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श्री हनुमान आरती

हनुमान आरती, आरती कीजै हनुमान लला की, हनुमान जी की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसके पाठ से भय दूर होता है और बल-साहस की प्राप्ति होती है, यहां पूर्ण पाठ अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री हनुमान आरती
कड़ी१/६

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१ श्लोक · १ स्थायी · ६ कड़ी
पाठ समय४ मिनट
श्लोक

मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्।
वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥

स्थायी

आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की॥

कड़ी

जाके बल से गिरिवर काँपे।
रोग दोष जाके निकट न झाँके॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
संतन के प्रभु सदा सहाई॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए।
लंका जारि सिया सुधि लाये॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई॥

लंका जारि असुर संहारे।
सियाराम जी के काज सँवारे॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे।
लाये संजीवन प्राण उबारे॥

पैठि पताल तोरि जमकारे।
अहिरावण की भुजा उखारे॥
बाईं भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा संतजन तारे॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें॥
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजना माई॥

जो हनुमान जी की आरती गावे।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे॥
लंका विध्वंस किये रघुराई।
तुलसीदास स्वामी कीरति गाई॥

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श्री हनुमान आरती पाठ विधि

मंगलवार अथवा शनिवार को संध्या समय दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद और पाठ के अंत में स्थायी पंक्ति 'आरती कीजै हनुमान लला की' दोहराएं।

पाठ दिवस
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स्तोत्र · ८ मिनट
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श्री हनुमान आरती के बारे में

आरती कीजै हनुमान लला की हनुमान जी की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती है, जिसमें उनके बल, सीता माता की खोज, लंका-दहन, लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी लाने और अहिरावण-वध जैसे प्रसंगों का वर्णन है। आरती एक संस्कृत श्लोक से आरंभ होती है, इसके बाद स्थायी पंक्ति और छह कड़ियां आती हैं, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। अंतिम कड़ी में 'तुलसीदास' नाम आता है, जैसा भक्ति-काव्य में प्रायः होता है, परंतु इससे गोस्वामी तुलसीदास की रचना होने की निश्चित पुष्टि नहीं होती। इसमें हनुमान जी के बल, सीता-खोज, लंका-दहन, संजीवनी-प्रसंग और अहिरावण-वध का वर्णन है। यह आरती हनुमान भक्तों द्वारा नित्य तथा विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को गाई जाती है।

हनुमान आरती के लाभ

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस आरती का नित्य पाठ करने से भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा बल, साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है; विशेष रूप से मंगलवार व शनिवार को इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना

सामान्य प्रश्न

हनुमान आरती की रचना किसने की?

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। अंतिम कड़ी में 'तुलसीदास' नाम आने से इसका श्रेय कभी-कभी गोस्वामी तुलसीदास को भी दिया जाता है, यद्यपि यह निश्चित नहीं है।

आरती की संरचना क्या है?

एक संस्कृत श्लोक, एक स्थायी पंक्ति और छह कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

पाठ का उत्तम दिन और समय क्या है?

मंगलवार अथवा शनिवार को संध्या समय, दीप जलाकर गाना उत्तम माना जाता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

हनुमान आरती के क्या लाभ हैं?

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस आरती का नित्य पाठ करने से भय और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है तथा बल, साहस और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है; विशेष रूप से मंगलवार व शनिवार को इसका पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।

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