महाकालेश्वर मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर मध्य प्रदेश के उज्जैन में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित भगवान शिव का पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

महाकालेश्वर मंदिर का महत्व
मान्यता है कि प्राचीन काल में दूषण नामक एक शक्तिशाली दानव ने अवंतिका (वर्तमान उज्जैन) के निवासियों को अत्यंत त्रस्त कर दिया था। नगर के राजा चंद्रसेन भगवान शिव के परम भक्त थे, तथा दानव के अत्याचारों के बावजूद उन्होंने पूजा-अर्चना नहीं छोड़ी। भक्तों की पुकार सुनकर भगवान शिव स्वयं महाकाल के रूप में भूमि से प्रकट हुए तथा दूषण का वध कर नगरवासियों की रक्षा की। इसी स्मृति में यहां ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई।
'महाकाल' दो शब्दों से मिलकर बना है, 'महा' अर्थात महान तथा 'काल' अर्थात समय व मृत्यु, जो भगवान शिव को समय व मृत्यु के अधिपति के रूप में दर्शाता है। महाकालेश्वर बारह ज्योतिर्लिंगों में एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो दक्षिणमुखी है, जबकि शेष सभी पूर्वाभिमुख हैं, दक्षिण दिशा को मृत्यु से जोड़ा जाता है, अतः इस दिशा में मुख होना शिव को मृत्यु के स्वामी के रूप में प्रतिष्ठित करता है।
महाकालेश्वर मंदिर दर्शन की जानकारी
मंदिर की सबसे प्रसिद्ध विशेषता है इसकी भस्म आरती, जो प्रतिदिन प्रातः लगभग 4 बजे ब्रह्म मुहूर्त में होती है, जिसमें शिवलिंग पर पावन भस्म अर्पित की जाती है। इस अनुष्ठान में सम्मिलित होने हेतु सीमित स्थान होने के कारण पूर्व ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है, तथा इसे प्रायः कई सप्ताह पूर्व बुक करना पड़ता है।
मंदिर क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है, तथा उज्जैन नगरी स्वयं भारत की सप्त पुरियों (मोक्षदायिनी नगरियों) में से एक तथा कुंभ मेले के चार आयोजन-स्थलों में से एक (सिंहस्थ कुंभ) मानी जाती है। मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्षभर बंद रहता है, तथा केवल नागपंचमी के दिन ही दर्शन हेतु खुलता है।
महाकालेश्वर मंदिर कैसे पहुंचें
महाकालेश्वर मंदिर के बारे में
महाकालेश्वर मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक पावन धाम है, जो बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक तथा एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग माना जाता है। इस पृष्ठ पर मंदिर का पौराणिक महत्व, दूषण दानव से जुड़ी कथा, भस्म आरती की परंपरा, तथा यात्रा व दर्शन से जुड़ी सामान्य जानकारी दी गई है।
इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।
सामान्य प्रश्न
महाकालेश्वर मंदिर कहां स्थित है?
यह मध्य प्रदेश के उज्जैन में, क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है।
महाकालेश्वर को एकमात्र दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग क्यों कहा जाता है?
बारह ज्योतिर्लिंगों में महाकालेश्वर एकमात्र ऐसा है जो दक्षिण दिशा की ओर मुख किए हुए है, जबकि शेष सभी पूर्वाभिमुख हैं। दक्षिण दिशा मृत्यु से जुड़ी मानी जाती है, अतः यह शिव को मृत्यु के स्वामी के रूप में दर्शाता है।
भस्म आरती क्या है?
भस्म आरती प्रतिदिन प्रातः लगभग 4 बजे होने वाला एक विशेष अनुष्ठान है, जिसमें शिवलिंग पर पावन भस्म अर्पित की जाती है। इसमें सम्मिलित होने हेतु पूर्व ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है।
नागचंद्रेश्वर मंदिर कब खुलता है?
महाकालेश्वर परिसर में स्थित यह मंदिर वर्षभर बंद रहता है, तथा केवल नागपंचमी के दिन ही श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है।
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यात्रा हेतु उचित समय
अक्टूबर से मार्च सर्वोत्तम रहता है, जब मध्य प्रदेश की भीषण गर्मी से राहत मिलती है। तड़के होने वाली भस्म आरती हेतु पूर्व ऑनलाइन बुकिंग अनिवार्य है, तथा सीमित स्थान होने के कारण जल्द बुकिंग उचित रहती है।