मुख्यत्योहारहरियाली तीज
सावन का श्रृंगार पर्व · श्रावण शुक्ल तृतीया

हरियाली तीज

हरियाली तीज श्रावण मास की शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला पर्व है, जो भगवान शिव व मां पार्वती के पुनर्मिलन का स्मरण कराता है।

हरियाली तीज
अगली तिथि
४ अगस्त २०२७

हरियाली तीज को 'श्रावणी तीज' अथवा 'सिंधारा तीज' भी कहा जाता है, तथा इसे बहुत-सी जगह हरतालिका तीज से भिन्न, अधिक हर्षोल्लास वाला पर्व माना जाता है, जिसमें व्रत उतना कठोर नहीं होता।

हरियाली तीज का महत्व

मान्यता है कि मां पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने हेतु 107 जन्मों तक कठोर तपस्या की थी, और 108वें जन्म में श्रावण शुक्ल तृतीया को ही भगवान शिव ने उन्हें पत्नी रूप में स्वीकार किया था। इसी पुनर्मिलन के उपलक्ष्य में हरियाली तीज मनाई जाती है।

शिव चालीसा
चालीसा · हरियाली तीज पूजन में पाठ

यह पर्व सावन मास में मनाया जाता है, जब वर्षा ऋतु से धरती हरियाली से भर उठती है, इसीलिए इसे 'हरियाली तीज' कहा जाता है। विवाहित स्त्रियां अपने वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि हेतु, तथा अविवाहित कन्याएं शिव जैसे वर की कामना से इस दिन व्रत रखती हैं।

यह हरतालिका तीज से भिन्न, अधिक सौम्य पर्व माना जाता है, जिसमें श्रृंगार, झूला-झूलना तथा सावन के गीत गाना प्रमुख परंपराएं हैं, न कि निर्जला व्रत।

हरियाली तीज कैसे मनाई जाती है

स्त्रियां हरे वस्त्र व चूड़ियां पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं, तथा हाथों में मेहंदी रचाती हैं। घरों व पेड़ों पर सजे झूलों पर झूलते हुए सावन के पारंपरिक गीत गाए जाते हैं।

घर में भगवान शिव व मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा की जाती है, तथा फलाहार व्रत रखा जाता है, जिसकी कठोरता श्रद्धा व सामर्थ्य पर निर्भर करती है।

विवाह के पश्चात पहली हरियाली तीज पर मायके से बेटी को 'सिंधारा' भेजा जाता है, जिसमें मिठाई, वस्त्र व श्रृंगार सामग्री होती है, इसीलिए इसे 'सिंधारा तीज' भी कहा जाता है।

हरियाली तीज पूजा विधि

प्रातःकाल स्नान कर हरे वस्त्र धारण करें तथा सोलह श्रृंगार करें। घर में भगवान शिव व मां पार्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा करें, फल व मिठाई का भोग अर्पित करें। दिनभर फलाहार व्रत रखें तथा झूला झूलकर सावन के गीत गाएं।

हरियाली तीज के बारे में

हरियाली तीज श्रावण मास की शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला पर्व है, जो भगवान शिव व मां पार्वती के पुनर्मिलन का स्मरण कराता है। इस पृष्ठ पर इस पर्व का महत्व, श्रृंगार व झूला-झूलने की परंपरा, तथा सिंधारा तीज की रस्म की जानकारी दी गई है।

बाद में भाद्रपद मास में आने वाली हरतालिका तीज की जानकारी हेतु उसका अलग पृष्ठ भी उपलब्ध है। इस पृष्ठ की जानकारी बड़े अक्षरों व प्रिंट सुविधा सहित उपलब्ध है।

सामान्य प्रश्न

हरियाली तीज कब मनाई जाती है?

हरियाली तीज प्रत्येक वर्ष श्रावण मास की शुक्ल तृतीया तिथि को मनाई जाती है, जो सामान्यतः जुलाई-अगस्त में आती है।

हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या अंतर है?

हरियाली तीज श्रावण मास में आती है और अपेक्षाकृत सौम्य पर्व है, जबकि हरतालिका तीज भाद्रपद मास में आती है और इसमें कठोर निर्जला व्रत रखा जाता है।

सिंधारा क्या है?

सिंधारा एक उपहार है जो विवाहित बेटी को उसके मायके से हरियाली तीज पर भेजा जाता है, जिसमें मिठाई, वस्त्र व श्रृंगार सामग्री होती है।

हरियाली तीज पर झूला क्यों झूला जाता है?

सावन की हरियाली व वर्षा ऋतु के उल्लास का आनंद लेने के लिए घरों व पेड़ों पर झूले सजाए जाते हैं, जिन पर झूलते हुए स्त्रियां पारंपरिक गीत गाती हैं।

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मुख्य जानकारी

देवताभगवान शिव, मां पार्वती
तिथिश्रावण शुक्ल तृतीया
विशेष अनुष्ठानश्रृंगार, झूला-झूलना, मेहंदी
अन्य नामश्रावणी तीज, सिंधारा तीज
व्रत प्रकारफलाहार व्रत, कठोरता श्रद्धानुसार