पाठ विवरण
श्रीरामचन्द्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।
नवकंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारुणम्॥
कंदर्प अगणित अमित छबि नव नील नीरज सुन्दरम्।
पटपीत मानहुं तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक सुतावरम्॥
भजु दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकन्दनम्।
रघुनन्द आनन्दकन्द कोसलचन्द दशरथ नन्दनम्॥
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदार अंग विभूषणम्।
आजानुभुज शरचापधर संग्राम जित खरदूषणम्॥
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।
मम हृदयकंज निवास कुरु कामादिखलदल गंजनम्॥
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥
एहि भाँति गौरी असीस सुनि सिय सहित हियँ हरषीं अली।
तुलसी भवानिहि पूजि पुनि पुनि मुदित मन मंदिर चली॥
जानि गौरि अनुकूल सिय हिय हरषु न जाइ कहि।
मंजुल मंगल मूल बाम अंग फरकन लगे॥
व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।
श्री राम स्तुति पाठ विधि
प्रातः स्नान के पश्चात अथवा राम मंदिर में दीप जलाकर पाठ करें। यह स्तुति किसी स्थायी पंक्ति के बिना आरंभ से अंत तक एक साथ पढ़ी जाती है।
श्री राम स्तुति के बारे में
राम स्तुति, जिसे उसकी पहली पंक्ति के कारण 'श्री रामचंद्र कृपालु भजमन' के नाम से भी जाना जाता है, भगवान श्रीराम के दिव्य रूप, उनकी करुणा और खर-दूषण संहार का वर्णन करती है। परंपरागत रूप से इसमें रामचरितमानस के बालकांड की तीन कड़ियां भी जोड़ी जाती हैं, जहां माता गौरी सीता को श्रीराम से विवाह का आशीर्वाद देती हैं। एक अन्य लोकप्रिय आरती के विपरीत, इसमें कोई दोहराई जाने वाली स्थायी पंक्ति नहीं है — आठों कड़ियां एक साथ, क्रमशः पढ़ी जाती हैं।
इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक श्लोक के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।
गोस्वामी तुलसीदास के बारे में
गोस्वामी तुलसीदास (लगभग सन् १५३२–१६२३) हिंदी साहित्य के सर्वाधिक प्रतिष्ठित भक्त कवि और रामचरितमानस के रचयिता हैं। इस स्तुति की पहली पांच कड़ियां संस्कृत-अवधी मिश्रित भाषा में उनकी रचना 'विनय पत्रिका' से ली गई हैं, जबकि अंतिम तीन कड़ियां रामचरितमानस के बालकांड से हैं, जहां माता गौरी सीता को श्रीराम से विवाह का आशीर्वाद देती हैं। अधिकांश प्रचलित संकलनों में इन्हें एक साथ 'श्री राम स्तुति' के रूप में गाया जाता है, इसलिए यहां भी दोनों को साथ प्रस्तुत किया गया है।
सामान्य प्रश्न
राम स्तुति की रचना किसने की?
गोस्वामी तुलसीदास ने की। इसकी पहली पांच कड़ियां उनकी रचना 'विनय पत्रिका' से, और अंतिम तीन कड़ियां रामचरितमानस के बालकांड से ली गई हैं।
क्या राम स्तुति एक आरती है?
नहीं, यह एक स्तुति है, आरती नहीं — इसमें आरती जैसी कोई दोहराई जाने वाली स्थायी पंक्ति नहीं होती, आठों कड़ियां सीधे क्रम में पढ़ी जाती हैं।
'श्री रामचंद्र कृपालु भजमन' और 'राम स्तुति' में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं — 'श्री रामचंद्र कृपालु भजमन' इसकी पहली पंक्ति है, जिससे यह स्तुति लोकप्रिय रूप से पहचानी जाती है, जबकि 'राम स्तुति' इसका सामान्य नाम है।
आरती की संरचना क्या है?
इसमें कुल आठ कड़ियां हैं, कोई स्थायी पंक्ति नहीं। पहली पांच कड़ियां संस्कृत-अवधी मिश्रित भाषा में हैं, और अंतिम तीन अवधी में।
क्या अर्थ जानना आवश्यक है?
आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।
