मुख्यमंदिरनागेश्वर मंदिर
ज्योतिर्लिंग · गुजरात

नागेश्वर मंदिर

नागेश्वर मंदिर गुजरात में द्वारका के निकट स्थित भगवान शिव का पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा नागों (सर्पों) व विषों से रक्षा करने वाले शिव-स्वरूप के रूप में पूजा जाता है।

नागेश्वर मंदिर

नागेश्वर मंदिर का महत्व

मान्यता है कि दारुक नामक एक दानव ने सुप्रिय नामक भगवान शिव के एक परम भक्त सहित अनेक लोगों को बंदी बना लिया था। कारागार में भी सुप्रिय शिव-भक्ति में लीन रहे तथा अपने साथी बंदियों को भी शिव-पूजा हेतु प्रेरित करते रहे। जब दारुक ने क्रोधित होकर सुप्रिय का वध करना चाहा, तो भगवान शिव स्वयं वहां प्रकट हुए तथा दानव का संहार कर भक्तों की रक्षा की। इसी घटना की स्मृति में यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई, तथा शिवजी को नागेश्वर (नागों व विषों से रक्षा करने वाले) के रूप में पूजा जाने लगा।

शिव चालीसा
चालीसा · नागेश्वर पूजन में पाठ

नागेश्वर की एक विशेषता यह है कि इसका गर्भगृह भूमिगत है, जहां भक्तों को कुछ सीढ़ियां उतरकर दर्शन हेतु जाना होता है। मंदिर परिसर में स्थित भगवान शिव की लगभग 25 मीटर ऊंची ध्यानस्थ प्रतिमा इस स्थान की सबसे प्रमुख पहचान बन चुकी है। ध्यान रहे, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के स्थान को लेकर परंपरा में कुछ मतभेद भी हैं, महाराष्ट्र के औंढा नागनाथ व उत्तराखंड के जागेश्वर को भी कुछ परंपराओं में नागेश्वर ज्योतिर्लिंग माना जाता है, यद्यपि द्वारका का यह मंदिर सर्वाधिक व्यापक रूप से मान्य है।

नागेश्वर मंदिर दर्शन की जानकारी

नागेश्वर मंदिर द्वारका से बेट द्वारका जाने वाले मार्ग पर स्थित है, अतः श्रद्धालु प्रायः द्वारकाधीश मंदिर, नागेश्वर व बेट द्वारका, तीनों के दर्शन एक ही यात्रा में कर लेते हैं। भूमिगत गर्भगृह तक पहुंचने के लिए कुछ सीढ़ियां उतरनी होती हैं, जो शारीरिक रूप से अधिकांश श्रद्धालुओं के लिए सुगम है।

मंदिर परिसर में स्थित विशाल शिव प्रतिमा एक लोकप्रिय फोटोग्राफी स्थल भी है, जो दूर से ही दिखाई देने लगती है। मंदिर वर्षभर खुला रहता है, तथा तटीय जलवायु के कारण अक्टूबर से मार्च के मध्य यात्रा करना सर्वाधिक उपयुक्त रहता है।

नागेश्वर मंदिर कैसे पहुंचें

निकटतम हवाई अड्डा
पोरबंदर हवाई अड्डा (लगभग 95 किमी दूर) अथवा जामनगर हवाई अड्डा (लगभग 110 किमी दूर)
निकटतम रेलवे स्टेशन
द्वारका रेलवे स्टेशन (लगभग 18 किमी दूर)
सड़क मार्ग
द्वारका से बेट द्वारका मार्ग पर लगभग 18 किमी की सुगम सड़क यात्रा द्वारा मंदिर तक पहुंचा जा सकता है, तथा श्रद्धालु प्रायः द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन के साथ ही यहां भी आते हैं।
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नागेश्वर मंदिर के बारे में

नागेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा भक्तों को सर्प-विष व अनिष्ट से रक्षा करने वाले स्वरूप के रूप में जाना जाता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, दारुक दानव व सुप्रिय भक्त से जुड़ी कथा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।

इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

नागेश्वर मंदिर कहां स्थित है?

यह गुजरात में द्वारका से लगभग 18 किमी दूर, बेट द्वारका जाने वाले मार्ग पर स्थित है।

नागेश्वर नाम का क्या अर्थ है?

'नागेश्वर' का अर्थ है नागों (सर्पों) के स्वामी, यहां भगवान शिव को भक्तों को सर्प-विष व अनिष्ट से रक्षा करने वाले रूप में पूजा जाता है।

नागेश्वर मंदिर की सबसे विशिष्ट पहचान क्या है?

मंदिर का गर्भगृह भूमिगत है, तथा परिसर में स्थित भगवान शिव की लगभग 25 मीटर ऊंची ध्यानस्थ प्रतिमा इस स्थान की सबसे प्रमुख पहचान है।

क्या नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के स्थान को लेकर कोई मतभेद है?

हां, कुछ परंपराओं में महाराष्ट्र के औंढा नागनाथ व उत्तराखंड के जागेश्वर को भी नागेश्वर ज्योतिर्लिंग माना जाता है, यद्यपि द्वारका का यह मंदिर सर्वाधिक व्यापक रूप से मान्य है।

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यात्रा हेतु उचित समय

अक्टूबर से मार्च सर्वोत्तम रहता है, जब तटीय गुजरात की गर्मी व मानसून की उमस दोनों से राहत मिलती है।

मुख्य जानकारी

देवताभगवान शिव
स्थानद्वारका के निकट, गुजरात
समूह१२ ज्योतिर्लिंगों में से एक
विशेषताभूमिगत गर्भगृह; 25 मीटर ऊंची शिव प्रतिमा
अर्थनागों (सर्पों) के स्वामी