मुख्यमंदिरसोमनाथ मंदिर
ज्योतिर्लिंग · गुजरात

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर गुजरात के वेरावल में अरब सागर के तट पर स्थित भगवान शिव का पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है।

सोमनाथ मंदिर

सोमनाथ मंदिर का महत्व

मान्यता है कि दक्ष प्रजापति ने अपने जामाता चंद्रदेव को श्राप दे दिया था, जिससे उनकी कांति क्षीण होने लगी। चंद्रदेव ने प्रभास क्षेत्र (वर्तमान सोमनाथ) में आकर भगवान शिव की घोर तपस्या की, जिससे प्रसन्न होकर शिवजी ने उन्हें श्राप से आंशिक मुक्ति प्रदान की, जिस कारण चंद्रमा पंद्रह दिन बढ़ता व पंद्रह दिन घटता है। 'सोम' अर्थात चंद्रमा तथा 'नाथ' अर्थात स्वामी, इसी से इस ज्योतिर्लिंग का नाम सोमनाथ पड़ा।

शिव चालीसा
चालीसा · सोमनाथ पूजन में पाठ

सोमनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है, तथा इसका इतिहास बार-बार हुए विध्वंस व पुनर्निर्माण से भरा है, 1026 में महमूद गजनवी ने मंदिर को ध्वस्त किया, तथा इसके पश्चात 1297, 1394 व अंततः 1706 में औरंगजेब के काल में भी मंदिर पर आघात हुए। प्रत्येक बार भीमदेव, कुमारपाल जैसे शासकों ने इसका पुनर्निर्माण करवाया। स्वतंत्रता के पश्चात 1947 में सरदार वल्लभभाई पटेल ने वर्तमान मंदिर की आधारशिला रखी, जिसका उद्घाटन 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने किया।

सोमनाथ मंदिर दर्शन की जानकारी

मंदिर त्रिवेणी संगम पर स्थित है, कपिला, हिरण व सरस्वती, तीन नदियों का यह पावन मिलन स्थल प्राचीन काल से ही तीर्थयात्रियों के लिए महत्वपूर्ण रहा है। मंदिर परिसर में संध्याकाल में होने वाला लाइट एंड साउंड शो मंदिर के इतिहास को दर्शाता है, तथा यह अवश्य देखने योग्य है।

मंदिर परिसर के दक्षिणी छोर पर समुद्र की ओर एक बाणस्तंभ (तीर के आकार का स्तंभ) स्थापित है, जिस पर उत्कीर्ण संस्कृत श्लोक के अनुसार इस बिंदु से दक्षिणी ध्रुव (अंटार्कटिका) तक समुद्र में कोई भूभाग नहीं पड़ता। मंदिर वर्षभर खुला रहता है, तथा तटीय जलवायु के कारण अक्टूबर से मार्च के मध्य यात्रा करना सर्वाधिक उपयुक्त रहता है।

सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचें

निकटतम हवाई अड्डा
दीव हवाई अड्डा (लगभग 63 किमी दूर) अथवा राजकोट हवाई अड्डा (लगभग 200 किमी दूर)
निकटतम रेलवे स्टेशन
सोमनाथ रेलवे स्टेशन, मंदिर से मात्र आधा किमी दूर; वेरावल रेलवे स्टेशन (लगभग 7 किमी दूर) एक अन्य विकल्प है
सड़क मार्ग
अहमदाबाद से सोमनाथ तक लगभग 400 किमी तथा जूनागढ़ से लगभग 82 किमी का सुगम सड़क मार्ग उपलब्ध है, तथा मंदिर वेरावल शहर के भीतर ही स्थित है।
दिशा-निर्देश पाएं

सोमनाथ मंदिर के बारे में

सोमनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में प्रथम माना जाता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, चंद्रदेव से जुड़ी कथा, इसके विध्वंस व पुनर्निर्माण का इतिहास, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

सोमनाथ मंदिर कहां स्थित है?

यह गुजरात के वेरावल में, अरब सागर के तट पर, प्रभास पाटन नामक स्थान पर स्थित है।

सोमनाथ नाम का अर्थ क्या है?

'सोम' का अर्थ चंद्रमा तथा 'नाथ' का अर्थ स्वामी है, यह नाम चंद्रदेव द्वारा यहां की गई तपस्या की कथा से जुड़ा है।

सोमनाथ मंदिर कितनी बार ध्वस्त किया गया?

मंदिर पर 1026 (महमूद गजनवी), 1297, 1394 व 1706 (औरंगजेब) में आघात हुए। वर्तमान मंदिर का निर्माण स्वतंत्रता के पश्चात सरदार वल्लभभाई पटेल की पहल पर हुआ, जिसका उद्घाटन 1951 में हुआ।

बाणस्तंभ पर क्या उत्कीर्ण है?

मंदिर के दक्षिणी छोर पर स्थित इस स्तंभ पर संस्कृत में उत्कीर्ण है कि इस बिंदु से दक्षिणी ध्रुव तक समुद्र में कोई भूभाग नहीं पड़ता।

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यात्रा हेतु उचित समय

अक्टूबर से मार्च सर्वोत्तम रहता है, जब तटीय गुजरात की गर्मी व मानसून की उमस दोनों से राहत मिलती है। संध्या के समय होने वाला लाइट एंड साउंड शो अवश्य देखने योग्य है।

लाइव दर्शन देखें

मुख्य जानकारी

देवताभगवान शिव
स्थानवेरावल, गुजरात
समूहप्रथम ज्योतिर्लिंग
वर्तमान स्वरूप1951 में पुनर्निर्मित
विशेषतात्रिवेणी संगम (कपिला, हिरण व सरस्वती)