मुख्यआरतीश्री सरस्वती आरती

श्री सरस्वती आरती

सरस्वती आरती, जय सरस्वती माता, माँ सरस्वती की सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसका पूर्ण पाठ यहां अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री सरस्वती आरती
कड़ी/

पाठ विवरण

रचनाकारअज्ञात
संरचना१ स्थायी · ६ कड़ी
पाठ समय४ मिनट
स्थायी

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।
सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥

कड़ी

चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।
सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥

बाएं कर में वीणा, दाएं कर माला।
शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥

देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।
पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥

विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।
मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥

धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।
ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥

माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।
हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥

इसी देवता की चालीसा
श्री सरस्वती चालीसा
चालीसा पढ़ें
काउंटर

व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।

लक्ष्य चुनें
/ ११

श्री सरस्वती आरती पाठ विधि

बसंत पंचमी अथवा शुक्रवार को संध्या समय दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद और पाठ के अंत में स्थायी पंक्ति 'जय सरस्वती माता' दोहराएं।

पाठ दिवस
बसंत पंचमी एवं शुक्रवार
आगे पढ़ें · Next
श्री सरस्वती चालीसा
स्तोत्र · ७ मिनट
पाठ खोलें →

श्री सरस्वती आरती के बारे में

सरस्वती आरती माँ सरस्वती की स्तुति में गाई जाने वाली सबसे लोकप्रिय आरती है, जिसमें उनके वीणा-मालाधारी, हंसवाहिनी स्वरूप और विद्या-ज्ञान प्रदान करने की महिमा का वर्णन है। आरती एक स्थायी पंक्ति और छह कड़ियों में रचित है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इस कारण इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है। इसमें माँ सरस्वती के वीणा-मालाधारी, हंसवाहिनी स्वरूप और विद्या-ज्ञान प्रदान करने की महिमा का वर्णन है। यह आरती विशेष रूप से बसंत पंचमी और शुक्रवार के अवसर पर भक्तों द्वारा गाई जाती है।

रचनाकार
अज्ञात
पारंपरिक रचना

सामान्य प्रश्न

सरस्वती आरती की रचना किसने की?

आरती में कोई रचयिता स्वयं नामित नहीं है, इसलिए इसे अज्ञात रचनाकार की परंपरागत रचना माना जाता है।

आरती की संरचना क्या है?

एक स्थायी पंक्ति और छह कड़ियां हैं। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है।

सरस्वती आरती पाठ का उत्तम समय क्या है?

बसंत पंचमी और शुक्रवार को संध्या समय, दीप जलाकर गाना उत्तम माना जाता है। विद्यारंभ या परीक्षा से पूर्व भी इसे गाना शुभ माना जाता है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

संबंधित खोज