मुख्यत्योहारसकट चौथ (तिलकुटा चौथ)
संतान के कल्याण का व्रत · माघ कृष्ण चतुर्थी

सकट चौथ (तिलकुटा चौथ)

सकट चौथ माघ मास की कृष्ण चतुर्थी को माताओं द्वारा अपनी संतान की दीर्घायु व कल्याण हेतु रखा जाने वाला व्रत है, जिसमें भगवान गणेश व सकट माता का पूजन किया जाता है।

सकट चौथ (तिलकुटा चौथ)
अगली तिथि
२५ जनवरी २०२७

यह व्रत प्रतिमाह आने वाली संकष्टी चतुर्थी में से माघ मास की संकष्टी चतुर्थी है, जिसे विशेष महत्व दिया जाता है। चंद्रोदय का सटीक समय शहर व वर्ष अनुसार बदलता है, इसलिए नज़दीकी पंचांग देखें।

सकट चौथ (तिलकुटा चौथ) का महत्व

सकट चौथ को संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है, जो हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है, किंतु माघ मास में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को सकट चौथ के नाम से विशेष रूप से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान गणेश व सकट माता (संकटा देवी) का पूजन करने से समस्त संकट दूर होते हैं तथा संतान पर आई विपदाएं टल जाती हैं।

सकट चौथ व्रत कथा
कथा · कुम्हार व बुढ़िया की कथा

सकट माता को संकटों का नाश करने वाली देवी माना जाता है, तथा उन्हें भगवान गणेश की माता अथवा उनसे जुड़ी शक्ति के रूप में पूजा जाता है। इसीलिए इस व्रत में गणेश जी व सकट माता, दोनों का पूजन एक साथ किया जाता है।

इस व्रत को तिलकुटा चौथ अथवा तिल चौथ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन तिल व गुड़ से बने लड्डुओं का भोग भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है, तथा माताएं स्वयं भी इन्हीं का सेवन कर व्रत का पारण करती हैं।

सकट चौथ (तिलकुटा चौथ) कैसे मनाई जाती है

माताएं प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लेती हैं, तथा दिनभर निराहार अथवा फलाहार व्रत रखती हैं। तिल व गुड़ से लड्डू बनाकर भगवान गणेश व सकट माता को भोग स्वरूप अर्पित किया जाता है।

संध्या समय पूजा कर सकट चौथ की कथा सुनी जाती है, तथा चंद्रमा के उदय होने पर उसे जल व तिल-गुड़ अर्पित कर अर्घ्य दिया जाता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात ही व्रत का पारण किया जाता है।

गणेश आरती
आरती · संध्या पूजन में गाई जाने वाली आरती

कुछ क्षेत्रों में इस दिन गणेश जी की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उसका पूजन किया जाता है, तथा पूजा के पश्चात परिवार सहित तिल-गुड़ के लड्डू व अन्य पकवान ग्रहण किए जाते हैं।

सकट चौथ (तिलकुटा चौथ) पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान कर व्रत का संकल्प लें तथा निराहार अथवा फलाहार व्रत रखें। तिल-गुड़ के लड्डू बनाकर भगवान गणेश व सकट माता को अर्पित करें। संध्या समय पूजा कर सकट चौथ की कथा सुनें, तथा चंद्रोदय पर चंद्रमा को जल व तिल-गुड़ का अर्घ्य देकर व्रत का पारण करें।

सकट चौथ व्रत कथा पढ़ें
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सकट चौथ (तिलकुटा चौथ) के बारे में

सकट चौथ माघ मास की कृष्ण चतुर्थी को माताओं द्वारा अपनी संतान के कल्याण हेतु रखा जाने वाला व्रत है। इस पृष्ठ पर इस व्रत का महत्व, तिल-गुड़ के भोग की परंपरा, तथा चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि की जानकारी दी गई है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

सकट चौथ कब मनाई जाती है?

सकट चौथ प्रत्येक वर्ष माघ मास की कृष्ण चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है, जो माघ मास की संकष्टी चतुर्थी भी कहलाती है।

सकट चौथ का व्रत कब पारण किया जाता है?

यह व्रत संध्या समय चंद्रमा के उदय होने पर उसे जल व तिल-गुड़ का अर्घ्य देकर पारण किया जाता है।

सकट चौथ को तिलकुटा चौथ क्यों कहा जाता है?

इस दिन तिल व गुड़ से बने लड्डुओं (तिलकुटा) का भोग भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है तथा माताएं भी इन्हीं से व्रत का पारण करती हैं, इसीलिए इसे तिलकुटा चौथ भी कहा जाता है।

सकट माता कौन हैं?

सकट माता (संकटा देवी) को संकटों का नाश करने वाली देवी माना जाता है, जिन्हें भगवान गणेश से जुड़ी शक्ति के रूप में पूजा जाता है, तथा इस व्रत में गणेश जी के साथ उनका भी पूजन किया जाता है।

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मुख्य जानकारी

देवताभगवान गणेश, सकट माता
तिथिमाघ कृष्ण चतुर्थी
विशेष अनुष्ठानतिल-गुड़ का भोग, चंद्रमा को अर्घ्य
व्रत करने वालीसंतानवती माताएं
व्रत प्रकारदिनभर का व्रत, चंद्रोदय पर पारण