अध्याय १ · युधिष्ठिर का प्रश्न एवं राजा बलि के यज्ञ
एक बार महाराज युधिष्ठिर ने भगवान श्रीकृष्ण से विनयपूर्वक पूछा: हे भगवन्, आप कृपा कर मुझे कोई ऐसा व्रत अथवा अनुष्ठान बताइए, जिसे करने से मैं अपना नष्ट हुआ राज्य पुनः प्राप्त कर सकूं, क्योंकि राज्यच्युत होने के कारण मैं अत्यंत दुःखी हूं। श्रीकृष्ण जी ने कहा: हे राजन्, मेरे परम भक्त दैत्यराज बलि ने एक बार सौ अश्वमेध यज्ञ करने का संकल्प लिया। निन्यानबे यज्ञ तो उन्होंने निर्विघ्न रूप से पूर्ण कर लिए, परंतु सौवें यज्ञ के पूर्ण होते ही उन्हें अपने राज्य से निर्वासित होने का भय सताने लगा।
देवताओं को साथ लेकर इंद्र क्षीरसागर-निवासी भगवान विष्णु के पास पहुंचे, तथा वेद-मंत्रों से उनकी स्तुति कर अपने कष्ट का संपूर्ण वृत्तांत उन्हें सुनाया। यह सुनकर भगवान ने उनसे कहा: तुम निर्भय होकर अपने लोक को जाओ, मैं शीघ्र ही तुम्हारा कष्ट दूर करूंगा।
अध्याय २ · वामन अवतार एवं दीपावली के वर की प्राप्ति
इंद्र के चले जाने पर भगवान ने वामन का अवतार धारण कर, ब्रह्मचारी के वेश में राजा बलि के यज्ञ में प्रस्थान किया। राजा बलि को वचनबद्ध कर भगवान ने उनसे तीन पग भूमि दान में मांगी। बलि द्वारा दान का संकल्प करते ही भगवान ने अपने विराट रूप से एक पग में संपूर्ण पृथ्वी को नाप लिया, दूसरे पग से अंतरिक्ष को, और तीसरा चरण उनके सिर पर रख दिया।
राजा बलि की इस दानशीलता से प्रसन्न होकर भगवान ने उनसे वर मांगने को कहा। राजा बलि ने कहा: कार्तिक कृष्णपक्ष की त्रयोदशी से अमावस्या तक, अर्थात दीपावली तक, इस धरती पर मेरा राज्य बना रहे। इन तीन दिनों में सभी लोग दीपदान कर लक्ष्मी जी का पूजन करें, तथा जो ऐसा करे, उसके घर में लक्ष्मी जी का वास हो।
राजा बलि द्वारा मांगे गए इस वर को देकर भगवान ने उन्हें पातालपुरी का राज्य प्रदान कर पाताल लोक भेज दिया। उसी समय से देश के समस्त नागरिक इस पुनीत दीपावली पर्व को मनाते चले आ रहे हैं। अतः प्रत्येक प्राणी के लिए इस पर्व को सद्भावनापूर्वक मनाना न केवल श्रेयस्कर, अपितु अनिवार्य भी माना गया है।
दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा पाठ विधि
कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी (धनतेरस) से अमावस्या (दीपावली) तक तीन दिनों तक घर में दीप जलाएं। दीपावली की संध्या को प्रदोष काल में मां लक्ष्मी व भगवान गणेश का विधिपूर्वक पूजन करें, कमल पुष्प व मिठाइयों का भोग अर्पित करें, तथा दीपमालिका सजाकर आरती करें।
दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा के बारे में
दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा दो अध्यायों में विभक्त है। पहले अध्याय में युधिष्ठिर अपना खोया राज्य पुनः पाने का उपाय पूछते हैं, जिसके उत्तर में श्रीकृष्ण राजा बलि के अश्वमेध यज्ञ व इंद्र की व्याकुलता की कथा सुनाते हैं। दूसरे अध्याय में भगवान विष्णु वामन रूप धारण कर बलि से तीन पग भूमि मांगते हैं, तथा बलि द्वारा दीपावली पर दीपदान व लक्ष्मी पूजन का वर मांगे जाने की कथा है।
यह कथा दीपावली की संध्या को लक्ष्मी पूजन के समय पढ़ी जाती है। इस पृष्ठ पर दोनों अध्यायों का पूर्ण पाठ शुद्ध हिंदी में, अक्षर-आकार समायोजन और प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा राजा बलि के अश्वमेध यज्ञ व भगवान विष्णु के वामन अवतार की सुपरिचित पौराणिक कथा है, जो कृष्ण द्वारा युधिष्ठिर को सुनाई गई कथा के रूप में प्रचलित है, तथा जिसमें दीपावली पर दीपदान व लक्ष्मी पूजन की परंपरा के मूल का वर्णन है। यहां प्रस्तुत पाठ एक प्रकाशित हिंदी व्रत-कथा संग्रह पुस्तिका में छपे इस कथा-अंश का यथावत रूपांतरण है, जिसमें केवल स्पष्ट मुद्रण-त्रुटियां सुधारी गई हैं, इसमें कोई अन्य परिवर्तन नहीं किया गया है। दीपावली से जुड़ी अन्य दो सुपरिचित कथाएं, भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी, तथा समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी का प्राकट्य, इसी साइट के दीपावली पर्व-पृष्ठ पर पहले से विस्तार से दी गई हैं, इसलिए यहां दोहराई नहीं गई हैं।
सामान्य प्रश्न
दीपावली लक्ष्मी पूजन कथा में कुल कितने अध्याय हैं?
इसमें कुल दो अध्याय हैं, जो एक साथ पूर्ण पाठ के रूप में पढ़े या सुने जाते हैं।
दीपावली पर तीन दिन दीपदान क्यों किया जाता है?
जैसा कथा में बताया गया है, राजा बलि ने भगवान वामन से यह वर मांगा था कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी से अमावस्या तक तीन दिनों में सभी लोग दीपदान कर लक्ष्मी जी का पूजन करें, इसी वर के कारण यह परंपरा आरंभ हुई मानी जाती है।
क्या दीपावली की केवल यही एक कथा है?
नहीं, दीपावली से भगवान श्रीराम की अयोध्या वापसी तथा समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी के प्राकट्य की कथाएं भी जुड़ी हैं, जो इस साइट के दीपावली पर्व-पृष्ठ पर विस्तार से दी गई हैं। यह पृष्ठ विशेष रूप से राजा बलि व वामन अवतार की कथा प्रस्तुत करता है, जो दीपदान व लक्ष्मी पूजन की परंपरा का मूल बताती है।
राजा बलि कौन थे?
राजा बलि एक दैत्यराज व भगवान विष्णु के परम भक्त थे, जिन्होंने सौ अश्वमेध यज्ञ करने का संकल्प लिया था। भगवान ने वामन अवतार धारण कर उनसे तीन पग भूमि दान में लेकर उन्हें पाताल लोक का राज्य प्रदान किया।
