
कामाख्या मंदिर का महत्व
पौराणिक मान्यता के अनुसार, माता सती के यज्ञ-अग्नि में भस्म होने के पश्चात भगवान शिव उनके शरीर को कंधे पर उठाए तांडव करते हुए विचरण करने लगे, तथा भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से सती का शरीर खंड-खंड होकर विभिन्न स्थानों पर गिरा। मान्यता है कि यहां नीलाचल पर्वत पर माता की योनि गिरी थी, जिस कारण यह स्थान अष्टादश महाशक्तिपीठों में सर्वाधिक पावन व शक्तिशाली मानी जाने वाली पीठों में से एक है।
कामाख्या मंदिर की एक अनूठी विशेषता यह है कि यहां देवी की कोई मूर्ति प्रतिष्ठित नहीं है, गर्भगृह में एक प्राकृतिक शिला-विदर (चट्टान में दरार) को देवी के रूप में पूजा जाता है, जिसे एक भूमिगत जलस्रोत निरंतर आर्द्र रखता है। यह मंदिर तंत्र साधना (कुलाचार तंत्र मार्ग) का प्रमुख केंद्र भी माना जाता है, तथा वर्षभर देश-विदेश से साधु व तांत्रिक यहां आते हैं।
कामाख्या मंदिर दर्शन की जानकारी
मंदिर का प्रमुख उत्सव अंबुबाची मेला है, जो प्रतिवर्ष जून माह में आयोजित होता है तथा देवी के रजस्वला (ऋतुस्राव) काल का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान गर्भगृह लगभग तीन दिनों तक बंद रहता है, तथा चौथे दिन विशाल मेले के साथ पुनः खोला जाता है, जिसमें देश भर से लाखों श्रद्धालु व साधु सम्मिलित होते हैं।
मंदिर वर्तमान स्वरूप में 16वीं शताब्दी में कूच बिहार के राजा नरनारायण द्वारा पुनर्निर्मित है, चूंकि मूल मंदिर को इससे पूर्व ध्वस्त कर दिया गया था। नीलाचल पर्वत से गुवाहाटी शहर व ब्रह्मपुत्र नदी का विहंगम दृश्य भी दर्शनीय है।
कामाख्या मंदिर कैसे पहुंचें
कामाख्या मंदिर के बारे में
कामाख्या मंदिर माता आदि शक्ति को समर्पित एक पावन धाम है, जो अष्टादश महाशक्तिपीठों में से एक तथा तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, माता सती से जुड़ी कथा, अंबुबाची मेला, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
कामाख्या मंदिर कहां स्थित है?
यह असम के गुवाहाटी में, नीलाचल पर्वत पर स्थित है।
कामाख्या मंदिर में देवी की मूर्ति क्यों नहीं है?
मान्यता है कि यहां माता सती की योनि गिरी थी, अतः गर्भगृह में एक प्राकृतिक शिला-विदर को ही देवी के रूप में पूजा जाता है, जिसे भूमिगत जलस्रोत निरंतर आर्द्र रखता है।
अंबुबाची मेला क्या है?
यह प्रतिवर्ष जून माह में आयोजित होने वाला उत्सव है, जो देवी के रजस्वला काल का प्रतीक माना जाता है। इस दौरान गर्भगृह लगभग तीन दिनों तक बंद रहता है तथा चौथे दिन विशाल मेले के साथ पुनः खुलता है।
क्या कामाख्या तंत्र साधना से जुड़ा है?
हां, यह मंदिर कुलाचार तंत्र मार्ग का प्रमुख केंद्र माना जाता है, तथा वर्षभर देश-विदेश से साधु व तांत्रिक यहां आते हैं।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से मार्च सर्वोत्तम रहता है, जब उत्तर-पूर्व भारत की उमस भरी गर्मी से राहत मिलती है। जून माह में आयोजित अंबुबाची मेले के दौरान तीन दिनों तक गर्भगृह बंद रहता है, अतः सामान्य दर्शन चाहने वालों को इस अवधि से बचना उचित रहता है।