यह पर्व सूर्य के उत्तरायण गमन के बाद, माघ मास में मनाया जाता है, तथा तिरुमला तिरुपति व कोणार्क सूर्य मंदिर जैसे स्थलों पर विशेष भव्यता से मनाया जाता है। सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग देखें।
रथ सप्तमी (सूर्य जयंती) का महत्व
मान्यता है कि माघ शुक्ल सप्तमी के दिन ही भगवान सूर्य देव सर्वप्रथम अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर आकाश में प्रकट हुए थे, अतः इस तिथि को सूर्य जयंती के रूप में मनाया जाता है। सूर्य के रथ के सात घोड़े सप्तरंगी प्रकाश अर्थात इंद्रधनुष के सात रंगों के प्रतीक माने जाते हैं।
इस दिन को सूर्य के उत्तरायण गमन से जुड़ा हुआ भी माना जाता है, तथा यह दिन शीत ऋतु के पश्चात सूर्य के प्रकाश व ऊर्जा के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है, जिससे स्वास्थ्य, ऊर्जा व समृद्धि की कामना से इस दिन सूर्य देव का पूजन किया जाता है।
रथ सप्तमी को माघ सप्तमी, भानु सप्तमी व अचला सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है, तथा इसे माघ मास की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में गिना जाता है, जो सूर्य उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
रथ सप्तमी (सूर्य जयंती) कैसे मनाई जाती है
भक्तगण सूर्योदय से पूर्व स्नान करते हैं, जिसमें सिर व कंधों पर अरक (आक) के पत्ते रखकर स्नान करने की विशेष परंपरा है, जिसे स्वास्थ्य-लाभकारी व पापनाशक माना जाता है। स्नान के पश्चात उगते सूर्य को जल का अर्घ्य दिया जाता है।
घरों के आंगन में गोबर व चावल के आटे से सूर्य के सात घोड़ों वाले रथ की रंगोली बनाई जाती है, तथा उस पर खीर पकाकर सूर्य देव को भोग अर्पित किया जाता है। कुछ स्थानों पर सूर्य चालीसा व आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ भी किया जाता है।
आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति में इस दिन भगवान वेंकटेश्वर की प्रतिमा को विभिन्न वाहनों पर सुसज्जित कर भव्य शोभा यात्रा निकाली जाती है, तथा ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर व आंध्र के अरसावल्ली मंदिर में भी विशेष उत्सव आयोजित होते हैं।
रथ सप्तमी (सूर्य जयंती) पूजा विधि
सूर्योदय से पूर्व अरक (आक) के पत्ते सिर व कंधों पर रखकर स्नान करें। स्नान के पश्चात उगते सूर्य को जल का अर्घ्य दें। सूर्य के रथ की रंगोली बनाकर उस पर खीर का भोग अर्पित करें, तथा सूर्य चालीसा व आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
रथ सप्तमी (सूर्य जयंती) के बारे में
रथ सप्तमी माघ मास की शुक्ल सप्तमी को भगवान सूर्य देव के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाई जाती है। इस पृष्ठ पर इस पर्व का महत्व, सूर्य के सात घोड़ों वाले रथ की कथा, तथा स्नान-अर्घ्य की विधि की जानकारी दी गई है।
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सामान्य प्रश्न
रथ सप्तमी कब मनाई जाती है?
रथ सप्तमी प्रत्येक वर्ष माघ मास की शुक्ल सप्तमी तिथि को मनाई जाती है।
रथ सप्तमी को सूर्य जयंती क्यों कहा जाता है?
मान्यता है कि इसी तिथि को भगवान सूर्य देव अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर सर्वप्रथम आकाश में प्रकट हुए थे, इसीलिए इसे सूर्य जयंती के रूप में भी मनाया जाता है।
रथ सप्तमी पर अरक के पत्तों से स्नान क्यों किया जाता है?
अरक (आक) के पत्ते सिर व कंधों पर रखकर स्नान करने की परंपरा को स्वास्थ्य-लाभकारी व समस्त पापों व रोगों का नाश करने वाला माना जाता है।
रथ सप्तमी सबसे अधिक कहां मनाई जाती है?
यह पर्व आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति, ओडिशा के कोणार्क सूर्य मंदिर, तथा अरसावल्ली सूर्य मंदिर में विशेष भव्यता से मनाया जाता है।
