मुख्यआरतीश्री कृष्ण आरती

श्री कृष्ण आरती

कृष्ण आरती, आरती कुंजबिहारी की, भगवान श्रीकृष्ण की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसका पूर्ण पाठ यहां अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री कृष्ण आरती
कड़ी/

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१ स्थायी · ४ कड़ी
पाठ समय४ मिनट
स्थायी

आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

कड़ी

गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुण्डल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली, लतन में ठाढ़े बनमाली,
भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक, चंद्र सी झलक, ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसै, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग, ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, कलुष कलि हारिणि श्रीगंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी सिव सीस, जटा के बीच, हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद, कटत भव फंद,
टेर सुन दीन भिखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की॥

इसी देवता की चालीसा
श्री कृष्ण चालीसा
चालीसा पढ़ें
इसी देवता की कथा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा
कथा पढ़ें
इसी देवता का प्रसंग
इंद्र-इंद्राणी व द्रौपदी-कृष्ण रक्षासूत्र प्रसंग
प्रसंग पढ़ें
काउंटर

व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।

लक्ष्य चुनें
/ ११

श्री कृष्ण आरती पाठ विधि

प्रतिदिन संध्या समय अथवा जन्माष्टमी को दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद और पाठ के अंत में स्थायी पंक्ति 'आरती कुंजबिहारी की' दोहराएं।

पाठ दिवस
जन्माष्टमी एवं प्रतिदिन संध्या समय
आगे पढ़ें · Next
श्री कृष्ण चालीसा
स्तोत्र · ८ मिनट
पाठ खोलें →

श्री कृष्ण आरती के बारे में

आरती कुंजबिहारी की भगवान श्रीकृष्ण की स्तुति में ब्रजभाषा में रचित सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसमें उनके शृंगार, मुरली-वादन, गोपियों संग रास-लीला और गंगा-उत्पत्ति के प्रसंग का काव्यात्मक वर्णन है। आरती एक स्थायी पंक्ति और चार कड़ियों में रचित है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। यह ब्रजभाषा में रचित है और वृंदावन के कुंज बिहारी मंदिर में नित्य गाई जाती है। इसमें श्रीकृष्ण के शृंगार, मुरली-वादन, गोपियों संग रास और गंगा-उत्पत्ति के प्रसंग का काव्यात्मक वर्णन है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना · ब्रजभाषा

सामान्य प्रश्न

आरती कुंजबिहारी की रचना किसने की?

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। यह ब्रजभाषा में रचित है।

आरती की संरचना क्या है?

एक स्थायी पंक्ति और चार कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

कृष्ण आरती पाठ का उत्तम समय क्या है?

प्रतिदिन संध्या समय, विशेष रूप से जन्माष्टमी को, दीप जलाकर गाना उत्तम माना जाता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

संबंधित खोज