भगवान सूर्य देव
भगवान सूर्य देव जगत के एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिनके प्रत्यक्ष दर्शन प्रतिदिन होते हैं, तथा जिन्हें समस्त जीवन व ऊर्जा का स्रोत माना जाता है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, व्रत-कथा व पर्व एक साथ उपलब्ध हैं।

भगवान सूर्य देव माहात्म्य
वैदिक काल से पूजित भगवान सूर्य देव को वेदों में समस्त सृष्टि के जीवन, प्रकाश व ऊर्जा का स्रोत बताया गया है। उनका रथ सात अश्वों द्वारा खींचा जाता है, जो सूर्य-प्रकाश के सात रंगों का प्रतीक माने जाते हैं, तथा उनके सारथी अरुण हैं। उनकी दो पत्नियां संज्ञा व छाया हैं, तथा यमराज, यमुना, शनि देव व अश्विनी कुमार उनकी संतानें हैं।
रथ सप्तमी को उनके प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है, तथा मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश व उत्तरायण के आरंभ का प्रतीक है। छठ पूजा में डूबते व उगते, दोनों सूर्य की उपासना छठी मैया के साथ की जाती है, जो भगवान सूर्य की उपासना की सबसे कठिन व्रत-परंपराओं में से एक मानी जाती है।
उनके पुत्र शनि देव न्यायप्रिय व कर्मों के अनुसार फल देने वाले माने जाते हैं, तथा स्वयं भगवान श्रीराम ने रावण से युद्ध से पूर्व अगस्त्य ऋषि से 'आदित्य हृदय स्तोत्र' प्राप्त कर सूर्य देव की स्तुति की थी। आज भी सूर्य नमस्कार व गायत्री मंत्र का जाप सूर्योपासना के सर्वाधिक प्रचलित माध्यम माने जाते हैं।
भगवान सूर्य देव से जुड़े पाठ
चालीसा
Chalisaव्रत कथा
Vrat Kathaभगवान सूर्य देव के बारे में
यह पृष्ठ भगवान सूर्य देव से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, व्रत-कथा व पर्वों का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।
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सामान्य प्रश्न
सूर्य देव को जगत का प्रत्यक्ष देवता क्यों कहा जाता है?
अन्य देवी-देवताओं के विपरीत, सूर्य देव का साक्षात दिव्य स्वरूप प्रतिदिन आकाश में देखा जा सकता है, जिस कारण उन्हें जगत का प्रत्यक्ष देवता कहा जाता है।
छठ पूजा में सूर्य की पूजा कैसे की जाती है?
छठ पूजा में डूबते व उगते, दोनों सूर्य को जल में खड़े होकर अर्घ्य दिया जाता है, तथा यह पूजा छठी मैया के साथ मिलकर की जाती है।
मकर संक्रांति सूर्य से कैसे जुड़ी है?
मकर संक्रांति उस दिन मनाई जाती है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तथा इसी दिन से उत्तरायण का आरंभ माना जाता है।
सूर्य देव के पुत्र कौन-कौन हैं?
यमराज, शनि देव व अश्विनी कुमार उनके प्रमुख पुत्र माने जाते हैं, तथा यमुना जी उनकी पुत्री हैं।