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श्री गणेश आरती

गणेश आरती, जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा, भगवान गणेश की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसके पाठ से विघ्न दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है, यहां पूर्ण पाठ अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री गणेश आरती
कड़ी१/५

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१ स्थायी · ५ कड़ी
पाठ समय३ मिनट
स्थायी

जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा॥

कड़ी

एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥

पान चढ़े फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

'सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।

दीनन की लाज रखो, शंभु सुतवारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥

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श्री गणेश आरती पाठ विधि

बुधवार अथवा संकष्टी चतुर्थी को संध्या समय दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद और पाठ के अंत में स्थायी पंक्ति 'जय गणेश जय गणेश' दोहराएं।

पाठ दिवस
बुधवार एवं संकष्टी चतुर्थी
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हनुमान आरती
आरती · ४ मिनट
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श्री गणेश आरती के बारे में

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा भगवान गणेश की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती है, जिसमें उनके स्वरूप, एक दंत, चार भुजा, सिंदूर तिलक और मूषक की सवारी, तथा उनकी पूजा-सामग्री और उनकी कृपा से मिलने वाले वरदानों का वर्णन है। रचना एक स्थायी पंक्ति से आरंभ होकर पांच कड़ियों में आगे बढ़ती है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। कुछ प्रतियों में एक कड़ी में 'सूर' नाम आता है, जैसा भक्ति-काव्य में प्रायः होता है, परंतु इससे किसी विशेष कवि की रचना होने की निश्चित पुष्टि नहीं होती। इसमें भगवान गणेश के स्वरूप, उनकी पूजा-सामग्री और उनकी कृपा से मिलने वाले वरदानों का वर्णन है। यह आरती गणेश भक्तों द्वारा नित्य तथा विशेष रूप से बुधवार और संकष्टी चतुर्थी को गाई जाती है।

गणेश आरती के लाभ

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस आरती का नित्य पाठ करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है; बुधवार व संकष्टी चतुर्थी को इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना

सामान्य प्रश्न

गणेश आरती की रचना किसने की?

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है।

आरती की संरचना क्या है?

एक स्थायी पंक्ति और पांच कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

पाठ का उत्तम दिन और समय क्या है?

बुधवार अथवा संकष्टी चतुर्थी को संध्या समय, दीप जलाकर गाना उत्तम माना जाता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

गणेश आरती के क्या लाभ हैं?

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस आरती का नित्य पाठ करने से जीवन के सभी विघ्न दूर होते हैं तथा सुख, समृद्धि और सफलता की प्राप्ति होती है; बुधवार व संकष्टी चतुर्थी को इसका पाठ विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

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