मुख्यत्योहारशारदीय नवरात्रि
नौ रात्रि शक्ति पर्व · आश्विन शुक्ल प्रतिपदा (घटस्थापना)

शारदीय नवरात्रि

शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का पर्व है, जो आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक, नौ दिन और रात्रि मनाया जाता है।

शारदीय नवरात्रि
अगली तिथि
११ अक्टूबर २०२६

घटस्थापना का शुभ मुहूर्त प्रतिपदा तिथि और अभिजित मुहूर्त के अनुसार प्रातःकाल ही तय होता है, इसलिए सटीक समय हेतु नज़दीकी पंचांग देखें। इन्हीं नौ दिनों को पूर्वी भारत में दुर्गा पूजा के रूप में, तथा गुजरात में गरबा-डांडिया के साथ विशेष धूमधाम से मनाया जाता है।

शारदीय नवरात्रि का महत्व

शारदीय नवरात्रि आश्विन मास में शरद ऋतु के आरंभ पर मनाई जाती है, इसीलिए इसे 'शारदीय' कहा जाता है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में मां दुर्गा ने महिषासुर नामक असुर का वध कर संसार को उसके अत्याचार से मुक्त कराया था। यह पर्व असत्य पर सत्य और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, तथा वर्ष की चार नवरात्रियों में सबसे अधिक धूमधाम से मनाई जाने वाली नवरात्रि है।

नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री, की क्रमशः पूजा की जाती है। प्रत्येक स्वरूप एक विशेष शक्ति और गुण का प्रतीक है, और भक्त प्रत्येक दिन उसी स्वरूप का ध्यान व पूजन करते हैं।

दुर्गा चालीसा
चालीसा · नवरात्रि में प्रतिदिन पाठ

शारदीय नवरात्रि की समाप्ति पर आने वाला दशहरा, भगवान श्रीराम की रावण पर विजय का भी स्मरण कराता है, इसीलिए इन नौ दिनों में अनेक स्थानों पर रामलीला का मंचन भी होता है। पूर्वी भारत में यही पर्व भव्य पंडालों में दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है, जिसका समापन प्रतिमा विसर्जन से होता है।

नवरात्रि के नौ स्वरूप

मां शैलपुत्री

दिन 1

मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः

भोग: शुद्ध गाय का घी · स्वास्थ्य, स्थिरता व दीर्घायु

मां ब्रह्मचारिणी

दिन 2

मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं ब्रह्मचारिण्यै नमः

भोग: चीनी अथवा मिश्री · तप, त्याग व संयम की शक्ति

मां चंद्रघंटा

दिन 3

मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चन्द्रघण्टायै नमः

भोग: दूध व दूध से बने व्यंजन · साहस, वीरता व भय से मुक्ति

मां कूष्मांडा

दिन 4

मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं देव्यै नमः

भोग: मालपुआ · बुद्धि, निर्णय-क्षमता व आरोग्य

मां स्कंदमाता

दिन 5

मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं स्कन्दमातायै नमः

भोग: केला · ज्ञान, संतान सुख व मोक्ष

मां कात्यायनी

दिन 6

मंत्र: ॐ देवी कात्यायन्यै नमः

भोग: शहद · विवाह में बाधा दूर व आकर्षण

मां कालरात्रि

दिन 7

मंत्र: ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कालरात्र्यै नमः

भोग: गुड़ · भय व नकारात्मक शक्तियों से रक्षा

मां महागौरी

दिन 8

मंत्र: ॐ देवी महागौर्यै नमः

भोग: नारियल · सुख-समृद्धि व मनोकामना पूर्ति

मां सिद्धिदात्री

दिन 9

मंत्र: ॐ देवी सिद्धिदात्र्यै नमः

भोग: तिल · सिद्धियों की प्राप्ति व पूर्ण ज्ञान

शारदीय नवरात्रि कैसे मनाई जाती है

पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है, मिट्टी के पात्र में जौ बोकर, जल से भरे कलश पर आम के पत्ते और नारियल रखकर मां दुर्गा का आवाहन किया जाता है। घर या मंदिर में अखंड ज्योति प्रज्वलित कर नौ दिनों तक जलाए रखी जाती है।

प्रतिदिन मां के संबंधित स्वरूप की पूजा, दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती की जाती है। अनेक भक्त नौ दिनों का उपवास रखते हैं, जबकि कुछ केवल पहले और अंतिम दिन व्रत करते हैं। अष्टमी अथवा नवमी को कन्या पूजन कर छोटी कन्याओं को देवी स्वरूप मानकर भोजन कराया जाता है।

दुर्गा आरती
आरती · संध्या पूजन में गाई जाने वाली आरती

गुजरात में इन रातों में गरबा और डांडिया रास का आयोजन होता है, जबकि पश्चिम बंगाल में भव्य पंडाल सजाकर दुर्गा पूजा मनाई जाती है। उत्तर भारत के कई नगरों में रामलीला का मंचन कर, नौवें या दसवें दिन रावण-दहन के साथ पर्व का समापन होता है।

शारदीय नवरात्रि पूजा विधि

प्रतिपदा तिथि को प्रातःकाल स्नान कर, पूजा स्थान को शुद्ध कर मिट्टी के पात्र में जौ बोएं। कलश में जल भरकर उस पर आम के पत्ते और नारियल रखें तथा मां दुर्गा का आवाहन कर अखंड ज्योति प्रज्वलित करें। प्रतिदिन उस दिन के स्वरूप का ध्यान, दुर्गा सप्तशती अथवा दुर्गा चालीसा का पाठ, और संध्या आरती करें। अष्टमी अथवा नवमी को कन्या पूजन व हवन कर पूजा का समापन करें।

नवरात्रि व्रत कथा पढ़ें
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शारदीय नवरात्रि के बारे में

शारदीय नवरात्रि मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का नौ दिन का पर्व है, जो आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होकर नवमी तिथि तक चलता है। इस पृष्ठ पर नवरात्रि का महत्व, घटस्थापना, नवदुर्गा के नौ स्वरूप, कन्या पूजन तथा क्षेत्रीय परंपराओं जैसे गरबा-डांडिया व दुर्गा पूजा की जानकारी दी गई है, साथ ही घर पर पूजा-विधि भी बताई गई है।

अष्टमी, नवमी और दशहरा जैसे नवरात्रि के प्रमुख दिनों की विस्तृत जानकारी हेतु उनके अलग पृष्ठ भी उपलब्ध हैं। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

शारदीय नवरात्रि कब मनाई जाती है?

शारदीय नवरात्रि प्रत्येक वर्ष आश्विन मास की शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तिथि तक, नौ दिनों के लिए मनाई जाती है, जो सामान्यतः सितंबर-अक्टूबर में आती है।

नवदुर्गा के नौ स्वरूप कौन-कौन से हैं?

नवदुर्गा के नौ स्वरूप हैं, शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री, जिनकी क्रमशः एक-एक दिन पूजा की जाती है।

कन्या पूजन क्या है और कब किया जाता है?

कन्या पूजन में छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनके पैर धोकर, तिलक कर भोजन कराया जाता है। यह सामान्यतः अष्टमी अथवा नवमी तिथि को किया जाता है।

शारदीय और चैत्र नवरात्रि में क्या अंतर है?

चैत्र नवरात्रि वसंत ऋतु में चैत्र मास में मनाई जाती है और राम नवमी पर समाप्त होती है, जबकि शारदीय नवरात्रि शरद ऋतु में आश्विन मास में मनाई जाती है और दशहरे पर समाप्त होती है। दोनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की ही पूजा होती है।

क्या पूरे नौ दिन व्रत रखना आवश्यक है?

नहीं, यह श्रद्धा व सामर्थ्य पर निर्भर करता है। कई भक्त नौ दिनों का उपवास रखते हैं, जबकि कई केवल पहले और अंतिम दिन ही व्रत करते हैं।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवतामां दुर्गा (नवदुर्गा)
तिथिआश्विन शुक्ल प्रतिपदा–नवमी
मुख्य दिनघटस्थापना, अष्टमी, नवमी, दशहरा
शुभ समयघटस्थापना हेतु अभिजित मुहूर्त
व्रत प्रकारनौ दिन का उपवास अथवा प्रथम व अंतिम दिन का व्रत