
द्वारकाधीश मंदिर का महत्व
मान्यता है कि द्वारकाधीश मंदिर का मूल निर्माण भगवान कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने उस भूमि पर करवाया था, जिसे स्वयं कृष्ण ने समुद्र से पुनः प्राप्त किया था। वर्तमान संरचना 16वीं शताब्दी की चालुक्य स्थापत्य शैली की है, जिसमें अनेक बार विध्वंस व पुनर्निर्माण हुआ है।
मान्यता है कि भगवान कृष्ण के धरा-त्याग के पश्चात द्वारका नगरी समुद्र में समा गई थी, तटीय क्षेत्र में हुए पुरातात्विक शोध इस कथा से जुड़े प्राचीन जलमग्न अवशेषों की ओर संकेत करते हैं। द्वारका इक्यावन शक्तिपीठों में भी नहीं, बल्कि सप्त मोक्षपुरियों में से एक मानी जाती है, जो मोक्षदायिनी सात नगरियों की सूची है।
द्वारकाधीश मंदिर दर्शन की जानकारी
द्वारकाधीश मंदिर, जिसे जगत मंदिर भी कहा जाता है, द्वारका शहर के भीतर ही स्थित है, अतः यहां तक पहुंचना अन्य चार धामों की तुलना में अधिक सुगम है, न कोई ट्रेकिंग, न ही ऊंचाई से जुड़ी कोई चुनौती। मंदिर की दीवारों पर पौराणिक आकृतियों की सूक्ष्म नक्काशी की गई है, तथा इसका शिखर लगभग 78 मीटर ऊंचा है।
मंदिर वर्षभर खुला रहता है, तथा तटीय गुजरात की जलवायु के कारण अक्टूबर से मार्च के मध्य यात्रा करना सर्वाधिक उपयुक्त रहता है। श्रद्धालु प्रायः निकट स्थित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग व बेट द्वारका के दर्शन भी साथ में करते हैं।
द्वारकाधीश मंदिर कैसे पहुंचें
द्वारकाधीश मंदिर के बारे में
द्वारकाधीश मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित एक पावन धाम है, जो अखिल भारतीय चार धाम में से एक है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, द्वारका नगरी से जुड़ी कथा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
द्वारकाधीश मंदिर कहां स्थित है?
यह गुजरात के द्वारका शहर में, अरब सागर के तट पर, गोमती नदी के किनारे स्थित है।
द्वारकाधीश मंदिर का निर्माण किसने करवाया था?
मान्यता है कि मूल मंदिर का निर्माण भगवान कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने करवाया था, जबकि वर्तमान संरचना 16वीं शताब्दी की है।
द्वारका नगरी के समुद्र में समाने की कथा क्या है?
मान्यता है कि भगवान कृष्ण के धरा-त्याग के पश्चात द्वारका नगरी समुद्र में समा गई थी। तटीय क्षेत्र में हुए पुरातात्विक शोध इस कथा से जुड़े जलमग्न अवशेषों की ओर संकेत करते हैं।
द्वारका पहुंचने के लिए क्या ट्रेकिंग आवश्यक है?
नहीं, द्वारकाधीश मंदिर द्वारका शहर के भीतर ही स्थित है, तथा वर्षभर सड़क व रेल मार्ग से सुगमता से पहुंचा जा सकता है।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से मार्च सर्वोत्तम रहता है, जब तटीय गुजरात की गर्मी व मानसून की उमस दोनों से राहत मिलती है।