रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम
रामनाथस्वामी मंदिर तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर स्थित भगवान शिव का पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों तथा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखिल भारतीय चार धाम, दोनों में गिना जाता है।

रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम का महत्व
मान्यता है कि लंका पर विजय प्राप्त करने से पूर्व भगवान राम ने ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति हेतु यहां भगवान शिव की पूजा की थी। यही एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जहां विष्णु के अवतार भगवान राम ने स्वयं शिवजी की आराधना की, जिस कारण यह शैव व वैष्णव, दोनों संप्रदायों के लिए समान रूप से पावन माना जाता है।
मंदिर अपने विश्व-प्रसिद्ध गलियारे के लिए भी जाना जाता है, जिसमें लगभग 4,000 नक्काशीदार स्तंभ लगभग 1,200 मीटर की लंबाई में फैले हैं, जो इसे विश्व का सबसे लंबा मंदिर गलियारा बनाता है। समुद्र में स्थित रामसेतु (एडम्स ब्रिज) की शृंखला परंपरागत रूप से उसी सेतु से जोड़ी जाती है, जिसे भगवान राम व उनकी वानर सेना ने लंका जाने हेतु बनाया था।
रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम दर्शन की जानकारी
रामेश्वरम मंदिर पंबन सेतु से जुड़े द्वीप-नगर के भीतर ही स्थित है, अतः यहां तक पहुंचना अन्य द्वीपीय अथवा दुर्गम तीर्थों की तुलना में सुगम है। दर्शन से पूर्व श्रद्धालु परंपरागत रूप से मंदिर परिसर के भीतर व बाहर स्थित 22 पावन कुंडों (तीर्थों) में स्नान करते हैं।
मंदिर के निकट धनुषकोडी नामक एक परित्यक्त तटीय क्षेत्र भी है, जहां से रामसेतु शृंखला समुद्र में आरंभ होती मानी जाती है। तटीय जलवायु के कारण अक्टूबर से अप्रैल के मध्य यात्रा करना सर्वाधिक उपयुक्त रहता है।
रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम कैसे पहुंचें
रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम के बारे में
रामनाथस्वामी मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों तथा अखिल भारतीय चार धाम, दोनों सूचियों में गिना जाता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, भगवान राम से जुड़ी कथा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
रामेश्वरम मंदिर कहां स्थित है?
यह तमिलनाडु के रामेश्वरम द्वीप पर, पंबन सेतु द्वारा मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ स्थित है।
रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग व चार धाम दोनों में कैसे गिना जाता है?
यह वही मंदिर है जो बारह ज्योतिर्लिंगों की सूची में रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग के नाम से तथा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित अखिल भारतीय चार धाम की सूची में भी सम्मिलित है, दोनों सूचियां एक ही मंदिर का उल्लेख करती हैं।
रामेश्वरम मंदिर के गलियारे की क्या विशेषता है?
इसमें लगभग 4,000 नक्काशीदार स्तंभ लगभग 1,200 मीटर की लंबाई में फैले हैं, जो इसे विश्व का सबसे लंबा मंदिर गलियारा बनाता है।
दर्शन से पूर्व किस परंपरा का पालन किया जाता है?
श्रद्धालु परंपरागत रूप से मंदिर परिसर के भीतर व बाहर स्थित 22 पावन कुंडों (तीर्थों) में स्नान करते हैं।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से अप्रैल सर्वोत्तम रहता है, जब तटीय तमिलनाडु की भीषण गर्मी से राहत मिलती है।