होली सदैव होलिका दहन के अगले दिन मनाई जाती है। ब्रज क्षेत्र (मथुरा, वृंदावन, बरसाना, नंदगांव) में होली का उत्सव मुख्य दिन से कई दिन पहले ही आरंभ हो जाता है, जिसमें बरसाने की प्रसिद्ध लठमार होली भी शामिल है।
होली (रंगवाली होली) का महत्व
होली, होलिका दहन की अगली सुबह मनाई जाती है, और बुराई पर अच्छाई की उसी विजय के उत्सव को रंगों के साथ आगे बढ़ाती है। यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन तथा नई फसल के पकने का भी प्रतीक है।
एक प्रचलित कथा के अनुसार, बाल कृष्ण अपने सांवले रंग को लेकर चिंतित रहते थे और मां यशोदा से गोरी राधा के समक्ष अपनी तुलना करते थे। मां यशोदा ने हंसकर सुझाव दिया कि वे राधा के मुख पर जो रंग चाहें, लगा दें। इसी प्रसंग से राधा-कृष्ण संग रंग खेलने की परंपरा आरंभ हुई मानी जाती है, जो ब्रज क्षेत्र में आज भी सबसे भव्य रूप से मनाई जाती है।
मथुरा, वृंदावन, बरसाना और नंदगांव में होली कई दिन पूर्व से आरंभ हो जाती है, जिसमें बरसाने की 'लठमार होली' सबसे प्रसिद्ध है, जिसमें स्त्रियां पुरुषों को प्रेमपूर्वक लाठियों से खेलते हुए खदेड़ती हैं, जो राधा-कृष्ण की प्रेम-लीलाओं का स्मरण कराती है।
होली (रंगवाली होली) कैसे मनाई जाती है
प्रातःकाल परिवार व मित्र सूखे व गीले रंगों, गुलाल तथा पिचकारी से होली खेलते हैं। बच्चे व युवा गुब्बारों में पानी भरकर एक-दूसरे पर फेंकते हैं, तथा ढोल की थाप पर नाचते-गाते हैं।
इस दिन गुझिया, ठंडाई तथा कुछ क्षेत्रों में भांग जैसे विशेष व्यंजन बनाए व साझा किए जाते हैं। रंग खेलने से पहले परंपरागत रूप से बड़ों को रंग-तिलक लगाकर आशीर्वाद लिया जाता है।
दोपहर पश्चात लोग स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं तथा एक-दूसरे के घर जाकर मिठाइयां बांटते हैं, जिसे 'होली मिलन' कहा जाता है, इस अवसर पर पुरानी शिकायतें भुलाकर संबंध प्रगाढ़ किए जाते हैं।
होली (रंगवाली होली) पूजा विधि
प्रातःकाल बड़ों को रंग-तिलक लगाकर आशीर्वाद लें। तत्पश्चात परिवार व मित्रों के साथ गुलाल व रंगों से होली खेलें। दोपहर पश्चात स्नान कर नए वस्त्र धारण करें, तथा पड़ोसियों व स्वजनों के घर जाकर मिठाइयां बांटें।
होली (रंगवाली होली) के बारे में
होली भारत का सबसे रंगारंग त्योहार है, जो फाल्गुन शुक्ल प्रतिपदा को होलिका दहन के अगले दिन मनाया जाता है। इस पृष्ठ पर होली का महत्व, राधा-कृष्ण की कथा, ब्रज की लठमार होली परंपरा, तथा होली मिलन की रस्म की जानकारी दी गई है।
इससे एक रात्रि पूर्व मनाए जाने वाले होलिका दहन की जानकारी हेतु उसका अलग पृष्ठ भी देखें। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
होली कब मनाई जाती है?
होली फाल्गुन मास की शुक्ल प्रतिपदा तिथि को, होलिका दहन के अगले दिन मनाई जाती है, जो सामान्यतः मार्च में आती है।
होली और धुलंडी में क्या अंतर है?
'धुलंडी' रंग खेलने वाले मुख्य दिन का पारंपरिक नाम है, जिसे आमतौर पर 'होली' कहा जाता है। कुछ क्षेत्रों में 'होली' शब्द होलिका दहन की रात्रि के लिए भी प्रयोग होता है, इसलिए स्थान अनुसार यह भिन्न हो सकता है।
लठमार होली क्या है?
लठमार होली बरसाना व नंदगांव में मनाई जाने वाली अनोखी परंपरा है, जिसमें स्त्रियां प्रेमपूर्वक पुरुषों को लाठियों से खेलते हुए खदेड़ती हैं, जो राधा-कृष्ण की प्रेम-लीलाओं का स्मरण कराती है।
होली क्यों मनाई जाती है?
होली होलिका दहन में बुराई के अंत के उत्सव को आगे बढ़ाती है, वसंत ऋतु व नई फसल के आगमन का प्रतीक है, तथा राधा-कृष्ण के संग रंग खेलने की परंपरा का स्मरण कराती है।
