घर के मुख्य द्वार व आंगन में चौदह दीपक जलाएं।
नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) के बारे में
नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली भी कहा जाता है, दिवाली महापर्व का दूसरा दिन है, जो भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध का स्मरण कराता है। इस पृष्ठ पर इस दिन का महत्व, अभ्यंग स्नान की परंपरा, काली चौदस तथा चौदह दीये जलाने की रस्म की जानकारी दी गई है।
दिवाली के अन्य दिनों, धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज, की जानकारी हेतु उनके अलग पृष्ठ भी देखें। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
नरक चतुर्दशी कब मनाई जाती है?
नरक चतुर्दशी दिवाली से एक दिन पहले, कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है।
अभ्यंग स्नान क्या है?
अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पूर्व तिल के तेल व उबटन से किया जाने वाला स्नान है, जिसे नरक चतुर्दशी की सुबह करने की परंपरा है, और इसे पवित्र नदी स्नान के समान पुण्यदायी माना जाता है।
नरकासुर कौन था?
नरकासुर एक अत्याचारी असुर था जिसने 16,000 स्त्रियों को बंदी बना रखा था। भगवान श्रीकृष्ण ने सत्यभामा के साथ मिलकर उसका वध कर उन्हें मुक्त कराया था।
छोटी दिवाली और काली चौदस में क्या अंतर है?
दोनों एक ही तिथि, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाए जाते हैं। 'छोटी दिवाली' नाम मुख्य दिवाली की तैयारी वाले दिन को दर्शाता है, जबकि 'काली चौदस' कुछ क्षेत्रों में मां काली की उपासना की परंपरा को दर्शाता है।
