माता तुलसी
माता तुलसी भगवान विष्णु की परम प्रिय व पूज्य पौधे के रूप में पूजी जाने वाली देवी हैं, जिनके बिना विष्णु-पूजा अधूरी मानी जाती है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, आरती, पर्व व पौराणिक प्रसंग एक साथ उपलब्ध हैं।

माता तुलसी माहात्म्य
मान्यता है कि वृंदा नामक परम पतिव्रता स्त्री की भस्म से माता तुलसी की उत्पत्ति हुई, तथा भगवान विष्णु ने उसकी अटूट भक्ति व निष्ठा का सम्मान करते हुए वचन दिया कि वे सदैव शालिग्राम-स्वरूप में तुलसी के साथ ही विराजमान रहेंगे। इसी कारण आज भी बिना तुलसी दल अर्पित किए भगवान विष्णु की पूजा अधूरी मानी जाती है।
अधिकांश हिंदू घरों के आंगन में तुलसी का पौधा लगाकर उसकी प्रतिदिन संध्याकालीन पूजा व दीप-प्रज्वलन की परंपरा है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। कार्तिक मास में मनाया जाने वाला तुलसी विवाह, जिसमें तुलसी का शालिग्राम अथवा भगवान विष्णु से विधिवत विवाह कराया जाता है, चातुर्मास की समाप्ति व विवाह-ऋतु के आरंभ का प्रतीक भी माना जाता है।
इसके अतिरिक्त तुलसी को उसके औषधीय गुणों के लिए भी अत्यंत आदरपूर्वक देखा जाता है, तथा माना जाता है कि यह अपने आसपास के वातावरण को शुद्ध करती है, जिस कारण यह लगभग हर हिंदू घर में लगाई जाती है। पूजा-पाठ से लेकर आयुर्वेदिक उपचार तक, पौधे का प्रत्येक भाग उपयोगी माना जाता है।
माता तुलसी से जुड़े पाठ
चालीसा
Chalisaआरती
Aartiपर्व
Festivalsपौराणिक प्रसंग
Prasangमाता तुलसी के बारे में
यह पृष्ठ माता तुलसी से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, आरती, पर्व व पौराणिक प्रसंगों का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।
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सामान्य प्रश्न
माता तुलसी की उत्पत्ति कैसे हुई?
मान्यता है कि वृंदा नामक परम पतिव्रता स्त्री की भस्म से भगवान विष्णु ने तुलसी का पौधा उत्पन्न किया, तथा सदैव उसके साथ रहने का वचन दिया।
तुलसी विवाह क्या है?
यह कार्तिक मास में मनाया जाने वाला पर्व है, जिसमें तुलसी का शालिग्राम अथवा भगवान विष्णु से विधिवत विवाह कराया जाता है, जो चातुर्मास की समाप्ति का भी प्रतीक है।
बिना तुलसी विष्णु-पूजा अधूरी क्यों मानी जाती है?
मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वृंदा की भक्ति के सम्मान में यह वचन दिया था कि तुलसी दल के बिना उनकी पूजा अधूरी रहेगी, जिस कारण आज भी तुलसी पत्र अर्पित करना अनिवार्य माना जाता है।
तुलसी के पौधे को घर में क्यों लगाया जाता है?
इसे अत्यंत शुभ व वातावरण-शुद्धिकारक माना जाता है, तथा इसके औषधीय गुणों के कारण भी यह लगभग हर हिंदू घर के आंगन में लगाई जाती है।