मुख्यआरतीश्री सिद्धिविनायक आरती

श्री सिद्धिविनायक आरती

सिद्धिविनायक आरती, जिसे पहली पंक्ति से 'सुखकर्ता दुःखहर्ता' भी कहा जाता है, समर्थ रामदास रचित गणेश जी की सबसे लोकप्रिय मराठी आरती है, जिसका पूर्ण पाठ यहां अर्थ सहित उपलब्ध है।

श्री सिद्धिविनायक आरती
कड़ी/

पाठ विवरण

रचनाकारसमर्थ रामदास
संरचना१ स्थायी · ३ कड़ी
पाठ समय३ मिनट
स्थायी

जय देव जय देव जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मन कामना पूर्ती॥

कड़ी

सुखकर्ता दुःखहर्ता, वार्ता विघ्नांची।
नुरवी पुरवी प्रेम, कृपा जयाची॥
सर्वांगी सुंदर, उटी शेंदुराची।
कंठी झळके माळ, मुक्ताफळांची॥

रत्नखचित फरा, तुज गौरीकुमरा।
चंदनाची उटी, कुंकुमकेशरा॥
हिरेजडित मुकुट, शोभतो बरा।
रुणझुणती नूपुरे, चरणी घागरिया॥

लंबोदर पीतांबर, फणिवरबंधना।
सरळ सोंड वक्रतुंड, त्रिनयना॥
दास रामाचा वाट पाहे, सदना।
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे, सुरवरवंदना॥

काउंटर

व्रत में कई बार पाठ किया जाता है: ११, २१ या १०८ बार। इस काउंटर से अपनी पाठ गिनती सहेजें।

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श्री सिद्धिविनायक आरती पाठ विधि

बुधवार, संकष्टी चतुर्थी अथवा गणेश चतुर्थी के दिन दीप जलाकर पाठ करें। प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति 'जय देव जय देव' दोहराएं।

पाठ दिवस
बुधवार, संकष्टी चतुर्थी एवं गणेश चतुर्थी
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गणेश चालीसा
स्तोत्र · ७ मिनट
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श्री सिद्धिविनायक आरती के बारे में

सिद्धिविनायक आरती, जिसे उसकी पहली पंक्ति के कारण 'सुखकर्ता दुःखहर्ता' के नाम से भी जाना जाता है, समर्थ रामदास द्वारा मराठी भाषा में रचित गणेश जी की आरती है, जो उनके स्वरूप, आभूषण और कृपा का वर्णन करती है। रचना एक स्थायी पंक्ति से आरंभ होकर तीन कड़ियों में आगे बढ़ती है, प्रत्येक कड़ी के बाद स्थायी पंक्ति दोहराई जाती है, और अंतिम कड़ी में रचयिता का हस्ताक्षर 'दास रामाचा' मिलता है।

इस पृष्ठ पर पूरा पाठ शुद्ध देवनागरी में, प्रत्येक कड़ी के सरल हिंदी अर्थ के साथ दिया गया है। अक्षरों का आकार बढ़ाया जा सकता है, और पूरा पाठ प्रिंट भी किया जा सकता है।

रचनाकार
समर्थ रामदास
सन् १६०८–१६८२ · मराठी

समर्थ रामदास के बारे में

समर्थ रामदास (सन् १६०८–१६८२) महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत, कवि और छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु माने जाते हैं। उन्होंने यह आरती मराठी भाषा में रची, जो आज गणेश पूजा में सबसे अधिक गाई जाने वाली आरती बन चुकी है, विशेषकर मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर में। मूल रचना में सात कड़ियां बताई जाती हैं, परंतु आज सामान्यतः तीन कड़ियां ही गाई जाती हैं, जो इस पृष्ठ पर प्रस्तुत हैं।

सामान्य प्रश्न

सिद्धिविनायक आरती की रचना किसने की?

समर्थ रामदास (सन् १६०८–१६८२) ने की, जो महाराष्ट्र के प्रसिद्ध संत और छत्रपति शिवाजी महाराज के गुरु माने जाते हैं। अंतिम कड़ी में उनका हस्ताक्षर 'दास रामाचा' मिलता है।

क्या सिद्धिविनायक आरती और 'सुखकर्ता दुःखहर्ता' एक ही हैं?

हाँ, यह वही आरती है — इसकी पहली पंक्ति 'सुखकर्ता दुःखहर्ता' होने के कारण इसे इसी नाम से भी जाना जाता है, विशेषकर महाराष्ट्र में।

आरती की संरचना क्या है?

एक स्थायी पंक्ति और तीन कड़ियां हैं, जो आज सामान्यतः गाई जाती हैं। मूल रचना में सात कड़ियां बताई जाती हैं।

क्या गणेश आरती और सिद्धिविनायक आरती में अंतर है?

दोनों भगवान गणेश को समर्पित हैं, परंतु ये दो भिन्न रचनाएं हैं। गणेश आरती ('जय गणेश जय गणेश') हिंदी में है, जबकि सिद्धिविनायक आरती ('सुखकर्ता दुःखहर्ता') समर्थ रामदास द्वारा मराठी में रची गई है।

क्या अर्थ जानना आवश्यक है?

आवश्यक नहीं, परंतु अर्थ सहित पाठ करने से भाव स्पष्ट होता है। इस पृष्ठ पर प्रत्येक कड़ी का सरल अर्थ साथ में दिया गया है।

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