मुख्यमंदिरअष्टादश महाशक्तिपीठ
देवी के १८ पावन शक्तिपीठ

अष्टादश महाशक्तिपीठ

शक्तिपीठ वे पावन स्थल हैं, जहां मान्यता के अनुसार माता सती के शरीर के अंग गिरे थे। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र में इनमें से अठारह प्रमुख शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है।

अष्टादश महाशक्तिपीठ का महत्व

मान्यता है कि राजा दक्ष ने एक विशाल यज्ञ आयोजित किया, जिसमें उन्होंने अपनी पुत्री सती व उनके पति भगवान शिव को आमंत्रित नहीं किया। बिना बुलाए यज्ञ में पहुंचीं सती को वहां अपने पति का घोर अपमान सहन करना पड़ा, जिसे वे सह न सकीं तथा यज्ञ की अग्नि में स्वयं को भस्म कर लिया। पत्नी की मृत्यु से क्रोधित व शोकाकुल भगवान शिव सती के शरीर को कंधे पर उठाए तांडव करते हुए संपूर्ण सृष्टि में विचरण करने लगे। सृष्टि को विनाश से बचाने हेतु भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को खंड-खंड कर दिया, तथा जहां-जहां ये अंग गिरे, वे स्थान शक्तिपीठ कहलाए।

पुराणों में शक्तिपीठों की संख्या इक्यावन तक बताई गई है, किंतु आदि शंकराचार्य ने अपने अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र में इनमें से अठारह सर्वप्रमुख शक्तिपीठों का विशेष रूप से वर्णन किया है, यही पृष्ठ इन्हीं अठारह महाशक्तिपीठों की सूची प्रस्तुत करता है। ध्यान रहे, इनमें से भ्रमराम्बा देवी शक्तिपीठ (श्रीशैलम) मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के साथ ही एक ही परिसर में स्थित है, तथा कामाख्या देवी शक्तिपीठ (गुवाहाटी) तंत्र साधना के प्रमुख केंद्र के रूप में जानी जाती है, दोनों का अपना विस्तृत पृष्ठ इस साइट पर उपलब्ध है।

अष्टादश महाशक्तिपीठ

शांकरी देवी · त्रिंकोमाली, श्रीलंका

अंग: जांघ

कामाक्षी देवी · कांचीपुरम, तमिलनाडु

अंग: नाभि

श्रृंखला देवी · कोलकाता, पश्चिम बंगाल

अंग: उदर

चामुंडेश्वरी देवी · मैसूरु, कर्नाटक

अंग: केश

जोगुलाम्बा देवी · आलमपुर, तेलंगाना

अंग: ऊपरी दांत

भ्रमराम्बा देवी · श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश

अंग: गर्दन (ग्रीवा)

महालक्ष्मी देवी · कोल्हापुर, महाराष्ट्र

अंग: बायां नेत्र

एकवीरिका (रेणुका) देवी · माहूर, महाराष्ट्र

अंग: पीठ

महाकाली देवी · उज्जैन, मध्य प्रदेश

अंग: कोहनी

पुरुहूतिका देवी · पिठापुरम, आंध्र प्रदेश

अंग: बायां हाथ

गिरिजा (बिरजा) देवी · जाजपुर, ओडिशा

अंग: नाभि

माणिक्याम्बा देवी · द्राक्षारामम, आंध्र प्रदेश

अंग: ऊपरी शरीर

कामाख्या देवी · गुवाहाटी, असम

अंग: योनि

माधवेश्वरी (अलोपी) देवी · प्रयागराज, उत्तर प्रदेश

अंग: अंगुलियां

ज्वालामुखी देवी · कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश

अंग: जिह्वा

सर्वमंगला (मंगला गौरी) देवी · गया, बिहार

अंग: वक्ष

विशालाक्षी देवी · वाराणसी, उत्तर प्रदेश

अंग: कर्णफूल

शारदा (सरस्वती) देवी · शारदा पीठ, कश्मीर (पाक-अधिकृत क्षेत्र), पाकिस्तान

अंग: दायां हाथ

अष्टादश महाशक्तिपीठ दर्शन की जानकारी

यह पृष्ठ केवल संदर्भ सूची के रूप में प्रस्तुत है, चूंकि इनमें से अधिकांश शक्तिपीठों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध न होने के कारण अभी पृथक पृष्ठ नहीं बनाए गए हैं। शारदा देवी शक्तिपीठ वर्तमान में पाकिस्तान के अधिकार क्षेत्र वाले कश्मीर क्षेत्र में स्थित होने के कारण भारतीय श्रद्धालुओं के लिए वर्तमान में सुगमता से सुलभ नहीं है, जबकि शेष सत्रह शक्तिपीठ भारत व श्रीलंका में स्थित हैं तथा तीर्थयात्रा हेतु सुलभ हैं।

अष्टादश महाशक्तिपीठ के बारे में

यह पृष्ठ आदि शंकराचार्य द्वारा वर्णित अष्टादश महाशक्तिपीठों की सूची, उनकी देवी, अंग व स्थान की जानकारी प्रस्तुत करता है। जहां किसी शक्तिपीठ का अपना विस्तृत पृष्ठ उपलब्ध है, वहां उसका लिंक भी दिया गया है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

शक्तिपीठ क्या हैं?

शक्तिपीठ वे पावन स्थल हैं, जहां मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से खंडित माता सती के शरीर के अंग गिरे थे।

शक्तिपीठों की संख्या 18 है या 51?

पुराणों में शक्तिपीठों की संख्या इक्यावन तक बताई गई है, किंतु आदि शंकराचार्य ने अपने अष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र में इनमें से अठारह को सर्वप्रमुख शक्तिपीठों के रूप में विशेष रूप से वर्णित किया है, दोनों सूचियां प्रचलन में हैं, तथा यह पृष्ठ उन अठारह पर केंद्रित है।

क्या किसी शक्तिपीठ का अपना विस्तृत पृष्ठ इस साइट पर उपलब्ध है?

हां, भ्रमराम्बा देवी शक्तिपीठ (श्रीशैलम) मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग के साथ ही एक ही परिसर में स्थित है, तथा कामाख्या देवी शक्तिपीठ (गुवाहाटी) का भी अपना विस्तृत पृष्ठ उपलब्ध है।

शारदा देवी शक्तिपीठ कहां स्थित है?

यह वर्तमान में पाकिस्तान के अधिकार क्षेत्र वाले कश्मीर क्षेत्र में स्थित है, जिस कारण यह भारतीय श्रद्धालुओं के लिए वर्तमान में सुगमता से सुलभ नहीं है।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवीआदि शक्ति (विभिन्न रूपों में)
कुल संख्या१८
प्रथम उल्लेखअष्टादश शक्तिपीठ स्तोत्र (आदि शंकराचार्य)
स्थितिभारत, श्रीलंका व पाकिस्तान में फैले