न्यायाधीश ग्रह देवता

शनि देव

शनि देव भगवान सूर्य के पुत्र व कर्मों के अनुसार न्यायपूर्ण फल देने वाले ग्रह देवता हैं, जिन्हें कठोर किंतु सर्वाधिक न्यायप्रिय माना जाता है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, आरती व पर्व एक साथ उपलब्ध हैं।

शनि देव

शनि देव माहात्म्य

शनि देव भगवान सूर्य व उनकी पत्नी छाया के पुत्र हैं। मान्यता है कि गर्भावस्था में छाया की कठोर तपस्या व सूर्य की ओर एकटक दृष्टि के कारण शनि देव का वर्ण श्याम हुआ। उन्हें प्रायः भय व अशुभता से जोड़ा जाता है, किंतु वास्तव में वे किसी के प्रति पक्षपात न करते हुए, चाहे वह देवता हों या मनुष्य, प्रत्येक को उसके अपने कर्मों के अनुसार ही फल देने वाले न्यायाधीश माने जाते हैं।

ज्योतिष में उनकी साढ़ेसाती व ढैय्या जैसी ग्रह-दशाओं की व्यापक चर्चा होती है, जिनके प्रभाव को शांत करने हेतु शनिवार को सरसों के तेल का दान, कौओं को भोजन कराना व शनि मंदिर में दर्शन जैसे उपाय बताए जाते हैं।

मान्यता है कि एक प्रसंग में बाल हनुमान जी ने शनि देव को पराजित कर उन्हें विनम्र होने पर विवश किया था, जिसके पश्चात से यह विश्वास प्रचलित हुआ कि श्री हनुमान जी की भक्ति व हनुमान चालीसा का पाठ करने वाले भक्तों पर शनि देव का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता। इसी कारण शनि पीड़ा में हनुमान जी की उपासना विशेष रूप से की जाती है।

शनि देव से जुड़े पाठ

शनि देव के बारे में

यह पृष्ठ शनि देव से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, आरती व पर्वों का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

शनि देव को न्यायाधीश ग्रह देवता क्यों कहा जाता है?

वे बिना किसी पक्षपात के प्रत्येक व्यक्ति को उसके अपने कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं, चाहे वह देवता हों या मनुष्य, जिस कारण उन्हें न्यायप्रिय ग्रह देवता माना जाता है।

साढ़ेसाती क्या है?

यह ज्योतिष में शनि के किसी व्यक्ति की जन्म राशि पर साढ़े सात वर्षों तक चलने वाले प्रभाव को कहा जाता है, जिसके प्रभाव को शांत करने हेतु विशेष उपाय बताए जाते हैं।

शनि जयंती कब मनाई जाती है?

यह ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को, शनि देव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है।

शनि देव व हनुमान जी का क्या संबंध है?

मान्यता है कि बाल हनुमान जी ने एक प्रसंग में शनि देव को पराजित किया था, जिसके पश्चात यह विश्वास प्रचलित हुआ कि हनुमान भक्तों पर शनि का अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता, जिस कारण शनि पीड़ा में हनुमान जी की उपासना की जाती है।

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मुख्य जानकारी

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