मुख्यत्योहारश्री कृष्ण जन्माष्टमी
जन्मोत्सव · भाद्रपद कृष्ण अष्टमी

श्री कृष्ण जन्माष्टमी

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व है, जो भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष अष्टमी को, अर्धरात्रि में मनाया जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी
अगली तिथि
२५ अगस्त २०२७

कृष्ण जन्म के समय अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र भी था, जिसे 'जयंती योग' कहा जाता है। जिस वर्ष यह संयोग पूर्ण रूप से नहीं बनता, वहां विभिन्न परंपराओं (स्मार्त एवं वैष्णव) में एक दिन का अंतर हो सकता है, ठीक वैसे ही जैसे राम नवमी में देखा गया है। सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग से पुष्टि करें।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान विष्णु के आठवें अवतार, श्रीकृष्ण के मथुरा में देवकी और वसुदेव के घर जन्म लेने के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। मान्यता है कि मामा कंस के अत्याचारों से पृथ्वी को मुक्त कराने के लिए स्वयं भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया था। यह पर्व भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को, अर्धरात्रि में मनाया जाता है।

कथा के अनुसार राजा कंस को आकाशवाणी से पता चला था कि देवकी की आठवीं संतान उसका वध करेगी, इसलिए उसने देवकी-वसुदेव को कारागार में बंद कर उनकी छह संतानों को मार डाला। सातवीं संतान बलराम को योगमाया द्वारा रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया। आठवीं संतान श्रीकृष्ण का जन्म घनघोर वर्षा भरी अर्धरात्रि में हुआ। जन्म के तुरंत बाद वसुदेव उफनती यमुना नदी पार कर श्रीकृष्ण को गोकुल में यशोदा के पास छोड़ आए और बदले में उनकी नवजात कन्या को कारागार ले आए, जिससे शिशु कृष्ण की रक्षा हुई।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा
कथा · श्रीकृष्ण जन्म व कंस-वध की पूरी कथा

भक्तों के लिए यह विशेष रूप से शुभ माना जाता है जब अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र भी हो, क्योंकि श्रीकृष्ण के जन्म के समय यही संयोग था, जिसे 'जयंती योग' कहा जाता है। श्रीकृष्ण को पूर्ण अवतार माना जाता है, और यह दिन उनकी लीलाओं, गीता के उपदेश तथा धर्म की रक्षा के स्मरण के लिए मनाया जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी कैसे मनाई जाती है

जन्माष्टमी के दिन घरों और मंदिरों को सजाया जाता है। बाल स्वरूप श्रीकृष्ण की मूर्ति को झूले में सजाया जाता है, दिनभर भजन-कीर्तन होते हैं, तथा श्रीमद्भागवत और कृष्ण-लीला का पाठ किया जाता है।

कृष्ण आरती
आरती · मध्यरात्रि पूजा में गाई जाने वाली आरती

अनेक श्रद्धालु इस दिन व्रत रखते हैं और निशीथ काल अर्थात अर्धरात्रि की पूजा के बाद ही व्रत खोलते हैं। पूजा में बाल कृष्ण का पंचामृत से अभिषेक, वस्त्र-श्रृंगार तथा माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया जाता है।

अगले दिन महाराष्ट्र में 'दही हांडी' का प्रसिद्ध उत्सव मनाया जाता है, जिसमें मानव-मीनार बनाकर ऊंचाई पर बंधी दही की मटकी फोड़ी जाती है। इस्कॉन सहित विश्वभर के मंदिरों में जन्माष्टमी की रात्रि विशेष भव्यता से मनाई जाती है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि

जन्माष्टमी के दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर या मंदिर में बाल कृष्ण की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करें। निशीथ काल अर्थात अर्धरात्रि में श्रीकृष्ण का पंचामृत से अभिषेक कर, वस्त्र-श्रृंगार और माखन-मिश्री का भोग अर्पित करें तथा आरती करें। श्रद्धा व सामर्थ्य के अनुसार निर्जला या फलाहार व्रत रखा जाता है, तथा पूजा के बाद ही व्रत खोला जाता है।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा पढ़ें
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श्री कृष्ण जन्माष्टमी के बारे में

कृष्ण जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव का पर्व है, जो भाद्रपद मास की कृष्ण अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस पृष्ठ पर जन्माष्टमी का महत्व, कंस के अत्याचार और श्रीकृष्ण के जन्म की पृष्ठभूमि, इस दिन मनाई जाने वाली रस्में जैसे झूला-सजावट, निशीथ पूजा, व्रत तथा दही हांडी की परंपरा, तथा घर पर पूजा-विधि की जानकारी दी गई है।

यह पर्व रात्रि में मनाया जाने वाला विशेष पर्व है, क्योंकि श्रीकृष्ण का जन्म स्वयं अर्धरात्रि में हुआ था। इस पृष्ठ पर दी गई जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाई जाती है?

कृष्ण जन्माष्टमी प्रत्येक वर्ष भाद्रपद मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है, तथा मुख्य पूजा अर्धरात्रि में की जाती है।

कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाई जाती है?

यह पर्व भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण के मथुरा में देवकी और वसुदेव के घर जन्म लेने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।

जयंती योग क्या है?

जब अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र भी हो, तो इस संयोग को जयंती योग कहा जाता है, क्योंकि श्रीकृष्ण के जन्म के समय यही स्थिति थी और इसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है।

क्या जन्माष्टमी पर व्रत रखा जाता है?

हां, अनेक श्रद्धालु इस दिन निर्जला या फलाहार व्रत रखते हैं और निशीथ काल की पूजा के बाद ही व्रत खोलते हैं, यह श्रद्धा व सामर्थ्य पर निर्भर करता है।

दही हांडी क्या है?

यह महाराष्ट्र में जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाने वाला उत्सव है, जिसमें मानव-मीनार बनाकर ऊंचाई पर बंधी दही की मटकी फोड़ी जाती है, जो बाल कृष्ण की माखन-चोरी लीला का स्मरण कराता है।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवताभगवान श्रीकृष्ण
तिथिभाद्रपद कृष्ण अष्टमी
नक्षत्ररोहिणी (जयंती योग में)
शुभ समयनिशीथ काल (अर्धरात्रि)
व्रत प्रकारनिर्जला अथवा फलाहार, श्रद्धानुसार