मुख्यआरतीश्री शनि देव आरती

श्री शनि देव आरती

शनि देव आरती, जय जय श्री शनिदेव, शनि देव की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसका पूर्ण पाठ यहां अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री शनि देव आरती
कड़ी/

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१ स्थायी · ४ कड़ी
पाठ समय३ मिनट
स्थायी

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।
सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

कड़ी

श्याम अंक वक्र दृष्ट चतुर्भुजा धारी।
नीलाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

क्रीट मुकुट शीश रजित दिपत है लिलारी।
मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।
लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

देव दनुज ऋषि मुनि सुमरिन नर नारी।
विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

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श्री शनि देव आरती पाठ विधि

शनिवार को संध्या समय सरसों के तेल का दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद और पाठ के अंत में स्थायी पंक्ति 'जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी' दोहराएं।

पाठ दिवस
शनिवार एवं शनि जयंती
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श्री शनि चालीसा
स्तोत्र · ८ मिनट
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श्री शनि देव आरती के बारे में

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी शनि देव की सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती है, जिसमें उनके श्याम वर्ण, चतुर्भुज स्वरूप, गज की सवारी, प्रिय भोग-सामग्री और सर्वव्यापी महिमा का वर्णन है। आरती एक स्थायी पंक्ति और चार कड़ियों में रचित है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। इसमें शनि देव के श्याम वर्ण, चतुर्भुज स्वरूप, गज की सवारी, उन्हें प्रिय वस्तुओं और उनकी सर्वव्यापी महिमा का वर्णन है। यह आरती शनि भक्तों द्वारा नित्य तथा विशेष रूप से शनिवार को गाई जाती है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना

सामान्य प्रश्न

शनि देव आरती की रचना किसने की?

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है।

आरती की संरचना क्या है?

एक स्थायी पंक्ति और चार कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

शनि देव आरती पाठ का उत्तम दिन और समय क्या है?

शनिवार को संध्या समय, सरसों के तेल का दीप जलाकर गाना उत्तम माना जाता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

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