श्री खाटू श्याम जी
श्री खाटू श्याम जी महाभारत के वीर बर्बरीक का ही स्वरूप माने जाते हैं, जिन्हें भगवान श्रीकृष्ण से 'कलियुग में अपने ही नाम से पूजित होने' का वरदान प्राप्त था। यहां उनसे जुड़ी चालीसा व आरती एक साथ उपलब्ध हैं।

श्री खाटू श्याम जी माहात्म्य
श्री खाटू श्याम जी को भीम व हिडिंबा के पौत्र तथा घटोत्कच के पुत्र वीर बर्बरीक का ही स्वरूप माना जाता है, जो बाल्यावस्था से ही अद्वितीय योद्धा थे तथा जिन्हें माता से तीन अमोघ बाणों का वरदान प्राप्त था, जिनसे वे किसी भी युद्ध को क्षण भर में समाप्त कर सकते थे।
महाभारत युद्ध के समय बर्बरीक ने हारने वाले पक्ष का साथ देने का प्रण लिया था, जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने युद्ध के परिणाम में असंतुलन उत्पन्न करने वाला जानकर, ब्राह्मण वेश धारण कर उनसे उनका शीश दान में मांग लिया। बर्बरीक ने बिना संकोच अपना शीश अर्पित कर दिया, जिस कारण उन्हें 'शीश के दानी' भी कहा जाता है।
अपने त्याग से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि कलियुग में वे स्वयं उनके ही नाम, 'श्याम', से पूजे जाएंगे, तथा जो भी सच्चे मन से उनकी शरण में आएगा, उसकी सहायता अवश्य होगी। इसी कारण उन्हें 'हारे का सहारा' कहा जाता है, तथा राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू ग्राम में उनका प्रमुख मंदिर देश-भर के भक्तों की आस्था का केंद्र है।
श्री खाटू श्याम जी से जुड़े पाठ
चालीसा
Chalisaआरती
Aartiश्री खाटू श्याम जी के बारे में
यह पृष्ठ श्री खाटू श्याम जी से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा व आरती का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।
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सामान्य प्रश्न
खाटू श्याम जी कौन थे?
वे महाभारत के वीर बर्बरीक, अर्थात भीम के पौत्र व घटोत्कच के पुत्र, के ही स्वरूप माने जाते हैं।
उन्हें 'शीश के दानी' क्यों कहा जाता है?
महाभारत युद्ध में असंतुलन रोकने हेतु भगवान श्रीकृष्ण के मांगने पर उन्होंने बिना संकोच अपना शीश दान में अर्पित कर दिया था।
उन्हें श्याम नाम से पूजे जाने का वरदान किसने दिया?
उनके त्याग से प्रसन्न होकर भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में अपने ही नाम, 'श्याम', से पूजित होने का वरदान दिया था।
खाटू श्याम जी का प्रमुख मंदिर कहां है?
उनका प्रमुख मंदिर राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खाटू ग्राम में है, जहां प्रतिवर्ष फाल्गुन मेला भी लगता है।