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विद्या, वाणी व कला की देवी

माँ सरस्वती

माँ सरस्वती विद्या, वाणी, संगीत व कला की देवी हैं, जिन्हें भगवान ब्रह्मा की शक्ति व सृष्टि में ज्ञान की अधिष्ठात्री माना जाता है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, आरती व पर्व एक साथ उपलब्ध हैं।

माँ सरस्वती

माँ सरस्वती माहात्म्य

मान्यता है कि जब भगवान ब्रह्मा ने सृष्टि की रचना की, तो उन्हें ज्ञान व वाणी की आवश्यकता का अनुभव हुआ, जिसके लिए उन्होंने अपने ही तेज से माँ सरस्वती को उत्पन्न किया। उन्हीं की कृपा से भगवान ब्रह्मा वेदों की रचना कर सके, जिस कारण सरस्वती को वाणी, ज्ञान व सृजन-शक्ति की अधिष्ठात्री देवी माना जाता है।

उनके स्वरूप में श्वेत वस्त्र, वीणा, पुस्तक व माला धारण किए हुए चार भुजाएं दर्शाई जाती हैं, जो क्रमशः संगीत, शास्त्र-ज्ञान व अनुशासित साधना का प्रतीक हैं। उनका वाहन हंस 'नीर-क्षीर विवेक' अर्थात दूध व पानी को अलग करने की क्षमता का प्रतीक है, जो सत्य व असत्य के मध्य विवेकपूर्ण भेद करने की शिक्षा देता है।

वसंत पंचमी के दिन उनकी विशेष पूजा की जाती है, जब विद्यालयों, संगीत व कला संस्थानों में उनकी आराधना होती है तथा छोटे बच्चों का विद्यारंभ संस्कार, अर्थात पहली बार अक्षर-ज्ञान आरंभ कराना, इसी दिन शुभ माना जाता है। इस दिन प्रायः श्वेत व पीले वस्त्र धारण करने की परंपरा है, जो क्रमशः ज्ञान की शुद्धता व वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है।

माँ सरस्वती से जुड़े पाठ

माँ सरस्वती के बारे में

यह पृष्ठ माँ सरस्वती से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, आरती व पर्वों का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।

सामान्य प्रश्न

माँ सरस्वती कौन हैं?

माँ सरस्वती विद्या, वाणी, संगीत व कला की देवी हैं, जिन्हें भगवान ब्रह्मा की शक्ति व सृष्टि में ज्ञान की अधिष्ठात्री माना जाता है।

सरस्वती चालीसा, आरती व वसंत पंचमी की जानकारी कहां मिलेगी?

माँ सरस्वती से जुड़ी सरस्वती चालीसा, आरती व वसंत पंचमी की पूरी जानकारी इसी पृष्ठ पर एक साथ उपलब्ध है।

माँ सरस्वती किसकी शक्ति मानी जाती हैं?

उन्हें भगवान ब्रह्मा की शक्ति माना जाता है, जिन्होंने अपने तेज से सरस्वती को उत्पन्न कर सृष्टि-रचना हेतु ज्ञान व वाणी प्राप्त की।

वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा क्यों की जाती है?

यह दिन ज्ञान व सृजन की देवी के रूप में उनके प्राकट्य से जुड़ा माना जाता है, तथा बच्चों का विद्यारंभ व विद्यालयों में उनकी विशेष पूजा इसी दिन की जाती है।

सरस्वती जी का वाहन हंस क्या दर्शाता है?

हंस को 'नीर-क्षीर विवेक', अर्थात दूध व पानी को अलग करने की क्षमता के लिए जाना जाता है, जो सत्य व असत्य के मध्य भेद करने की विवेकशीलता का प्रतीक है।

सरस्वती जी के हाथों में क्या-क्या होता है?

उनके चार हाथों में वीणा, पुस्तक व माला होती है, जो क्रमशः संगीत, शास्त्र-ज्ञान व अनुशासित साधना का प्रतीक हैं।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

संबंधभगवान ब्रह्मा की शक्ति
वाहनहंस (कभी-कभी मयूर भी)
वाद्य यंत्रवीणा
प्रमुख पर्ववसंत पंचमी
प्रिय रंगश्वेत (शुद्धता का प्रतीक)
प्रमुख मंत्रॐ ऐं सरस्वत्यै नमः