मल्लिकार्जुन मंदिर, श्रीशैलम
मल्लिकार्जुन मंदिर आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में कृष्णा नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है तथा भ्रमराम्बा शक्तिपीठ के रूप में भी पूजा जाता है।

मल्लिकार्जुन मंदिर, श्रीशैलम का महत्व
मान्यता है कि भगवान शिव व माता पार्वती के पुत्रों, गणेश व कार्तिकेय, में सर्वप्रथम विश्व-भ्रमण पूर्ण करने की होड़ लगी। गणेश ने अपने माता-पिता की परिक्रमा कर उन्हें ही समस्त सृष्टि मानते हुए विजय प्राप्त की, जिससे रुष्ट होकर कार्तिकेय कैलाश छोड़कर श्रीशैलम के क्रौंच पर्वत पर आ बसे। पुत्र को मनाने हेतु शिव व पार्वती स्वयं यहां मल्लिकार्जुन (शिव) व भ्रमराम्बा (पार्वती) के रूप में प्रकट हुए।
श्रीशैलम की एक विशेष पहचान यह भी है कि यहां भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग रूप (मल्लिकार्जुन) तथा माता भ्रमराम्बा के शक्तिपीठ रूप, दोनों एक ही परिसर में स्थित हैं, शाक्त परंपरा के अनुसार यहां माता सती की ग्रीवा (गर्दन) गिरी थी। भ्रमराम्बा देवी को भ्रमरी (भंवरों की देवी) के रूप में भी पूजा जाता है, जिन्होंने असुर अरुणासुर का वध किया था।
मल्लिकार्जुन मंदिर, श्रीशैलम दर्शन की जानकारी
मंदिर घने नल्लमला वन क्षेत्र में कृष्णा नदी के तट पर स्थित है, तथा हैदराबाद से सड़क मार्ग द्वारा सुगमता से पहुंचा जा सकता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां एक विशाल मेला (जात्रा) आयोजित होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।
मंदिर परिसर में सामान्य दर्शन के साथ स्पर्श दर्शनम्, अतिशीघ्र दर्शनम् व शीघ्र दर्शनम् जैसे शुल्क-आधारित विकल्प भी उपलब्ध हैं, जिनकी बुकिंग आधिकारिक वेबसाइट पर पहले से की जा सकती है। मंदिर के निकट श्रीशैलम बांध व नल्लमला वन्यजीव अभयारण्य भी दर्शनीय हैं।
मल्लिकार्जुन मंदिर, श्रीशैलम कैसे पहुंचें
मल्लिकार्जुन मंदिर, श्रीशैलम के बारे में
मल्लिकार्जुन मंदिर भगवान शिव व माता भ्रमराम्बा को समर्पित एक पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों तथा शक्तिपीठों, दोनों परंपराओं में विशेष स्थान रखता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, कार्तिकेय व गणेश से जुड़ी कथा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
मल्लिकार्जुन मंदिर कहां स्थित है?
यह आंध्र प्रदेश के श्रीशैलम में, कृष्णा नदी के तट पर, नल्लमला वन क्षेत्र में स्थित है।
मल्लिकार्जुन मंदिर ज्योतिर्लिंग व शक्तिपीठ दोनों कैसे माना जाता है?
यहां भगवान शिव मल्लिकार्जुन (ज्योतिर्लिंग) के रूप में तथा माता पार्वती भ्रमराम्बा (शक्तिपीठ) के रूप में एक ही परिसर में पूजी जाती हैं, शाक्त परंपरा के अनुसार यहां माता सती की ग्रीवा गिरी थी।
कार्तिकेय श्रीशैलम क्यों आए थे?
गणेश व कार्तिकेय के मध्य विश्व-भ्रमण की होड़ में गणेश के विजयी होने पर रुष्ट होकर कार्तिकेय कैलाश छोड़कर श्रीशैलम के क्रौंच पर्वत पर आ बसे थे।
श्रीशैलम में महाशिवरात्रि का क्या महत्व है?
महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रीशैलम में एक विशाल मेला (जात्रा) आयोजित होता है, जिसमें लाखों श्रद्धालु सम्मिलित होते हैं।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से मार्च सर्वोत्तम रहता है, जब आंध्र प्रदेश की भीषण गर्मी से राहत मिलती है। महाशिवरात्रि के समय यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जब अत्यधिक भीड़ रहती है।