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ज्ञान एवं वसंत का पर्व · माघ शुक्ल पंचमी

वसंत पंचमी

वसंत पंचमी माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला पर्व है, जिस पर ज्ञान व विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है और वसंत ऋतु के आगमन का स्वागत किया जाता है।

वसंत पंचमी
अगली तिथि
११ फरवरी २०२७

पंचमी तिथि के आरंभ व समाप्ति समय के आधार पर कुछ वर्षों में एक दिन का अंतर संभव है, इसलिए नज़दीकी पंचांग से पुष्टि करें। इसी दिन को कामदेव व रति की पूजा का दिन भी माना जाता है, तथा कुछ क्षेत्रों में इसे 'श्री पंचमी' भी कहा जाता है।

वसंत पंचमी का महत्व

मान्यता है कि सृष्टि की रचना के पश्चात ब्रह्मा जी को संसार में सर्वत्र मौन व शून्यता अनुभव हुई, तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे चार भुजाओं वाली, वीणा धारण किए मां सरस्वती प्रकट हुईं। जब मां सरस्वती ने वीणा का पहला स्वर छेड़ा, तब सृष्टि में वाणी व ध्वनि का संचार हुआ। इसी दिन के उपलक्ष्य में वसंत पंचमी मनाई जाती है।

सरस्वती चालीसा
चालीसा · वसंत पंचमी पूजन में पाठ

यह दिन विद्या आरंभ हेतु अत्यंत शुभ माना जाता है, इसीलिए अनेक परिवारों में बच्चों को इसी दिन पहली बार अक्षर लिखना सिखाया जाता है, जिसे 'विद्यारंभ संस्कार' कहा जाता है। विद्यालयों व संगीत-कला संस्थानों में भी इस दिन विशेष रूप से मां सरस्वती की पूजा की जाती है।

वसंत पंचमी वसंत ऋतु के आगमन का भी प्रतीक है, जब सरसों के पीले फूलों से खेत भर उठते हैं, इसीलिए इस दिन पीले वस्त्र धारण करने व पीले पकवान बनाने की परंपरा है। इसी दिन को कामदेव व रति की पूजा का दिन भी माना जाता है।

वसंत पंचमी कैसे मनाई जाती है

प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण किए जाते हैं। घर, विद्यालय व मंदिरों में मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर श्वेत व पीले पुष्पों से पूजा की जाती है।

बच्चों से पट्टी अथवा स्लेट पर पहला अक्षर लिखवाकर 'विद्यारंभ संस्कार' कराया जाता है। पुस्तकों, वाद्य यंत्रों व कला-सामग्री की भी पूजा की जाती है, यह मानते हुए कि मां सरस्वती की कृपा से ज्ञान व कला में निपुणता प्राप्त होती है।

सरस्वती आरती
आरती · पूजन में गाई जाने वाली आरती

पीले चावल, केसरिया हलवा व बूंदी जैसे पीले पकवान बनाए जाते हैं। पंजाब में इसी दिन पतंगबाज़ी का उत्सव भी मनाया जाता है, तथा बंगाल में विद्यालयों में सरस्वती पूजा विशेष भव्यता से की जाती है।

वसंत पंचमी पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान कर पीले वस्त्र धारण करें। मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर श्वेत व पीले पुष्प, अक्षत तथा पीले मिष्ठान अर्पित करें। बच्चों से पहला अक्षर लिखवाकर विद्यारंभ संस्कार करें, तथा पुस्तकों व वाद्य यंत्रों की भी पूजा करें।

वसंत पंचमी के बारे में

वसंत पंचमी माघ मास की शुक्ल पंचमी को मनाया जाने वाला पर्व है, जो मां सरस्वती के प्राकट्य तथा वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस पृष्ठ पर इस पर्व का महत्व, मां सरस्वती के प्राकट्य की कथा, तथा विद्यारंभ संस्कार की परंपरा की जानकारी दी गई है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

वसंत पंचमी कब मनाई जाती है?

वसंत पंचमी प्रत्येक वर्ष माघ मास की शुक्ल पंचमी तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः जनवरी-फरवरी में आती है।

वसंत पंचमी को पीला रंग क्यों पहना जाता है?

पीला रंग वसंत ऋतु में खिलने वाले सरसों के फूलों तथा सूर्य के तेज का प्रतीक माना जाता है, इसीलिए इस दिन पीले वस्त्र व पकवान की परंपरा है।

विद्यारंभ संस्कार क्या है?

विद्यारंभ संस्कार वह परंपरा है जिसमें बच्चों को वसंत पंचमी के दिन पहली बार अक्षर लिखना सिखाया जाता है, यह मानते हुए कि मां सरस्वती की कृपा से विद्या आरंभ करना शुभ होता है।

वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा में क्या अंतर है?

दोनों एक ही तिथि, माघ शुक्ल पंचमी को मनाए जाते हैं। 'सरस्वती पूजा' मुख्य रूप से मां सरस्वती की आराधना को दर्शाता है, जबकि 'वसंत पंचमी' नाम वसंत ऋतु के आगमन को भी सम्मिलित करता है।

संबंधित खोज

मुख्य जानकारी

देवतामां सरस्वती
तिथिमाघ शुक्ल पंचमी
विशेष अनुष्ठानसरस्वती पूजन, विद्यारंभ संस्कार
रंगपीला (सरसों व पीले वस्त्र)
अन्य नामश्री पंचमी, बसंत पंचमी