मुख्यआरतीश्री अम्बे आरती

श्री अम्बे आरती

अम्बे आरती, अम्बे तू है जगदम्बे काली, माँ दुर्गा की सबसे लोकप्रिय आरतियों में से एक है, जिसका पूर्ण पाठ यहां अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री अम्बे आरती
कड़ी/

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१ स्थायी · ४ कड़ी
पाठ समय४ मिनट
स्थायी

अम्बे तू है जगदम्बे काली,
जय दुर्गे खप्पर वाली,
तेरे ही गुण गावें भारती,
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती॥

कड़ी

तेरे भक्त जनो पर माता, भीर पड़ी है भारी।
दानव दल पर टूट पड़ो माँ, करके सिंह सवारी॥
सौ-सौ सिंहों से बलशाली, है अष्ट भुजाओं वाली,
दुष्टों को तू ही ललकारती।

माँ-बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता।
पूत-कपूत सुने है पर ना, माता सुनी कुमाता॥
सब पे करूणा दर्शाने वाली, अमृत बरसाने वाली,
दुखियों के दुखड़े निवारती।

नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना।
हम तो मांगें तेरे चरणों में, छोटा सा कोना॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली,
सतियों के सत को संवारती।

चरण शरण में खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली।
वरद हस्त सर पर रख दो माँ, संकट हरने वाली॥
माँ भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओं वाली,
भक्तों के कारज तू ही सारती।

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श्री अम्बे आरती पाठ विधि

मंगलवार, शुक्रवार अथवा नवरात्रि के दिनों में दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति 'अम्बे तू है जगदम्बे काली' दोहराएं।

पाठ दिवस
मंगलवार, शुक्रवार एवं नवरात्रि
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श्री दुर्गा चालीसा
स्तोत्र · ८ मिनट
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श्री अम्बे आरती के बारे में

अम्बे तू है जगदम्बे काली आधुनिक काल की सर्वाधिक लोकप्रिय दुर्गा आरतियों में से एक है, जिसमें माता के सिंहवाहिनी, अष्टभुजी स्वरूप, दानवों का नाश करने और भक्तों पर उनकी असीम करुणा का वर्णन है। आरती एक स्थायी पंक्ति और चार कड़ियों में रचित है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। यह आधुनिक काल की सर्वाधिक लोकप्रिय दुर्गा आरतियों में से एक है, जो विशेष रूप से जागरण और नवरात्रि के अवसर पर गाई जाती है। इसमें माता के सिंहवाहिनी, अष्टभुजी स्वरूप और भक्तों पर उनकी असीम करुणा का वर्णन है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना

सामान्य प्रश्न

अम्बे तू है जगदम्बे काली आरती की रचना किसने की?

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है।

आरती की संरचना क्या है?

एक स्थायी पंक्ति और चार कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

पाठ का उत्तम दिन और समय क्या है?

मंगलवार, शुक्रवार अथवा नवरात्रि के दिनों में, दीप जलाकर गाना उत्तम माना जाता है।

क्या यह और 'जय अम्बे गौरी' आरती एक ही हैं?

नहीं, ये दो अलग-अलग लोकप्रिय दुर्गा आरतियां हैं। 'जय अम्बे गौरी' पारंपरिक आरती है, जबकि 'अम्बे तू है जगदम्बे काली' आधुनिक काल की लोकप्रिय आरती है।

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