श्री राधा रानी
श्री राधा रानी भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिया व भक्ति तथा दिव्य प्रेम की सर्वोच्च प्रतीक हैं, जिनका नाम आदरपूर्वक कृष्ण के नाम से पहले लिया जाता है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा व पर्व एक साथ उपलब्ध हैं।

श्री राधा रानी माहात्म्य
श्री राधा रानी का जन्म बरसाना में पिता वृषभानु जी व माता कीर्ति के घर हुआ था। वृंदावन के कुंजों में उनकी व भगवान श्रीकृष्ण की लीलाएं भक्ति व दिव्य प्रेम का सर्वोच्च आदर्श मानी जाती हैं, जो सांसारिक प्रेम से भिन्न, आत्मा की परमात्मा के प्रति निश्छल भक्ति (पराभक्ति) का प्रतीक हैं। इसी कारण उनका नाम सम्मानपूर्वक कृष्ण के नाम से पहले लिया जाता है, तथा ब्रज क्षेत्र में 'राधे-राधे' कहकर अभिवादन किया जाता है।
वृंदावन की रासलीला, अर्थात कृष्ण व गोपियों संग उनका वृत्ताकार दिव्य नृत्य, भक्ति-संगीत, कथक व अन्य नृत्य-परंपराओं का केंद्र बिंदु रही है। बरसाना व नंदगांव के मध्य खेली जाने वाली प्रसिद्ध 'लठमार होली' भी राधा-कृष्ण की प्रेम-लीलाओं से जुड़ी परंपरा मानी जाती है।
राधा अष्टमी, भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी के पंद्रह दिन पश्चात, भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मनाई जाती है, जो विशेष रूप से बरसाना स्थित श्री राधा रानी मंदिर में अत्यंत भव्यता से मनाई जाती है।
श्री राधा रानी से जुड़े पाठ
चालीसा
Chalisaपर्व
Festivalsश्री राधा रानी के बारे में
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सामान्य प्रश्न
राधा रानी कौन थीं?
वे बरसाना में वृषभानु जी व माता कीर्ति की पुत्री थीं, तथा भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिया व भक्ति-प्रेम की सर्वोच्च प्रतीक मानी जाती हैं।
राधा अष्टमी कब मनाई जाती है?
यह भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को, कृष्ण जन्माष्टमी के पंद्रह दिन पश्चात, राधा रानी के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है।
कृष्ण से पहले राधा का नाम क्यों लिया जाता है?
उनकी अटूट भक्ति व निश्छल प्रेम के सम्मान में यह परंपरा प्रचलित है, तथा ब्रज क्षेत्र में इसी आदर भाव से 'राधे-राधे' कहकर अभिवादन किया जाता है।
लठमार होली का राधा-कृष्ण से क्या संबंध है?
बरसाना व नंदगांव के मध्य खेली जाने वाली यह होली राधा-कृष्ण की प्रेम-लीलाओं से जुड़ी परंपरा मानी जाती है।