2026 में नवमी तिथि 19 अक्टूबर प्रातः 10:51 से 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 तक है। उत्तर भारत में महा नवमी 19 अक्टूबर को अष्टमी के साथ ही है, इसलिए नवमी का हवन और कन्या पूजन उस दिन 10:51 के बाद करें। बंगाल में महानवमी 20 अक्टूबर को है। नवरात्रि का पारण 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 के बाद (नई दिल्ली)।
महा नवमी का महत्व
महा नवमी शारदीय नवरात्रि का नौवां और अंतिम दिन है, जिस पर मां दुर्गा के नौवें और अंतिम स्वरूप सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियां प्रदान करती हैं, और इनकी कृपा से ही भगवान शिव का आधा शरीर देवी का बना, जिन्हें अर्धनारीश्वर कहा जाता है।
इसी दिन नौ दिनों तक चली दुर्गा पूजा के हवन का पूर्णाहुति संस्कार संपन्न होता है, जिसमें नवरात्रि भर की गई पूजा का समापन आहुति के साथ किया जाता है। जिन भक्तों ने अष्टमी को कन्या पूजन नहीं किया होता, वे इस दिन कन्या पूजन संपन्न करते हैं।
दक्षिण भारत में महा नवमी को 'आयुध पूजा' के रूप में मनाया जाता है, जिसमें अपने औजारों, वाहनों, पुस्तकों और उपकरणों की पूजा की जाती है, यह मानते हुए कि प्रत्येक साधन में देवी शक्ति का वास है। अगले दिन दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के साथ नवरात्रि पर्व का समापन करता है।
सिद्धिदात्री कमल पर विराजती हैं, सिंह उनका वाहन है, और उनकी चार भुजाओं में गदा, चक्र, शंख और कमल हैं। मार्कण्डेय पुराण में आठ सिद्धियां बताई गई हैं: अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व, और मान्यता है कि मां सिद्धिदात्री ये सभी प्रदान करती हैं। उन्हें तिल का भोग लगाया जाता है।
महा नवमी कैसे मनाई जाती है
प्रातःकाल स्नान कर मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है तथा हवन कुंड में नौ दिनों की पूजा की पूर्णाहुति दी जाती है। हवन में नवग्रह समिधा, गुड़, तिल तथा घी की आहुतियां दी जाती हैं।
जिन घरों में अष्टमी की बजाय नवमी को कन्या पूजन होता है, वहां नौ कन्याओं व एक बालक को भोजन कराकर, वस्त्र व दक्षिणा भेंट कर विधिपूर्वक व्रत का पारण किया जाता है।
दक्षिण भारत में आयुध पूजा के अंतर्गत घर व कार्यस्थल के औज़ारों, वाहनों और मशीनों को स्वच्छ कर फूल-हल्दी से सजाया जाता है और उनकी पूजा की जाती है। बंगाल में महानवमी पर नवमी होम होता है, और संध्या को पंडालों में धुनुची नाच के साथ आरती होती है, क्योंकि अगले दिन देवी की विदाई है।
महा नवमी पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर मां सिद्धिदात्री की पूजा करें। हवन कुंड में नवग्रह समिधा, गुड़, तिल व घी की आहुति देकर पूर्णाहुति संपन्न करें। तत्पश्चात नौ कन्याओं व एक बालक का पूजन कर उन्हें भोजन व दक्षिणा भेंट करें, और अपनी परंपरा अनुसार उसी के बाद, या दशमी लगने पर, व्रत का पारण करें। इच्छानुसार अपने औज़ारों व वाहनों की आयुध पूजा भी करें।
महा नवमी के बारे में
महा नवमी शारदीय नवरात्रि का समापन दिवस है, जिस पर मां सिद्धिदात्री की पूजा, हवन-पूर्णाहुति, कन्या पूजन तथा दक्षिण भारत की आयुध पूजा की जाती है। इस पृष्ठ पर नवमी का महत्व, हवन विधि, कन्या पूजन तथा आयुध पूजा की परंपरा की जानकारी दी गई है।
अगले दिन मनाए जाने वाले दशहरे तथा नवरात्रि के अन्य दिनों की जानकारी हेतु उनके अलग पृष्ठ भी देखें।
सामान्य प्रश्न
महा नवमी कब मनाई जाती है?
महा नवमी शारदीय नवरात्रि के नौवें दिन, आश्विन मास की शुक्ल नवमी तिथि को मनाई जाती है।
आयुध पूजा क्या है?
आयुध पूजा दक्षिण भारत में महा नवमी को मनाई जाने वाली परंपरा है, जिसमें अपने औज़ारों, वाहनों और उपकरणों की पूजा कर उनमें देवी शक्ति का आवाहन किया जाता है।
पूर्णाहुति क्या है?
पूर्णाहुति नवरात्रि भर चले हवन की अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण आहुति है, जो महा नवमी को दी जाती है और पूजा के समापन का प्रतीक है।
कन्या पूजन अष्टमी को करें या नवमी को?
यह पारिवारिक परंपरा और क्षेत्रीय रिवाज़ पर निर्भर करता है, कुछ लोग अष्टमी को, कुछ नवमी को कन्या पूजन करते हैं, और दोनों ही मान्य हैं।
महा नवमी 2026 कब है?
उत्तर भारत में महा नवमी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को है, उसी दिन जिस दिन अष्टमी है, क्योंकि नवमी तिथि प्रातः 10:51 पर लग जाती है। बंगाल में महानवमी मंगलवार, 20 अक्टूबर को है।
नवरात्रि का व्रत कब खोलें?
निर्णय सिंधु के अनुसार नवरात्रि का पारण नवमी तिथि समाप्त होकर दशमी लगने पर किया जाता है, जो 2026 में 20 अक्टूबर को दोपहर 12:50 के बाद है। उत्तर भारत के अनेक परिवार अष्टमी या नवमी के कन्या पूजन के बाद ही व्रत खोल लेते हैं।
