चार धाम का महत्व
8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने भारत के चार कोनों में स्थित चार पावन तीर्थों, उत्तर में बद्रीनाथ, दक्षिण में रामेश्वरम, पूर्व में पुरी तथा पश्चिम में द्वारका, को 'चार धाम' के रूप में स्थापित किया, ताकि संपूर्ण देश एक ही आध्यात्मिक परंपरा के सूत्र में बंध सके। प्रत्येक धाम की अपनी अलग परंपरा, देवता व स्थापत्य शैली है, फिर भी सभी एक समान उद्देश्य, मोक्ष प्राप्ति, से जुड़े हैं।
इस अखिल भारतीय चार धाम को उत्तराखंड की क्षेत्रीय 'छोटा चार धाम' यात्रा (यमुनोत्री-गंगोत्री-केदारनाथ-बद्रीनाथ) से भ्रमित नहीं करना चाहिए, दोनों भिन्न परंपराएं हैं, यद्यपि बद्रीनाथ दोनों सूचियों में सम्मिलित है। रामेश्वरम मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में भी गिना जाता है, अतः यह मंदिर दोनों सूचियों का हिस्सा है।
चार धाम
भगवान विष्णु का धाम; उत्तर दिशा का प्रतिनिधित्व करता है, हिमालय में स्थित, छोटा चार धाम का भी हिस्सा।
भगवान शिव का धाम; दक्षिण दिशा का प्रतिनिधित्व करता है, बारह ज्योतिर्लिंगों में भी गिना जाता है।
भगवान जगन्नाथ (कृष्ण) का धाम; पूर्व दिशा का प्रतिनिधित्व करता है, विश्व-प्रसिद्ध रथ यात्रा के लिए जाना जाता है।
भगवान कृष्ण का धाम; पश्चिम दिशा का प्रतिनिधित्व करता है, समुद्र में समाई द्वारका नगरी की कथा से जुड़ा।
चार धाम दर्शन की जानकारी
चार धाम भारत के चार दूरस्थ कोनों में फैले हैं, बद्रीनाथ हिमालय में, रामेश्वरम एक दक्षिणी द्वीप पर, पुरी पूर्वी तट पर, तथा द्वारका पश्चिमी तट पर, जिस कारण चारों को एक ही यात्रा में पूर्ण करना बहुसंख्यक श्रद्धालुओं के लिए वर्षों की योजना का विषय होता है। बद्रीनाथ को छोड़कर शेष तीन धाम वर्षभर सुलभ रहते हैं, तथा बद्रीनाथ शीतकाल में हिमपात के कारण बंद रहता है।
चार धाम के बारे में
यह पृष्ठ आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखिल भारतीय चार धाम की सूची, उनके स्थान तथा प्रत्येक की विशिष्टता की जानकारी प्रस्तुत करता है, तथा जहां किसी धाम का अपना विस्तृत पृष्ठ उपलब्ध है, वहां उसका लिंक भी दिया गया है।
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सामान्य प्रश्न
चार धाम कौन-कौन से हैं?
बद्रीनाथ (उत्तर), रामेश्वरम (दक्षिण), पुरी (पूर्व) तथा द्वारका (पश्चिम), ये चार तीर्थ स्थल चार धाम कहलाते हैं।
चार धाम की स्थापना किसने की थी?
8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने संपूर्ण भारत को आध्यात्मिक रूप से एकीकृत करने हेतु चार धाम की स्थापना की थी।
चार धाम व छोटा चार धाम में क्या अंतर है?
अखिल भारतीय चार धाम (बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी, रामेश्वरम) आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित एक प्राचीन अखिल भारतीय परंपरा है, जबकि छोटा चार धाम (यमुनोत्री-गंगोत्री-केदारनाथ-बद्रीनाथ) उत्तराखंड की एक क्षेत्रीय यात्रा-परंपरा है, बद्रीनाथ दोनों सूचियों में सम्मिलित है।
क्या रामेश्वरम किसी अन्य पावन सूची में भी शामिल है?
हां, रामेश्वरम मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में भी गिना जाता है, अतः यह चार धाम व ज्योतिर्लिंग, दोनों सूचियों का हिस्सा है।