मुख्यत्योहारभाई दूज
भाई-बहन का पर्व · कार्तिक शुक्ल द्वितीया

भाई दूज

भाई दूज दिवाली महापर्व का पांचवां और अंतिम दिन है, जिस पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी दीर्घायु व सुरक्षा की कामना करती हैं।

भाई दूज
अगली तिथि
११ नवम्बर २०२६

भाई दूज को 'भैया दूज' और 'यम द्वितीया' के नाम से भी जाना जाता है, और यह पांच दिन के दिवाली पर्व के समापन का प्रतीक है। तिलक का शुभ मुहूर्त द्वितीया तिथि के अनुसार बदलता है, इसलिए नज़दीकी पंचांग देखें।

भाई दूज का महत्व

कथा के अनुसार, यमराज की बहन यमुना ने अपने भाई को अनेक बार अपने घर आने का निमंत्रण दिया। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज उनके घर पधारे, तो यमुना ने उनका तिलक कर, आरती उतारकर भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो भाई इस दिन अपनी बहन के घर जाकर तिलक करवाएगा, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा। इसी कथा के आधार पर इस दिन को 'यम द्वितीया' भी कहा जाता है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार, नरकासुर का वध करने के पश्चात भगवान श्रीकृष्ण अपनी बहन सुभद्रा के घर गए थे, जहां सुभद्रा ने उनका तिलक कर मिष्ठान खिलाया था। इसी को स्मरण कर भाई दूज मनाई जाती है।

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भाई दूज दिवाली महापर्व के समापन का प्रतीक है, तथा भाई-बहन के स्नेह को समर्पित है। यह रक्षाबंधन के समान ही भाई-बहन के पर्व के रूप में मनाया जाता है, अंतर केवल इतना है कि रक्षाबंधन सावन मास में और भाई दूज कार्तिक मास में आता है।

भाई दूज कैसे मनाई जाती है

बहनें अपने भाइयों को अपने घर आमंत्रित करती हैं, उनकी आरती उतारती हैं तथा माथे पर तिलक लगाती हैं। कुछ परंपराओं में बहनें भाई की कलाई पर एक धागा भी बांधती हैं।

तिलक के पश्चात बहनें भाई को मिष्ठान खिलाती हैं, और भाई अपनी बहन को उपहार अथवा धनराशि भेंट कर उसकी रक्षा व सहयोग का वचन देते हैं।

अनेक स्थानों पर बहन के घर पर विशेष भोजन तैयार किया जाता है, जिसे भाई के साथ बैठकर ग्रहण किया जाता है। इसी के साथ पांच दिन का दिवाली महापर्व संपन्न होता है।

भाई दूज पूजा विधि

बहन स्नान कर पूजा की थाली सजाए, जिसमें रोली, अक्षत, दीपक व मिष्ठान रखें। भाई के आगमन पर उसकी आरती उतारें, माथे पर तिलक लगाएं तथा मिष्ठान खिलाएं। भाई बहन को उपहार अथवा दक्षिणा भेंट कर उसकी रक्षा का वचन दे।

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भाई दूज के बारे में

भाई दूज दिवाली महापर्व का पांचवां और अंतिम दिन है, जो भाई-बहन के प्रेम को समर्पित है। इस पृष्ठ पर इस दिन का महत्व, यमराज-यमुना की कथा, तथा तिलक पूजन की विधि की जानकारी दी गई है।

दिवाली के पिछले दिनों, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दिवाली और गोवर्धन पूजा, की जानकारी हेतु उनके अलग पृष्ठ भी देखें। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

भाई दूज कब मनाई जाती है?

भाई दूज दिवाली के दो दिन बाद, कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया तिथि को मनाई जाती है, तथा यह दिवाली महापर्व का अंतिम दिन है।

भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहा जाता है?

मान्यता है कि इसी तिथि को यमराज अपनी बहन यमुना के घर गए थे और उनसे तिलक करवाया था, इसीलिए इस दिन को यमराज के नाम पर 'यम द्वितीया' भी कहा जाता है।

भाई दूज और रक्षाबंधन में क्या अंतर है?

दोनों ही भाई-बहन के प्रेम के पर्व हैं, परंतु रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है, जबकि भाई दूज कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया को, दिवाली के समापन पर मनाई जाती है।

भाई दूज को कौन-कौन सी परंपराएं निभाई जाती हैं?

बहनें भाई की आरती उतारकर तिलक लगाती हैं और मिष्ठान खिलाती हैं, तथा भाई बदले में उपहार अथवा धनराशि भेंट कर सुरक्षा का वचन देते हैं।

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मुख्य जानकारी

देवतायमराज, यमुना
तिथिकार्तिक शुक्ल द्वितीया
विशेष अनुष्ठानबहन द्वारा भाई को तिलक व आरती
अन्य नामभैया दूज, यम द्वितीया
पर्व में स्थानदिवाली पर्व का पांचवां व अंतिम दिन