श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर, मथुरा
श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा में स्थित भगवान कृष्ण का पावन जन्मस्थान है, जो हिंदू परंपरा की सप्त मोक्षदायिनी पुरियों में से एक है।

श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर, मथुरा का महत्व
मथुरा को हिंदू परंपरा में सप्त मोक्षदायिनी पुरियों में से एक माना जाता है, मान्यता है कि यहां के तत्कालीन दुष्ट राजा कंस ने अपनी बहन देवकी व उनके पति वसुदेव को कारागार में बंदी बना रखा था, चूंकि एक आकाशवाणी ने भविष्यवाणी की थी कि देवकी की आठवीं संतान ही कंस का वध करेगी। द्वापर युग में इसी कारागार में भगवान विष्णु ने कृष्ण के रूप में अवतार लिया। जन्म के तुरंत पश्चात वसुदेव, कृष्ण को यमुना पार गोकुल ले गए, जहां उनका पालन-पोषण नंद बाबा व माता यशोदा के घर हुआ।
मंदिर परिसर का इतिहास बार-बार हुए विध्वंस व पुनर्निर्माण से भरा है, मान्यता है कि मूल मंदिर कृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने बनवाया था, जिसे चौथी शताब्दी में सम्राट चंद्रगुप्त द्वितीय (विक्रमादित्य) के काल में पुनर्निर्मित किया गया। इसके पश्चात 1017-18 में महमूद गजनवी तथा 1670 में औरंगजेब के काल में मंदिर को ध्वस्त किया गया। स्वतंत्रता के पश्चात 1951 में पंडित मदन मोहन मालवीय की पहल पर 'श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट' की स्थापना हुई, जिसके अंतर्गत 1957-58 में केशवदेव मंदिर व 1982 में भागवत भवन का निर्माण पूर्ण हुआ।
श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर, मथुरा दर्शन की जानकारी
मंदिर परिसर में तीन प्रमुख भाग हैं, केशवदेव मंदिर, गर्भगृह (जहां भगवान कृष्ण का जन्म माना जाता है) तथा राधा-कृष्ण को समर्पित भागवत भवन। सुरक्षा कारणों से परिसर के भीतर मोबाइल फोन, कैमरा व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं है, अतः इन्हें वाहन में ही छोड़ना उचित रहता है।
श्रद्धालु प्रायः मथुरा के साथ ही निकटवर्ती वृंदावन (बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर) व गोकुल के दर्शन भी एक ही यात्रा में कर लेते हैं, चूंकि ये सभी स्थल कृष्ण-लीला से जुड़े ब्रज क्षेत्र का हिस्सा हैं। कृष्ण जन्माष्टमी के समय यहां भव्य उत्सव मनाया जाता है।
श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर, मथुरा कैसे पहुंचें
श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर, मथुरा के बारे में
श्री कृष्ण जन्मस्थान मंदिर भगवान कृष्ण को समर्पित एक पावन धाम है, जो सप्त मोक्षदायिनी पुरियों में से एक मथुरा नगरी में स्थित है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, कंस व देवकी-वसुदेव से जुड़ी कथा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
कृष्ण जन्मस्थान मंदिर कहां स्थित है?
यह उत्तर प्रदेश के मथुरा में, कटरा केशव देव क्षेत्र में स्थित है।
क्या मंदिर के भीतर मोबाइल व कैमरा ले जाया जा सकता है?
नहीं, सुरक्षा कारणों से परिसर के भीतर मोबाइल फोन, कैमरा व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं है।
वर्तमान मंदिर का निर्माण कब हुआ था?
1951 में पंडित मदन मोहन मालवीय की पहल पर स्थापित ट्रस्ट के अंतर्गत केशवदेव मंदिर 1957-58 में तथा भागवत भवन 1982 में बनकर पूर्ण हुआ।
क्या मथुरा के साथ वृंदावन भी देखा जा सकता है?
हां, वृंदावन मथुरा से मात्र कुछ किलोमीटर दूर है, तथा अधिकांश श्रद्धालु बांके बिहारी मंदिर व प्रेम मंदिर सहित वृंदावन के दर्शन भी एक ही यात्रा में कर लेते हैं।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से मार्च सर्वोत्तम रहता है, जब उत्तर भारत की भीषण गर्मी से राहत मिलती है। कृष्ण जन्माष्टमी व होली (विशेषकर निकटवर्ती वृंदावन-बरसाना की लठमार होली) के समय यहां विशेष भीड़ व उत्सव का माहौल रहता है।