माँ संतोषी
माँ संतोषी संतोष, सुख व घर-परिवार में शांति प्रदान करने वाली देवी हैं, जिनकी सोलह शुक्रवार तक चलने वाली व्रत-परंपरा उत्तर भारत में अत्यंत लोकप्रिय है। यहां उनसे जुड़ी सभी चालीसा, आरती व व्रत कथा एक साथ उपलब्ध हैं।

माँ संतोषी माहात्म्य
एक प्रचलित लोक-कथा के अनुसार भगवान गणेश के पुत्रों, शुभ व लाभ, ने अपनी बहन न होने पर रक्षाबंधन के अवसर पर एक बहन की इच्छा प्रकट की। इस पर भगवान गणेश ने अपने ही तेज से माँ संतोषी को प्रकट किया, जिस कारण उन्हें गणेश जी की पुत्री माना जाता है। प्राचीन पुराणों में उनका उल्लेख नहीं मिलता, अपितु वे बीसवीं सदी में उत्तर भारत में लोकप्रिय हुई एक अपेक्षाकृत नवीन लोक-देवी हैं।
उनकी आराधना का प्रमुख माध्यम सोलह शुक्रवार व्रत है, जिसमें सोलह लगातार शुक्रवारों तक खट्टी वस्तुओं का त्याग कर, प्रत्येक शुक्रवार कथा सुनी व गुड़-चने का प्रसाद बांटा जाता है। कथा में एक निर्धन किंतु श्रद्धावान स्त्री के जीवन में आई कठिनाइयों का वर्णन है, जो माँ संतोषी की भक्ति व धैर्य से दूर होती हैं।
वर्ष 1975 में प्रदर्शित हिंदी फिल्म 'जय संतोषी माँ' ने उनकी भक्ति को संपूर्ण देश में व्यापक रूप से लोकप्रिय बना दिया, जिससे एक क्षेत्रीय लोक-परंपरा राष्ट्रव्यापी व्रत बन गई तथा विशेषकर गृहस्थ महिलाओं के मध्य पारिवारिक सुख-समृद्धि हेतु उनकी पूजा प्रचलित हुई।
माँ संतोषी से जुड़े पाठ
चालीसा
Chalisaआरती
Aartiव्रत कथा
Vrat Kathaमाँ संतोषी के बारे में
यह पृष्ठ माँ संतोषी से जुड़े सभी पाठों, अर्थात चालीसा, आरती व व्रत कथा का एक संग्रह है, जो एक ही स्थान पर सुलभ है।
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सामान्य प्रश्न
माँ संतोषी को गणेश जी की पुत्री क्यों माना जाता है?
लोक-मान्यता के अनुसार गणेश जी के पुत्रों शुभ व लाभ की बहन की इच्छा पूर्ण करने हेतु भगवान गणेश ने अपने तेज से माँ संतोषी को प्रकट किया था।
सोलह शुक्रवार व्रत में क्या नियम पालन किया जाता है?
सोलह लगातार शुक्रवारों तक खट्टी वस्तुओं का त्याग किया जाता है, तथा प्रत्येक शुक्रवार व्रत कथा सुनकर गुड़-चने का प्रसाद बांटा जाता है।
माँ संतोषी की पूजा राष्ट्रव्यापी कैसे लोकप्रिय हुई?
वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म 'जय संतोषी माँ' ने उनकी भक्ति को संपूर्ण देश में व्यापक रूप से लोकप्रिय बना दिया।
माँ संतोषी की पूजा किसलिए की जाती है?
उन्हें संतोष, सुख व घर-परिवार में शांति प्रदान करने वाली देवी माना जाता है, जिस कारण विशेषकर गृहस्थ महिलाएं पारिवारिक सुख-समृद्धि हेतु उनकी पूजा करती हैं।