गीता जयंती
गीता जयंती मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है, जिस दिन कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था।

यह वही तिथि है जिस दिन मोक्षदा एकादशी भी मनाई जाती है, अतः अनेक भक्त इस दिन एकादशी व्रत रखकर गीता पाठ भी करते हैं। सटीक तिथि हेतु नज़दीकी पंचांग देखें।
गीता जयंती का महत्व
महाभारत युद्ध के आरंभ में जब अर्जुन ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अपने ही स्वजनों, गुरुजनों व मित्रों को शत्रु पक्ष में खड़ा देखा, तो वे मोहग्रस्त होकर शस्त्र त्यागकर बैठ गए। इसी विषाद की स्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने सारथी के रूप में अर्जुन को कर्तव्य, धर्म व आत्मा की अमरता का उपदेश दिया, जो श्रीमद्भगवद्गीता के नाम से जाना जाता है।
श्रीमद्भगवद्गीता में कुल १८ अध्याय व ७०० श्लोक हैं, जिनमें कर्मयोग, ज्ञानयोग व भक्तियोग सहित जीवन के हर पक्ष का मार्गदर्शन दिया गया है। इसे उपनिषदों का सार तथा हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक माना जाता है।
गीता जयंती को गीता के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है, तथा यह संयोगवश मोक्षदा एकादशी की तिथि पर ही आती है, इसे इस बात का प्रतीक माना जाता है कि गीता का ज्ञान ही मनुष्य को सच्ची मोक्ष-प्राप्ति के मार्ग पर ले जाता है।
गीता जयंती कैसे मनाई जाती है
इस दिन मंदिरों, आश्रमों व घरों में श्रीमद्भगवद्गीता के सामूहिक पाठ का आयोजन किया जाता है, तथा अनेक स्थानों पर गीता के अठारह अध्यायों का सस्वर पाठ पूर्ण किया जाता है। इस्कॉन जैसी संस्थाएं इसे 'गीता महोत्सव' के रूप में विशेष भव्यता से मनाती हैं।
कुरुक्षेत्र में इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया जाता है, जिसमें प्रवचन, सांस्कृतिक कार्यक्रम व गीता प्रदर्शनी सम्मिलित होते हैं। साथ ही, जो भक्त इस दिन मोक्षदा एकादशी का व्रत भी रखते हैं, वे संध्या समय भगवान श्रीकृष्ण की आरती करते हैं।
अनेक भक्त इस दिन गीता के एक या अधिक अध्यायों का पाठ करने का संकल्प लेते हैं, तथा वर्षभर के लिए संपूर्ण गीता पाठ का क्रम आरंभ करते हैं। विद्यालयों व सामाजिक संस्थाओं में भी गीता के श्लोकों पर आधारित प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं।
गीता जयंती पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करें। श्रीमद्भगवद्गीता के किसी भी अध्याय अथवा संपूर्ण गीता का पाठ करें। संभव हो तो सामूहिक गीता पाठ में सम्मिलित हों, तथा संध्या समय भगवान श्रीकृष्ण की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
गीता जयंती के बारे में
गीता जयंती मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी को मनाई जाने वाली दिवस है, जो श्रीमद्भगवद्गीता के अवतरण की स्मृति में मनाया जाता है। इस पृष्ठ पर इस दिवस का महत्व, गीता उपदेश की पृष्ठभूमि, तथा उत्सव की परंपरा की जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
गीता जयंती कब मनाई जाती है?
गीता जयंती प्रत्येक वर्ष मार्गशीर्ष मास की शुक्ल एकादशी तिथि को मनाई जाती है, यही तिथि मोक्षदा एकादशी के रूप में भी मनाई जाती है।
गीता जयंती क्यों मनाई जाती है?
इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र में अर्जुन को श्रीमद्भगवद्गीता का उपदेश दिया था, अतः यह दिन गीता के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
गीता जयंती और मोक्षदा एकादशी में क्या संबंध है?
दोनों एक ही तिथि, मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी, को मनाए जाते हैं। मोक्षदा एकादशी पितरों की मुक्ति हेतु रखा जाने वाला व्रत है, जबकि गीता जयंती इसी दिन गीता के अवतरण की स्मृति में मनाई जाती है।
श्रीमद्भगवद्गीता में कितने अध्याय हैं?
श्रीमद्भगवद्गीता में कुल १८ अध्याय व ७०० श्लोक हैं, जिनमें कर्मयोग, ज्ञानयोग व भक्तियोग सहित जीवन के हर पक्ष का मार्गदर्शन दिया गया है।